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कभी भी टूट सकता है रिंग बंधा
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Sun, 14 Aug 2016 11:56 PM IST
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तटवर्ती इलाके में बनाए गए ठोकर पर दबाव बनाती गंगा की लहरें।
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गंगा के जलस्तर में वृद्धि का क्रम अभी भी जारी है। उसकी उफनाती लहरें सीधे अब दूबे छपरा रिंग बंधे से टकरा रही है। जिसके चलते कई जगहों पर बंधा क्षतिग्रस्त हो गया है और यह कभी भी टूट सकता है। ऐसा हुआ तो आधे दर्जन गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर 58.16 मीटर दर्ज किया गया। साथ ही प्रति घंटा दो सेमी का बढ़ाव बना हुआ है। यही हाल रहा तो चंद ही दिनों में हाई फ्लड लेवल 60.25 को पार कर जाएगी। बता दें करीब एक महीने से गंगा की उफनाती लहरें चौबे छपरा, श्रीनगर में घरों को अपने पेटे में समाहित कर चुकी है।
शनिवार को गंगा की लहरें दूबे छपरा रिंग बंधे को हरिजन बस्ती के सामने आधा हिस्सा काटकर हड़कंप मचा दिया, जहां बाढ़ विभाग के अधिकारी बालू से भरी बोरियों को भरकर बंधे को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन बंधा कहीं न कहीं टूटकर गिरना शुरू हो गया है। जो कभी भी नदी की लहरों में समा सकता है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि चौबे छपरा में बाढ़ विभाग फ्लड फाइटिंग के नाम पर जो कंक्रीट की बोरियां डाल रहे हैं। उसका कहीं अता-पता नहीं चल रहा है। लोगों का आरोप है कि बाढ़ विभाग को धन का बंदरबांट करना है, न कि गांव को बचाना है। उनका कहना है कि वही अधिकारी काम करा रहे हैं। जिनको तत्कालीन जिलाधिकारी डा. मुत्थु कुमार स्वामी जी ने वर्ष 2003 में आई बाढ़ के समय अनियमितता के आरोप निलंबित कर मुकदमा दर्ज कराया था।
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केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर 58.16 मीटर दर्ज किया गया। साथ ही प्रति घंटा दो सेमी का बढ़ाव बना हुआ है। यही हाल रहा तो चंद ही दिनों में हाई फ्लड लेवल 60.25 को पार कर जाएगी। बता दें करीब एक महीने से गंगा की उफनाती लहरें चौबे छपरा, श्रीनगर में घरों को अपने पेटे में समाहित कर चुकी है।
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शनिवार को गंगा की लहरें दूबे छपरा रिंग बंधे को हरिजन बस्ती के सामने आधा हिस्सा काटकर हड़कंप मचा दिया, जहां बाढ़ विभाग के अधिकारी बालू से भरी बोरियों को भरकर बंधे को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन बंधा कहीं न कहीं टूटकर गिरना शुरू हो गया है। जो कभी भी नदी की लहरों में समा सकता है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि चौबे छपरा में बाढ़ विभाग फ्लड फाइटिंग के नाम पर जो कंक्रीट की बोरियां डाल रहे हैं। उसका कहीं अता-पता नहीं चल रहा है। लोगों का आरोप है कि बाढ़ विभाग को धन का बंदरबांट करना है, न कि गांव को बचाना है। उनका कहना है कि वही अधिकारी काम करा रहे हैं। जिनको तत्कालीन जिलाधिकारी डा. मुत्थु कुमार स्वामी जी ने वर्ष 2003 में आई बाढ़ के समय अनियमितता के आरोप निलंबित कर मुकदमा दर्ज कराया था।