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Ballia News: ...ददरी मेले में बैलगाड़ी से आते थे लोग

Fri, 17 Nov 2023 10:25 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 17 Nov 2023 10:25 PM IST
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...people used to come to Dadri fair by bullock cart
भृगु मुनि की पावन तपोस्थली पर उनके शिष्य दर्दर मुनि के नाम पर प्रति वर्ष लगने वाला ऐतिहासिक ददरी मेला प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध है। ददरी मेले का आयोजन कार्तिक पूर्णिमा स्नान के बाद से ही शुरु हो जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन से आरंभ होने वाला ददरी मेले का जलवा उस समय कुछ ज्यादा ही था, जब आवागमन के साधनों की कमी थी। सड़कें कम थी। उस समय लोग पैदल या बैलगाड़ी से अपने घरवालों के साथ गठरी-मोटरी में आटा व सत्तू आदि सामानों के साथ अक्षय नवमी के दिन ही घर से चल देते थे। उस समय जनपद के दूर दराज इलाकों से आने वाली बैलगाड़ियों व लोगों का काफिला मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता था। स्नान करने वालों का हुजूम भी एक लघु मेले का रुप धारण कर लेता था। बड़े बुजुर्गों के संस्मरण आज भी लोगों के जेहन में रोमांच भर देता है। महिलाएं पैदल ही ''करबो जरूर हो भृगु मुनि दर्शन'' आदि लोकगीतों को गाती हुई स्नान के लिए जाती थी। उस समय जनपद के चारों तरफ से बैलगाड़ियों का काफिला शहर से दूर हनुमानगंज, फेफना, शंकरपुर आदि चट्टियों पर रुकता था। स्नान करने वालों का यह हुजूम कई दिन तक रुकता था। उस समय मेले में जनपद के प्रत्येक क्षेत्र के मशहूर हस्तशिल्प सहित अन्य दुकानें भी लगती थी, जिसे लोग काफी पसंद करते थे।
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