{"_id":"5723a39d4f1c1b7014a9196e","slug":"pm-in-ballia","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक ही दर्द बा...‘मिल के बात केहू ना करे ला’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक ही दर्द बा...‘मिल के बात केहू ना करे ला’
ब्यूरो/ अमर उजाला, बलिया
Updated Fri, 29 Apr 2016 11:40 PM IST
विज्ञापन
सिविल सेवा पुरस्कार समारोह को संबोधित करते प्रधानमंत्री
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रसड़ा क्षेत्र के माधवपुर गांव स्थित दी किसान चीनी मिल तथा नागपुर की कताई मिल इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। 1983 में कताई मिल तथा 1974 में चीनी मिल की नींव रखी गई थी, जिससे हजारों कर्मचारी अपने परिवार का भरण पोषण करते थे।
लेकिन सरकारी उपेक्षा और लचर प्रबंधन से सन 2000 में कताई मिल तो 2013 में रसड़ा चीनी मिल बंद हो गई। लोगों ने सड़क से लेकर सदन तक हर जगह आवाज उठाई लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। दोनों मिलों के बंद होने से न केवल उनमें काम करने वाले दो हजार से अधिक कर्मचारी बेकार हो गए, वरन इस झटके से बलिया का औद्योगिक विकास पटरी से जो उतरा तो फिर कभी आगे नहीं बढ़ पाया।
क्या मिलों के कर्मचारी और क्या आम जन यह टीस सबकी जुबां पर आ ही जाती है कि सबके वोटे के चिंता रहे ला बाकी मिल के बात के हू न करे ला। प्रधानमंत्री जी पहल करीं त बलिया के विकास पटरी पर आ सके ला..।
विज्ञापन
विज्ञापन
लेकिन सरकारी उपेक्षा और लचर प्रबंधन से सन 2000 में कताई मिल तो 2013 में रसड़ा चीनी मिल बंद हो गई। लोगों ने सड़क से लेकर सदन तक हर जगह आवाज उठाई लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। दोनों मिलों के बंद होने से न केवल उनमें काम करने वाले दो हजार से अधिक कर्मचारी बेकार हो गए, वरन इस झटके से बलिया का औद्योगिक विकास पटरी से जो उतरा तो फिर कभी आगे नहीं बढ़ पाया।
विज्ञापन
क्या मिलों के कर्मचारी और क्या आम जन यह टीस सबकी जुबां पर आ ही जाती है कि सबके वोटे के चिंता रहे ला बाकी मिल के बात के हू न करे ला। प्रधानमंत्री जी पहल करीं त बलिया के विकास पटरी पर आ सके ला..।
विज्ञापन