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सात वर्षोँ में छह फीसदी से अधिक क्षेत्रफल पर हुआ पौधरोपण
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बलिया। जिले का कुल क्षेत्रफल 2981 वर्ग किलोमीटर यानि 298100 हेक्टेयर है। जिले में घोषित वन क्षेत्र कोई नहीं है। वन विभाग की ओर से रेलवे पटरी, सड़कों, नहरें आदि के किनारे खाली पड़ी जमीनों पर पौधरोपण कराने का काम जरूर करती है। इसके अलावा हर वर्ष विभिन्न विभागों की ओर से भी लाखों में पौधरोपण कराया जाता है। लेकिन यह कार्यक्रम भी कागजों तक ही सिमट कर रह जाता है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीते सात वर्षों में 19980 हेक्टेयर में 1.31 करोड़ पौधे लगाए गए लेकिन अधिकांश पौधों ने दम तोड़ दिया। जबकि इस कार्य पर करोड़ों की धनराशि खर्च की गई।
जिले में वन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग अभियान के तहत हर वर्ष लाखों पौधे लगाने का लगाने का दावा किया जाता है लेकिन धरातल पर कम कागजों पर ज्यादा पौधे लगाए जाते हैं। पिछले कई वर्षों से पौधरोपण का कार्य वन विभाग की ओर से किया जाता है। लेकिन वर्ष 2015-16 में ग्रीन बलिया क्लीन बलिया के तहत बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया। इसमें वन विभाग के अलावा जनपद के अन्य 17 विभाग भी रहे। इसके बाद से हर वर्ष पौधरोपण के लिए लक्ष्य में बढ़ोतरी किया जाता रहा। इसमें वन विभाग से अधिक अन्य 17 विभागों को पौधरोपण की जिम्मेदारी दी गई। इन सात वर्षों में 19980 हेक्टेयर में कुल एक करोड़ 31 लाख 94712 पौधे रोपे गए। पौधरोपण कार्य सड़क, नहर, रेल, ग्राम समाज, सामृदायिक भूमि, शिक्षण संस्थानों एवं अन्य राजकीय भूमि, कृषि भूमि पर किया गया है। लेकिन आज यह पौधे खोजने पर भी नहीं मिलेंगे। बताया जाता है कि पौधरोपण के दौरान या तो कमजोर पौधे लगाकर कोरम कर दिया जाता है या फिर केवल कागजों में ही पौधरोपण कर कोरम कर दिया जाता है। इसके अलावा जहां पौधरोपण किया जाता है कि वहां इन्हें बचाने का कोई इंतजाम नहीं किया जाता है, लिहाजा वन क्षेत्र को बढ़ावा देने की योजना धरातल पर नहीं उतर पा रहा।
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जिले में वन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग अभियान के तहत हर वर्ष लाखों पौधे लगाने का लगाने का दावा किया जाता है लेकिन धरातल पर कम कागजों पर ज्यादा पौधे लगाए जाते हैं। पिछले कई वर्षों से पौधरोपण का कार्य वन विभाग की ओर से किया जाता है। लेकिन वर्ष 2015-16 में ग्रीन बलिया क्लीन बलिया के तहत बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया। इसमें वन विभाग के अलावा जनपद के अन्य 17 विभाग भी रहे। इसके बाद से हर वर्ष पौधरोपण के लिए लक्ष्य में बढ़ोतरी किया जाता रहा। इसमें वन विभाग से अधिक अन्य 17 विभागों को पौधरोपण की जिम्मेदारी दी गई। इन सात वर्षों में 19980 हेक्टेयर में कुल एक करोड़ 31 लाख 94712 पौधे रोपे गए। पौधरोपण कार्य सड़क, नहर, रेल, ग्राम समाज, सामृदायिक भूमि, शिक्षण संस्थानों एवं अन्य राजकीय भूमि, कृषि भूमि पर किया गया है। लेकिन आज यह पौधे खोजने पर भी नहीं मिलेंगे। बताया जाता है कि पौधरोपण के दौरान या तो कमजोर पौधे लगाकर कोरम कर दिया जाता है या फिर केवल कागजों में ही पौधरोपण कर कोरम कर दिया जाता है। इसके अलावा जहां पौधरोपण किया जाता है कि वहां इन्हें बचाने का कोई इंतजाम नहीं किया जाता है, लिहाजा वन क्षेत्र को बढ़ावा देने की योजना धरातल पर नहीं उतर पा रहा।
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