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याद किए गए महात्मा गांधी
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Fri, 30 Jan 2015 10:37 PM IST
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर जिलेभर में कार्यक्रम आयोजित किए गए। वरिष्ठ नागरिक सेवा समिति के शिविर कार्यालय पर सभा को संबोधित करते हुए समाजवादी नेता विश्वनाथ चौधरी तार बाबू ने कहा कि गांधी जी का राजनीतिक जीवन दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुआ था। जहां का शासक भी भारतीय शासक ही था, यानी दोनों जगह अंग्रेजी शासन था। जहां मूल निवासियों का कोई विशेष अधिकार नहीं था।
वहां से लौटने के बाद भारतवासियों की दुर्दशा देखकर बहुत द्रवित हुए। गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद एक वक्त भोजन करना और धोती पहनना शुरू कर दिया। भयभीत भारतीयों में साहस का इतना संचार किया कि पुलिस से देश की जनता निर्भय हो गई और इसी का परिणाम रहा कि अंग्रेजों को देश छोड़कर भागना पड़ा। विष्णुकांत चौधरी ने कहा कि महात्मा गांधी ने महिला एवं दलित उत्थान के साथ ही समाज के हर पहलू पर अपने चिंतन में विकास की अवधारणा की चर्चा की। राजेंद्र पांडेय ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आज देश की रगरग में जिंदा है। अमावस यादव, बब्बन सिंह, सुशील यादव, हेमंत सिंह, अमर देव, जयराम ठाकुर, सूरज शमदर्शी, अब्दुल कैश तारविद आदि ने भी विचार व्यक्त किया।
रतसर संवाददाता के अनुसार: सत्य अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए गांधी जी ने कुष्ट रोगियों की सेवा और कर्तव्य परायणता का पाठ पूरी दुनिया को पढ़ाया। यह बात प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रतसर में आयोजित विकलांग मरीजों को चप्पल एवं अन्य सामग्री वितरण के मौके पर चिकित्साधिकारी डा. सुरेंद्र गुप्ता ने कही। कार्यक्रम की शुरूआत महात्मा गांधी के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। शशि कुमार ने गांधी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। सच्चिदानंद त्रिपाठी, धनेश पांडेय, शिवजी यादव, आरपी शर्मा, संजय सिंह, केसी गोस्वामीआदि मौजूद रहे। अध्यक्षता डा. सुरेंद्र गुप्त और संचालन धनेश पांडेय ने किया।
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बांसडीह संवाददाता के मुताबिक कसबा स्थित नई बाजार में स्थित स्थापित गांधी की प्रतिमा स्थल पर शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं सहित ग्रामीणों ने माला-पुष्प चढ़ाकर शहादत दिवस मनाया। प्रतुल कुमार ओझा, अवनीश पांडेय, शमसुल हक अंसारी, दिलीप कुमार आदि मौजूद रहे।
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वहां से लौटने के बाद भारतवासियों की दुर्दशा देखकर बहुत द्रवित हुए। गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद एक वक्त भोजन करना और धोती पहनना शुरू कर दिया। भयभीत भारतीयों में साहस का इतना संचार किया कि पुलिस से देश की जनता निर्भय हो गई और इसी का परिणाम रहा कि अंग्रेजों को देश छोड़कर भागना पड़ा। विष्णुकांत चौधरी ने कहा कि महात्मा गांधी ने महिला एवं दलित उत्थान के साथ ही समाज के हर पहलू पर अपने चिंतन में विकास की अवधारणा की चर्चा की। राजेंद्र पांडेय ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आज देश की रगरग में जिंदा है। अमावस यादव, बब्बन सिंह, सुशील यादव, हेमंत सिंह, अमर देव, जयराम ठाकुर, सूरज शमदर्शी, अब्दुल कैश तारविद आदि ने भी विचार व्यक्त किया।
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रतसर संवाददाता के अनुसार: सत्य अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए गांधी जी ने कुष्ट रोगियों की सेवा और कर्तव्य परायणता का पाठ पूरी दुनिया को पढ़ाया। यह बात प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रतसर में आयोजित विकलांग मरीजों को चप्पल एवं अन्य सामग्री वितरण के मौके पर चिकित्साधिकारी डा. सुरेंद्र गुप्ता ने कही। कार्यक्रम की शुरूआत महात्मा गांधी के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। शशि कुमार ने गांधी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। सच्चिदानंद त्रिपाठी, धनेश पांडेय, शिवजी यादव, आरपी शर्मा, संजय सिंह, केसी गोस्वामीआदि मौजूद रहे। अध्यक्षता डा. सुरेंद्र गुप्त और संचालन धनेश पांडेय ने किया।
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बांसडीह संवाददाता के मुताबिक कसबा स्थित नई बाजार में स्थित स्थापित गांधी की प्रतिमा स्थल पर शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं सहित ग्रामीणों ने माला-पुष्प चढ़ाकर शहादत दिवस मनाया। प्रतुल कुमार ओझा, अवनीश पांडेय, शमसुल हक अंसारी, दिलीप कुमार आदि मौजूद रहे।