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Ballia News: स्टालिन की विस्तार नीति को आगे बढ़ा रहा रुस, बोले पूर्व कुलपति डॉ. अशोक
Sun, 26 Feb 2023 11:34 PM IST
वाराणसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलिया
संवाद न्यूज एजेंसी, बलिया
Updated Sun, 26 Feb 2023 11:34 PM IST
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बलिया। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली एवं अमरनाथ मिश्र पीजी कालेज दूबे छपरा के संयुक्त तत्वावधान में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गंगा बहुद्देशीय सभागार में रुस-यूक्रेन संघर्ष एवं वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका संगोष्ठी का समापन किया। संगोष्ठी के समापन समारोह को संबोधित करते राजस्थान के सिंहानिया विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि रुस, स्टालिन की विस्तार नीति को आगे बढ़ा रहा है। रुस किसी तरह किव पर कब्जा करना चाहता है। जबकि अमेरिका बिलकुल नहीं चाहता है कि रुस का विस्तार यूरोप में अधिक हो। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी इस बात के लिए जानी जा सकेगी कि एक ऐसा देश जिसके पास सिर्फ साहस एवं मनोबल युवक्त नागरिक थे। उसके रुस जैसे शक्तिशाली देश को संघर्ष में पछाड़ देने के लिए कमर कस लिया था। इस संघर्ष ने भ्रम तोड़ दिया कि अब जमीनी लड़ाई समाप्त हो गई है। जिस तरह से चीन ओबीओआर के माध्यम से पूरी दुनिया में अपना जाल बिछा रखा है। उसी तरह रुस इस संघर्ष के माध्यम से कारिडोर की तलाश में है। रुस के साथ सामरिक हित जुड़े है। राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह के अध्यक्षीय संबोधन में जिला जज जितेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि इस संघर्ष से अमेरिका को लाभ है। उसने अपने हित में सघर्ष को जारी रखना चाहता है। भारत का दीर्घकालिक हित इसी में है कि भारत रुस का नैतिक विरोध करें। उन्होंने कहा कि चीन, ताइवान पर हमले की फिराक में बैठा था। लेकिन इस संघर्ष से चीन को अपनी विस्तारवादी नीति पर रोक लगानी पड़ी। कहा कि रुस का कार्य कतई सही नहीं है।डॉ. गणेश पाठक ने संगोष्ठी में आए सभी आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट किया। इस मौके प्रो. गौरीशंकर द्विवेदी, डॉ. श्याम बिहारी श्रीवास्तव, अजय विक्रम सिंह, डॉ. शिवेश प्रसाद राय आदि मौजूद रहे।
बलिया। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली एवं अमरनाथ मिश्र पीजी कालेज दूबे छपरा के संयुक्त तत्वावधान में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गंगा बहुद्देशीय सभागार में रुस-यूक्रेन संघर्ष एवं वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका संगोष्ठी का समापन किया। संगोष्ठी के समापन समारोह को संबोधित करते राजस्थान के सिंहानिया विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि रुस, स्टालिन की विस्तार नीति को आगे बढ़ा रहा है। रुस किसी तरह किव पर कब्जा करना चाहता है। जबकि अमेरिका बिलकुल नहीं चाहता है कि रुस का विस्तार यूरोप में अधिक हो। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी इस बात के लिए जानी जा सकेगी कि एक ऐसा देश जिसके पास सिर्फ साहस एवं मनोबल युवक्त नागरिक थे। उसके रुस जैसे शक्तिशाली देश को संघर्ष में पछाड़ देने के लिए कमर कस लिया था। इस संघर्ष ने भ्रम तोड़ दिया कि अब जमीनी लड़ाई समाप्त हो गई है। जिस तरह से चीन ओबीओआर के माध्यम से पूरी दुनिया में अपना जाल बिछा रखा है। उसी तरह रुस इस संघर्ष के माध्यम से कारिडोर की तलाश में है। रुस के साथ सामरिक हित जुड़े है। राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह के अध्यक्षीय संबोधन में जिला जज जितेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि इस संघर्ष से अमेरिका को लाभ है। उसने अपने हित में सघर्ष को जारी रखना चाहता है। भारत का दीर्घकालिक हित इसी में है कि भारत रुस का नैतिक विरोध करें। उन्होंने कहा कि चीन, ताइवान पर हमले की फिराक में बैठा था। लेकिन इस संघर्ष से चीन को अपनी विस्तारवादी नीति पर रोक लगानी पड़ी। कहा कि रुस का कार्य कतई सही नहीं है।डॉ. गणेश पाठक ने संगोष्ठी में आए सभी आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट किया। इस मौके प्रो. गौरीशंकर द्विवेदी, डॉ. श्याम बिहारी श्रीवास्तव, अजय विक्रम सिंह, डॉ. शिवेश प्रसाद राय आदि मौजूद रहे।
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बलिया। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली एवं अमरनाथ मिश्र पीजी कालेज दूबे छपरा के संयुक्त तत्वावधान में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गंगा बहुद्देशीय सभागार में रुस-यूक्रेन संघर्ष एवं वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका संगोष्ठी का समापन किया। संगोष्ठी के समापन समारोह को संबोधित करते राजस्थान के सिंहानिया विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि रुस, स्टालिन की विस्तार नीति को आगे बढ़ा रहा है। रुस किसी तरह किव पर कब्जा करना चाहता है। जबकि अमेरिका बिलकुल नहीं चाहता है कि रुस का विस्तार यूरोप में अधिक हो। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी इस बात के लिए जानी जा सकेगी कि एक ऐसा देश जिसके पास सिर्फ साहस एवं मनोबल युवक्त नागरिक थे। उसके रुस जैसे शक्तिशाली देश को संघर्ष में पछाड़ देने के लिए कमर कस लिया था। इस संघर्ष ने भ्रम तोड़ दिया कि अब जमीनी लड़ाई समाप्त हो गई है। जिस तरह से चीन ओबीओआर के माध्यम से पूरी दुनिया में अपना जाल बिछा रखा है। उसी तरह रुस इस संघर्ष के माध्यम से कारिडोर की तलाश में है। रुस के साथ सामरिक हित जुड़े है। राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह के अध्यक्षीय संबोधन में जिला जज जितेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि इस संघर्ष से अमेरिका को लाभ है। उसने अपने हित में सघर्ष को जारी रखना चाहता है। भारत का दीर्घकालिक हित इसी में है कि भारत रुस का नैतिक विरोध करें। उन्होंने कहा कि चीन, ताइवान पर हमले की फिराक में बैठा था। लेकिन इस संघर्ष से चीन को अपनी विस्तारवादी नीति पर रोक लगानी पड़ी। कहा कि रुस का कार्य कतई सही नहीं है।डॉ. गणेश पाठक ने संगोष्ठी में आए सभी आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट किया। इस मौके प्रो. गौरीशंकर द्विवेदी, डॉ. श्याम बिहारी श्रीवास्तव, अजय विक्रम सिंह, डॉ. शिवेश प्रसाद राय आदि मौजूद रहे।
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