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Ballia News: फायदे का सौदा साबित हो रही परवल की खेती
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बैरिया। परवल बोने वाले किसान अपनी खेती की बदौलत परिवार की गाड़ी खींच रहे हैं बल्कि बेरोजगारी को भी अलविदा कह चुके हैं। कटान में काफी जमीनें जाने के बाद भी किसान थोड़े में ही बहुत कुछ करने की क्षमता रखते हैं।
गंगा का तटवर्ती इलाका परवल की मंडी बन चुकी है। नौरंगा, शिवपुर, पांडेयपुर, मझौवा, हल्दी, गायघाट, बेलहरी, धर्मपुरा सहित दर्जनों गांवों के किसान बड़े पैमाने पर परवल की खेती करते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों क्विंटल बिक्री के लिए बाहर जाता है। परवल की खेती में लगे किसानों ने बताया कि अब पहले के मुताबिक परवल की खेती में लागत भी कम नहीं है।
एक दशक पहले प्रति बीघा लागत 10 से 15 हजार तक आती थी। अब लगान और मजदूरी बढ़ जाने से वही लागत 30 से 35 हजार रुपये प्रति बीघा पहुंच जा रही है। परवल की किस्मों में यहां की मिट्टी पर तुमरिया, शंखा, छाप ज्यादा उत्पादन देता है।
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इस समय में इसी तरह की खेती का जमाना है। यही कारण है कि पढ़े-लिखे युवा भी इस खेती में लग गए। अब वह खुद अपनी तकदीर अपने हाथों संवारने का काम कर रहे हैं। प्रति बीघा मुनाफा के बाबत बताया कि यदि मौसम और बाजार ठीक रहा तो प्रति बीघा मुनाफा भी 40 से 80 हजार तक हो जाता है। परवल की यह खेती शुद्धता का भी प्रतीक है। परवल के खेतों में किसान एक संत का जीवन व्यतीत करते हैं। उनका मानना है कि सरकार यदि किसानों को संसाधन मुहैया कराए तो इसी परवल की खेती में सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिल सकता है।
बढ़ रहा क्रेज, भंडारण की हो व्यवस्था
बैरिया। इस क्षेत्र के किसानों के परवल बिक्री का मुख्य केंद्र रानीगंज मंडी व सुरेमनपुर का बाजार है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यदि विपणन भंडारण की व्यवस्था हो जाए तो परवल किसानों को दूना मुनाफा हो सकता है। अन्यथा परवल सस्ते दामों में भी परवल बेचने पड़ जाते हैं। चूंकि परवल कच्चा सौदा होता है, शाम तक उसकी बिक्री नहीं हुई तो किसानों को क्षति का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए यदि यहां भंडारण की व्यवस्था हो जाए तो वही परवल अगले दिन अच्छा मुनाफा दे सकता है। अब परवल की मिठाइयां भी बन रही हैं। इससे परवल का क्रेज और बढ़ गया हैं।
विदेश जाएगा परवल
बैरिया। परवल उत्पादक किसानों को लाभदायक मूल्य और अच्छा बाजार उपलब्ध कराने का भरोसा सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने दिया है। जल्द ही इस क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग इकाई की स्थापना की जाएगी। यहां से उचित व्यवस्था के साथ किसानों की सब्जियां सीधे विदेश जाएंगी। नदी मार्ग से भी किसानों का उत्पादन देश के दूसरे भागों में भेजे जाने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने को प्रतिबद्ध है और इसके लिए सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं।
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गंगा का तटवर्ती इलाका परवल की मंडी बन चुकी है। नौरंगा, शिवपुर, पांडेयपुर, मझौवा, हल्दी, गायघाट, बेलहरी, धर्मपुरा सहित दर्जनों गांवों के किसान बड़े पैमाने पर परवल की खेती करते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों क्विंटल बिक्री के लिए बाहर जाता है। परवल की खेती में लगे किसानों ने बताया कि अब पहले के मुताबिक परवल की खेती में लागत भी कम नहीं है।
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एक दशक पहले प्रति बीघा लागत 10 से 15 हजार तक आती थी। अब लगान और मजदूरी बढ़ जाने से वही लागत 30 से 35 हजार रुपये प्रति बीघा पहुंच जा रही है। परवल की किस्मों में यहां की मिट्टी पर तुमरिया, शंखा, छाप ज्यादा उत्पादन देता है।
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इस समय में इसी तरह की खेती का जमाना है। यही कारण है कि पढ़े-लिखे युवा भी इस खेती में लग गए। अब वह खुद अपनी तकदीर अपने हाथों संवारने का काम कर रहे हैं। प्रति बीघा मुनाफा के बाबत बताया कि यदि मौसम और बाजार ठीक रहा तो प्रति बीघा मुनाफा भी 40 से 80 हजार तक हो जाता है। परवल की यह खेती शुद्धता का भी प्रतीक है। परवल के खेतों में किसान एक संत का जीवन व्यतीत करते हैं। उनका मानना है कि सरकार यदि किसानों को संसाधन मुहैया कराए तो इसी परवल की खेती में सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिल सकता है।
बढ़ रहा क्रेज, भंडारण की हो व्यवस्था
बैरिया। इस क्षेत्र के किसानों के परवल बिक्री का मुख्य केंद्र रानीगंज मंडी व सुरेमनपुर का बाजार है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यदि विपणन भंडारण की व्यवस्था हो जाए तो परवल किसानों को दूना मुनाफा हो सकता है। अन्यथा परवल सस्ते दामों में भी परवल बेचने पड़ जाते हैं। चूंकि परवल कच्चा सौदा होता है, शाम तक उसकी बिक्री नहीं हुई तो किसानों को क्षति का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए यदि यहां भंडारण की व्यवस्था हो जाए तो वही परवल अगले दिन अच्छा मुनाफा दे सकता है। अब परवल की मिठाइयां भी बन रही हैं। इससे परवल का क्रेज और बढ़ गया हैं।
विदेश जाएगा परवल
बैरिया। परवल उत्पादक किसानों को लाभदायक मूल्य और अच्छा बाजार उपलब्ध कराने का भरोसा सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने दिया है। जल्द ही इस क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग इकाई की स्थापना की जाएगी। यहां से उचित व्यवस्था के साथ किसानों की सब्जियां सीधे विदेश जाएंगी। नदी मार्ग से भी किसानों का उत्पादन देश के दूसरे भागों में भेजे जाने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने को प्रतिबद्ध है और इसके लिए सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं।