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Ballia News: दुबेछपरा बालिका इंटर कालेज व अनुसूचित बस्ती के बीच कटान से दहशत
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दूबे छपरा बालिका विद्यालय के पश्चिम बम्बूक्रेट विधि से बचाव कार्य करते मजदूर। संवाद
मझौवां। गंगा नदी की उतरती लहरें अब तबाही मचाने लगी हैं। शनिवार की रात से गंगा की धारा न केवल उग्र हो उठी है, बल्कि वह दूबे छपरा के पश्चिमी किनारों पर लगातार कहर बरपा रही है। बालिका इंटर कॉलेज दूबे छपरा के पश्चिम व अनुसूचित बस्ती के बीच की गैपिंग में कटान तेज हो गई है।
इससे तटवर्ती इलाकों में भय का माहौल है। रविवार को भी कटान जारी थी। किसानों की खून-पसीने की कमाई नदी में समा रही है। कल तक खेत दिखने वाली जगह पर नदी की तेज धारा और मिट्टी का कटान देखने को मिला रहा है। गंगा की विनाशकारी लहरों से 2 बीघा जमीन नदी में समा गई। बाढ़ विभाग की तरफ से फ्लड फाइटिंग के नाम पर बंबूक्रेट तकनीक और हरे पेड़ों की टहनियों से कटान रोकने का प्रयास जारी है। नदी और बालिका विद्यालय के बीच का फासला मात्र 50 मीटर व प्राथमिक विद्यालय दूबे छपरा की दूरी 70 मीटर है। गंगा नदी का वेग थमा नहीं तो सरकारी शैक्षिक संस्थान भी चपेट में आ जाएंगे। गोपालपुर निवासी वीरेंद्र तिवारी, दीनानाथ तिवारी, मनोज तिवारी, नागेन्द्र तिवारी, गुना तिवारी का कहना है कि प्रशासन केवल कागजों पर काम कर रहा है। त्रिवेणी तिवारी और शिवजी तिवारी ने विभागीय ठेकेदारों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। केंद्रीय जल आयोग गायघाट गेज पर रविवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 57.550 मीटर रिकॉर्ड किया गया। इस समय नदी का पानी स्थिर था। गंगा नदी वार्निंग लेवल 56.615 मीटर से 935 सेमी अधिक है।
हुकुमछपरा एनएच-31 पर दबाव
मझौवां। चक्की नौरंगा क्षेत्र में लगातार कटान से किसानों की जमीन तेजी से नदी में समा रही है। खासकर राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के डेंजर प्वाइंट हुकुम छपरा के पास निर्माणाधीन ठोकर पर बैक रोलिंग धारा का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। चक्की नौरंगा के किसानों का कहना है कि पिछले चार-पांच दिनों में कई एकड़ भूमि कट कर नदी में समा चुकी है। बैक रोलिंग धारा यानी नदी की उल्टी दिशा में बहाव का बढ़ना ठोकर पर दबाव बना रहा है। अगर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया तो राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को भी खतरा हो सकता है।
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जलस्तर नीचे खिसकने पर इस तरह की कटान नदियां करती हैं। तटवर्ती क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है। दूबे छपरा में कटान को रोकने के लिए बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। चक्की नौरंगा में आबादी से दूरी पर मामूली कटान है फिलहाल हालात नियंत्रण में है नेशनल हाईवे पर दबाव नहीं है। तटबंधा पर 24 घंटे निगरानी की जा रही है। - संजय कुमार मिश्र, एक्सईएन, बाढ़ विभाग
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इससे तटवर्ती इलाकों में भय का माहौल है। रविवार को भी कटान जारी थी। किसानों की खून-पसीने की कमाई नदी में समा रही है। कल तक खेत दिखने वाली जगह पर नदी की तेज धारा और मिट्टी का कटान देखने को मिला रहा है। गंगा की विनाशकारी लहरों से 2 बीघा जमीन नदी में समा गई। बाढ़ विभाग की तरफ से फ्लड फाइटिंग के नाम पर बंबूक्रेट तकनीक और हरे पेड़ों की टहनियों से कटान रोकने का प्रयास जारी है। नदी और बालिका विद्यालय के बीच का फासला मात्र 50 मीटर व प्राथमिक विद्यालय दूबे छपरा की दूरी 70 मीटर है। गंगा नदी का वेग थमा नहीं तो सरकारी शैक्षिक संस्थान भी चपेट में आ जाएंगे। गोपालपुर निवासी वीरेंद्र तिवारी, दीनानाथ तिवारी, मनोज तिवारी, नागेन्द्र तिवारी, गुना तिवारी का कहना है कि प्रशासन केवल कागजों पर काम कर रहा है। त्रिवेणी तिवारी और शिवजी तिवारी ने विभागीय ठेकेदारों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। केंद्रीय जल आयोग गायघाट गेज पर रविवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 57.550 मीटर रिकॉर्ड किया गया। इस समय नदी का पानी स्थिर था। गंगा नदी वार्निंग लेवल 56.615 मीटर से 935 सेमी अधिक है।
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हुकुमछपरा एनएच-31 पर दबाव
मझौवां। चक्की नौरंगा क्षेत्र में लगातार कटान से किसानों की जमीन तेजी से नदी में समा रही है। खासकर राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के डेंजर प्वाइंट हुकुम छपरा के पास निर्माणाधीन ठोकर पर बैक रोलिंग धारा का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। चक्की नौरंगा के किसानों का कहना है कि पिछले चार-पांच दिनों में कई एकड़ भूमि कट कर नदी में समा चुकी है। बैक रोलिंग धारा यानी नदी की उल्टी दिशा में बहाव का बढ़ना ठोकर पर दबाव बना रहा है। अगर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया तो राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को भी खतरा हो सकता है।
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जलस्तर नीचे खिसकने पर इस तरह की कटान नदियां करती हैं। तटवर्ती क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है। दूबे छपरा में कटान को रोकने के लिए बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। चक्की नौरंगा में आबादी से दूरी पर मामूली कटान है फिलहाल हालात नियंत्रण में है नेशनल हाईवे पर दबाव नहीं है। तटबंधा पर 24 घंटे निगरानी की जा रही है। - संजय कुमार मिश्र, एक्सईएन, बाढ़ विभाग