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Ballia News: बाढ़ इलाकों में 11 दिन से 75 गांवों कटी बिजली, पानी के बीच अंधेरे में 63 हजार आबादी

Thu, 10 Sep 2026 12:54 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:54 AM IST
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Power supply cut off to 75 villages in flood-affected areas for 11 days; a population of 63,000 left in the dark amidst the waters.
चक्की नौरंगा गांव में बिजली सप्लाई बंद कर देने से पसरा अंधेरा। जागरुक पाठक
संवाद न्यूज एजेंसी बलिया/मझौवां। जिले में गंगा व सरयू नदी के बाढ़ वाले इलाकों के 75 गांव पिछले 11 दिन से अंधेरे में हैं। करीब 63 हजार लोग पानी के बीच बिना बिजली के रहने को मजबूर हैं। बाढ़ पीड़ितों के सामने कई तरह की दिक्कत खड़ी हो गई है। गंगा और सरयू की बाढ़ से तहसील सदर, बैरिया, बांसडीह, मनियर और रेवती क्षेत्र के गांव टापू बन गए हैं। बिजली विभाग ने सुरक्षा का हवाला देकर सप्लाई बंद कर दी। विभाग का कहना है कि पानी में करंट फैलेगा लेकिन पानी अब कई जगहों से उतर गया है, फिर भी लाइन नहीं जोड़ी गई। बाढ़ के पानी के बीच रात में सांप-बिच्छू का डर, टॉर्च और ढिबरी के सहारे रात कट रही है। मोबाइल चार्ज नहीं, संपर्क टूटा - नाव से 5 किमी जाकर चार्ज कराना पड़ रहा है। पीने के पानी की मोटर बंद, हैंडपंप का गंदा पानी पीने को मजबूर है। इधर, गंगा नदी का पानी चार दिनों से ऊपरी दबाव के वजह से उतार-चढ़ाव हो रहा है। प्रशासन की ओर से रोशनी, नाव, राहत किट, पशु चारा आदि की व्यवस्था का दावा तो किया जा रहा है लेकिन सुविधाएं बेपटरी होती दिख रहीं। जगदेवा, चिंतामणि राय के टोला, पांडेयपुर, प्रसाद छपरा, डागरबाद, शुक्ल छपरा, प्रबोधपुर, गरया, रुद्रपुर के आसपास बसे लोग अपने मकानों की छत पर जीवन यापन कर रहे हैं। कई परिवारों का भोजन भी नहीं बन पा रहा। चक्की नौरंगा, भुआल छपरा, नौरंगा, उपाध्याय टोला में कोई भी सुविधा मुहैया नहीं कराई जा रही है, जिससे वहां के बाढ़ पीड़ितों में आक्रोश व्याप्त है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट गेज के अनुसार बुधवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 59.320 मीटर दर्ज किया गया। इसके अलावा एक सेमी प्रति घंटे की दर से जलस्तर में घटाव का क्रम जारी है। नदी का पानी लाल निशान 57.615 मीटर से 1.705 मीटर ऊपर हिलकोरें मार रहा है। जबकि मध्यम बाढ़ स्तर 58.615 मीटर है। एक्सईएन मूलचंद्र शर्मा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों से पानी निकलने की रिपोर्ट बाढ़ विभाग की तरफ से दी जाती है। उसके बाद ही सप्लाई दी जा सकती है।
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यदुनाथ मिश्र ने बताया कि कई दिनों से घर में पानी भरा है और बिजली भी नहीं है। रात होते ही चारों तरफ अंधेरा छा जाता है। बच्चों और बुजुर्गों को पानी के बीच रहना पड़ रहा है। सांप-बिच्छू और जहरीले जीवों का डर बना रहता है। मोबाइल डिस्चार्ज हो चुका है, नाते रिश्तेदारों से संपर्क टूट चुका है।
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पाण्डेयपुर के दिग्विजय मिश्र ने बताया कि बाढ़ का पानी घर में घुस गया है, नल डूब चुके हैं। जो पानी मिल रहा है, वह इतना गंदा है कि पीने की हिम्मत नहीं होती। मजबूरी में इसी पानी को छानकर इस्तेमाल करना पड़ रहा है। खाना बनाने और बच्चों को पिलाने तक के लिए साफ पानी नहीं मिल रहा। बीमारी फैलने का डर अलग सता रहा है।
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