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रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Wed, 23 Nov 2016 08:15 PM IST
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चंद्रशेखर नगर के महादेव मंदिर प्रांगण में रुक्मिणी के छप्पन भोग की सजाई गई झांकी।
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शहर के चंद्रशेखर नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रवचन के छठवें दिन कथा व्यास कन्हैया लाल पालीवाल प्रेमी जी ने श्रीकृष्ण- रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि अच्छे भाग्य के लिए सद्कार्य बहुत जरूरी है। मनुष्य को अपने सांसारिक जीवन में भौतिक सुखों के साथ-साथ हाथ से अच्छे कार्य एवं मुख से भगवान के नाम का जप करना चाहिए।
वहीं प्रभुप्रेमी जी ने कहा कि अपने घर में तुलसी का पूजा, भगवान का नित्य कीर्तन एवं बड़ों को सम्मान देने के तीन सूत्र जीवन में उतारने चाहिए। वहीं श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह का सप्रसंग व्याख्या कर उन्होंने सभी श्रोताओं का मनमोह लिया। उन्होंने गोवर्धन धारण प्रसंग में कहा कि गोवर्धन धारण लीला के माध्यम से भगवान ने पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा दी है।
रास पंचाध्यायी, महारास लीला प्रसंग, गोपी-उद्धव संवाद, कंस बध प्रसंगों को अपनी शैली में सुनाकर लोगों को भावविभोर कर दिया। श्रीकृष्ण-रूक्मणी विवाह देखने के लिए विशाल संख्या में महिलाओं-पुरुषों ने नृत्य करने पर विवश हो गए। इस अवसर पर रुक्मिणी विवाह की सुंदर झांकी के साथ छप्पन भोग की झांकी से पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया। कथा में मुख्य रुप से रामयश प्रसाद गुप्ता, नंदलाल, कन्हैया लाल, तीर्थराज, काशीनाथ, ललित, संजय, विशाल, मनीष, अतुल, शुभम आदि का सहयोग सराहनीय रहा।
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वहीं प्रभुप्रेमी जी ने कहा कि अपने घर में तुलसी का पूजा, भगवान का नित्य कीर्तन एवं बड़ों को सम्मान देने के तीन सूत्र जीवन में उतारने चाहिए। वहीं श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह का सप्रसंग व्याख्या कर उन्होंने सभी श्रोताओं का मनमोह लिया। उन्होंने गोवर्धन धारण प्रसंग में कहा कि गोवर्धन धारण लीला के माध्यम से भगवान ने पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा दी है।
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रास पंचाध्यायी, महारास लीला प्रसंग, गोपी-उद्धव संवाद, कंस बध प्रसंगों को अपनी शैली में सुनाकर लोगों को भावविभोर कर दिया। श्रीकृष्ण-रूक्मणी विवाह देखने के लिए विशाल संख्या में महिलाओं-पुरुषों ने नृत्य करने पर विवश हो गए। इस अवसर पर रुक्मिणी विवाह की सुंदर झांकी के साथ छप्पन भोग की झांकी से पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया। कथा में मुख्य रुप से रामयश प्रसाद गुप्ता, नंदलाल, कन्हैया लाल, तीर्थराज, काशीनाथ, ललित, संजय, विशाल, मनीष, अतुल, शुभम आदि का सहयोग सराहनीय रहा।
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