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Ballia News: अस्पताल संचालक को 30 लाख क्षतिपूर्ति देने का आदेश
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बलिया। इलाज के दौरान ऑक्सीजन खत्म होने से युवक की मौत के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बलिया ने विपक्षीगण को 30 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।
आयोग ने आदेश की प्रति प्राप्त होने के 45 दिन के भीतर राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर पूरी धनराशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
परिवाद संख्या 77/2023 में बघौना निवासी राम निवास राय पुत्र सर्वानंद राय ने दयानंद पांडेय, दुर्गा प्रसाद तथा संबंधित अस्पताल के निदेशक/प्रबंधक के खिलाफ परिवाद दाखिल किया था। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष रामचंद्र तथा सदस्य दिनेश कुमार गुप्ता और सुषमा पांडेय की पीठ ने की।
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परिवाद के अनुसार, शिकायतकर्ता के पुत्र पंकज राय का बक्सर स्थित एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। 25 अगस्त 2019 को उसकी हालत बिगड़ने पर अस्पताल के डॉक्टर ने एंबुलेंस चालक को मरीज को ऑक्सीजन लगाकर वाराणसी ले जाने को कहा। आरोप है कि एंबुलेंस से वाराणसी ले जाते समय रास्ते में ऑक्सीजन समाप्त हो गई। इसके बाद दूसरी एंबुलेंस की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया, लेकिन चालक और वाहन मालिक कथित तौर पर मरीज को छोड़कर चले गए।
आदेश में दर्ज विवरण के मुताबिक, ऑक्सीजन के अभाव में पंकज राय की मौत हो गई। परिजन उसे अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पंकज एक निजी कंपनी में कार्यरत था और उसे 30 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। मामले में 25 सितंबर 2019 को नरही थाने में धारा 304 आईपीसी के तहत मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।
आयोग ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और शपथपत्रों का अवलोकन करने के बाद विपक्षीगण की लापरवाही को माना। आयोग ने कहा कि परिवादी की ओर से मांगी गई 30 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिया जाना उचित है। इसके बाद विपक्षी को मृतक के परिजनों को 30 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया। साथ ही 45 दिन में आदेश का पालन नहीं होने पर पूरी क्षतिपूर्ति राशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का निर्देश दिया गया है।
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आयोग ने आदेश की प्रति प्राप्त होने के 45 दिन के भीतर राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर पूरी धनराशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
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परिवाद संख्या 77/2023 में बघौना निवासी राम निवास राय पुत्र सर्वानंद राय ने दयानंद पांडेय, दुर्गा प्रसाद तथा संबंधित अस्पताल के निदेशक/प्रबंधक के खिलाफ परिवाद दाखिल किया था। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष रामचंद्र तथा सदस्य दिनेश कुमार गुप्ता और सुषमा पांडेय की पीठ ने की।
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परिवाद के अनुसार, शिकायतकर्ता के पुत्र पंकज राय का बक्सर स्थित एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। 25 अगस्त 2019 को उसकी हालत बिगड़ने पर अस्पताल के डॉक्टर ने एंबुलेंस चालक को मरीज को ऑक्सीजन लगाकर वाराणसी ले जाने को कहा। आरोप है कि एंबुलेंस से वाराणसी ले जाते समय रास्ते में ऑक्सीजन समाप्त हो गई। इसके बाद दूसरी एंबुलेंस की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया, लेकिन चालक और वाहन मालिक कथित तौर पर मरीज को छोड़कर चले गए।
आदेश में दर्ज विवरण के मुताबिक, ऑक्सीजन के अभाव में पंकज राय की मौत हो गई। परिजन उसे अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पंकज एक निजी कंपनी में कार्यरत था और उसे 30 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। मामले में 25 सितंबर 2019 को नरही थाने में धारा 304 आईपीसी के तहत मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।
आयोग ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और शपथपत्रों का अवलोकन करने के बाद विपक्षीगण की लापरवाही को माना। आयोग ने कहा कि परिवादी की ओर से मांगी गई 30 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिया जाना उचित है। इसके बाद विपक्षी को मृतक के परिजनों को 30 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया। साथ ही 45 दिन में आदेश का पालन नहीं होने पर पूरी क्षतिपूर्ति राशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का निर्देश दिया गया है।