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Ballia News: दर्दनाक; पापा, मुझे भी साथ ले चलो, बेटा शव से लिपटकर रोता रहा, सड़क हादसे में मिस्त्री की मौत

Sat, 17 May 2025 10:27 AM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया Published by: नितीश कुमार पांडेय Updated Sat, 17 May 2025 10:27 AM IST
सार

सड़क हादसे में मिस्त्री बुरी तरह घायल हो गया। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंचा बेटा शव को देखकर रोने लगा और कहने लगा पापा मुझे भी साथ ले चलो। ये देख सबकी आंखे भर आई। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।  

 

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Papa take me along too son kept crying while hugging the dead body
दुर्घटना में मौत के बाद बेटा रोता हुआ - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

शुक्रवार की रात सिकंदरपुर कस्बे में एक दर्दनाक हादसे में वाहन मिस्त्री दिलीप राम (45) की मौत हो गई। वह भांटी गांव के उचवार टोले के निवासी थे। 108 एम्बुलेंस से कुछ लोगों ने उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर पहुंचाया, जहां तैनात चिकित्सक डॉ. अभिषेक राय ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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दिलीप राम के बेटे आदित्य कुमार ने बताया कि उनके पिता गाड़ी बनाने का काम करते थे और शुक्रवार को सिकंदरपुर काम से आए थे। शाम को सूचना मिली कि उनका एक्सीडेंट हो गया है। जब तक परिवार अस्पताल पहुंचता, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
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घटना के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसे को किसी ने होते नहीं देखा। रास्ते से गुजर रहे कुछ युवकों ने उन्हें सड़क पर घायल अवस्था में देखा और अस्पताल लाए।
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अस्पताल में पसरा मातम
दिलीप राम की मौत की सूचना मिलते ही अस्पताल परिसर में भारी भीड़ जुट गई । पत्नी शिमला देवी, पुत्र आदित्य, प्रिंस और बेटी खुशी का रो-रोकर बुरा हाल है । बड़ा बेटा आदित्य अपने पिता के शव से लिपटकर जोर-जोर से चिल्ला रहा था– “पापा, मुझे भी अपने साथ ले चलो।” यह दृश्य देखकर हर कोई भावुक हो उठा।

परिवार के 65 वर्षीय वृद्ध पिता धनजी राम की स्थिति अत्यंत खराब थी। वह बार-बार यही कहते रहे– “हे भगवान! तूने यह क्या कर दिया... मुझे पहले क्यों नहीं बुला लिया।” अस्पताल परिसर में उपस्थित लोगों की आंखें यह दृश्य देखकर भर आईं। सूचना पाकर चौकी इंचार्ज ज्ञान प्रकाश तिवारी मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बलिया भेज दिया।

पारिवारिक जिम्मेदारियों का अकेला बोझ उठाते थे दिलीप

दिलीप राम अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। वह मिस्त्री का कार्य कर किसी तरह पत्नी, दो बेटों—आदित्य व प्रिंस और एक बेटी खुशी का जीवन यापन कर रहे थे। उनकी असामयिक मृत्यु से परिवार पर संकट का पहाड़ टूट पड़ा है।

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