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पुरवईया हवा के झोंके व बारिश से एक पखवारे में 30 एकड़ भूमि सरयू में विलीन

Tue, 28 Jul 2020 06:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2020 06:33 PM IST
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Purviya merged with 30 acres of land in Saryu in a fortnight due to wind and rain
जयप्रकाशनगर। पुरवा हवा के झोके और लगातार भारी बारिश से चांददीयर पंचायत से इब्राहिमाबाद नौबरार पंचायत की सीमा तक सरयू नदी की कटान से लोग परेशान हैं। पंद्रह दिनों के अंदर छह किलोमीटर कि दूरी में विभिन्न गांवों के किसानों की करीब 30 एकड़ कृषि योग्य भूमि सरयू में समा चुकी है।
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बकुल्हा संसार टोला बांध को कटान से बचाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं लेकिन कटान से स्थायी निजात नहीं मिली। विकास खंड मुरली छपरा क्षेत्र के इब्राहिमाबाद नौबरार पंचायत से लगायत चांददियर पंचायत में बीते दो सप्ताह से पुरवईया हवा व लगातार हो रही तेज बारिश जयप्रभा सेतु से लगायत इब्राहिमाबाद नौबरार पंचायत स्थित सठिया ढाला के समीप बने टी स्पर से कुछ ही दूरी पर करीब छह किलोमीटर की दूरी में सरयू कृषि योग्य भूमि को लगातार काट रही है। बीते एक पखवारा में करीब 30 एकड़ भूमि को सरयू अपने पेटे में ले चुकी है। इसको देख किसान काफी भयभीत हैं। वर्ष 2010- 11 से सरयू नदी द्वारा कटान शुरू हुआ जो लगातार एक दशक तक चलता रहा। इससे विभिन्न ग्राम पंचायतों के करीब 95 फीसदी किसान भूमिहीन हो चुके हैँ और केवल कागजों पर ही इनके खेत हैं।
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बकुलहा संसार टोला बांध पर मंडरा रहा खतरा
जयप्रकाशनगर। क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिये वर्ष 1983 में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के प्रयास से करीब दस किलोमीटर की दूरी वाला बकुलहा संसार टोला बांध का निर्माण हुआ था। अब सरयू नदी इस बांध को भी अपने आगोश में लेने के लिए आतुर है। अगर सरयू ने इस बांध को निशाना बनाया तो गई गांवों में तबाही मच सकती है।
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करोड़ों खर्च के बावजूद नाममात्र की ही मिली राहत
जयप्रकाशनगर। इब्राहिमाबाद नौबरार अठगांवा पंचायत व बकुल्हा संसार टोला बांध को बचाने के नाम पर अब तक करोड़ों रुपए खर्च हुए, लेकिन क्षेत्र वासियों को मात्र राहत ही मिली। अभी भी क्षेत्रवासी सरयू नदी की तबाही से मुक्त नहीं हो सके है। क्षेत्र के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि वीरेन्द्र यादव, बच्चा जी यादव, ग्राम प्रधान रूबी सिंह, सूर्यभान सिंह, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दशरथ यादव, सेवानिवृत्त प्रोफेसर सुभाष सिंह, अशोक कुमार सिंह, पूर्व प्रधान विनोद सिंह आदि ने कहा कि यह करोड़ो रुपये खर्च क्या मायने रखता है। यहां जब तक जयप्रभा सेतु से लेकर नवनिर्मित टी स्पर तक प्रोजेक्ट बनाकर कटाव रोधी कार्य नहीं करवाया जाएगा तब तक बंधे के भीतर भी निवास करने वाले लोग सुरक्षित नही होंगे। सरकार इसी तरह करोड़ों खर्च करती रहेगी और पानी में बहता रहेगा।
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दो दिनों में 30 बीघे खेत सरयू की धारा में समाहित
बैरिया। तहसील क्षेत्र के उत्तरी किनारे पर बहने वाली सरयू नदी पिछले 48 घंटे से घटाव पर है लेकिन उतरती लहरों का कहर उत्तरी दियरांचल की उपजाऊ खेती पर टूट रहा है। पिछले तीन दिनों के अंदर गोपालनगर ग्राम पंचायत के किसानों के मक्का, परवल और शकरकंद के 30 बीघा से अधिक जमीन सरयू नदी की कटान में समा चुके हैं। किसानों का कहना है कि अब तो कागज में ही हमारे खेत बचे हैं। मौके पर के खेत तो सरजू नदी अपने में समेट ली हैं।

सरजू नदी का कटान इस साल उस पार बिहार के सारण जिले के फुलवरिया, डुमाईगढ़, मटियार गांवों के खेतों के बजास उत्तर प्रदेश की सीमा में पड़ने वाले गोपालनगर के दियारे में हो रहा है। गोपालनगर के हीरालाल यादव, परमात्मा यादव, काशी यादव, अनिल सिंह, सतीश सिंह, बबन सिंह, सवालिया सिंह, मुन्ना सिंह, कमल देव मिश्र आदि किसानों के मक्का, परवल तथा शकरकंद के खेत कट चुके हैं। यह किसान अब भूमिहीन होते जा रहे हैं। उधर, सिंचाई विभाग के रेगुलेटर चांदपुर स्थित गेज पर मंगलवार सुबह 8 बजे सरयू नदी 58.16 मी. पर बह रही हैं, नदी का जलस्तर घटाव पर है। पूर्व में नदी का जलस्तर 58.29 मी. तक पहुंच गया था।
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