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पूर्वजों की कब्रों पर पढ़ा फातिया
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Mon, 23 May 2016 09:36 PM IST
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बरकत और रहमत की रात शब-ए-बरात पर रविवार को मोमिनों ने अपने पूर्वजों की कब्रों पर फातिया पढ़ा अकीदत पेश किया। इस मौके पर कब्रगाहों और मस्जिदों को झालरों से सजाया गया था। जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानो जन्नत कब्रगाहों पर उतर आई हो।
रविवार की देरशाम मुस्लिम भाइयों द्वारा कब्रिस्तानों पर पहुंचकर फतीहा पढ़ने के साथ ही चिराग जलाया। शहर के बहेरीर उमरगंज, राजपूत नेउरी, अमडरिया, मिड्ढा आदि कब्रिस्तानों पर मुसलमानों का देररात तक पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। मुसलमानों का यह पर्व बहुत ही बरकत का दिन होता है।
दरगाहों पर सब-ए-बारात की अहमियत और बरकत पर तकरीर की गई। वहीं मुस्लिम बंधुओं द्वारा रात को जगकर मस्जिदों व घरों में इबादत कर अपने गुनाहों की माफी मांगी। सोमवार को लोग नफील रोजा भी रखा।
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रविवार की देरशाम मुस्लिम भाइयों द्वारा कब्रिस्तानों पर पहुंचकर फतीहा पढ़ने के साथ ही चिराग जलाया। शहर के बहेरीर उमरगंज, राजपूत नेउरी, अमडरिया, मिड्ढा आदि कब्रिस्तानों पर मुसलमानों का देररात तक पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। मुसलमानों का यह पर्व बहुत ही बरकत का दिन होता है।
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दरगाहों पर सब-ए-बारात की अहमियत और बरकत पर तकरीर की गई। वहीं मुस्लिम बंधुओं द्वारा रात को जगकर मस्जिदों व घरों में इबादत कर अपने गुनाहों की माफी मांगी। सोमवार को लोग नफील रोजा भी रखा।
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