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Ballia News: अब पर्चे पर स्पष्ट लिखना होगा दवा का नाम
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बलिया। मरीजों को कम खर्च में बेहतर स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने की कवायद में शासन जुट गया हैं। सरकारी व निजी अस्पतालों के चिकित्सकों को मरीजों के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाओं का पर्चा साफ-साफ लिखने और जेनरिक दवाएं ही लिखने का निर्देश दिया गया है। पर्चा पर दवा का नाम साफ लिखे होने से उसे कोई भी व्यक्ति दवा का नाम अासानी से पढ़ सकता है। अस्पतालों में दवाओं के स्टाक भी हमेशा अपडेट रखना है। प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पार्थ सारथी सेन शर्मा ने पिछले दिनों नेशनल मेडिकल कमीशन की गाइड पालन को निर्देश दिया था।
सीएमओ डाॅ. जयंत कुमार ने सभी अस्पताल प्रभारियों को इसको लेकर निर्देश जारी किया है। यह नियम सभी पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर पर भी लागू होगा। इन्हें मरीज व उसके स्वास्थ्य की हिस्ट्री भी रखनीं होगी। चिकित्सक मरीज की जांच के बाद पर्चे पर दवा जो लिखते है वह सिर्फ उनके द्वारा चिह्नित मेडिकल स्टोर वाले ही पहचानते हैं। कई बार मरीजों को डाॅक्टर की खास दवा की दुकानों को खोजने को भटकना पड़ता है।
एनएमसी की नई गाइड लाइन ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि डॉक्टर पर्चे पर दवाओं का नाम स्पष्ट रूप से बड़े अक्षरों में लिखने से मरीज और तीमारदार गलत दवा लेने से बच सकेंगे। केवल जेनरिक दवा ही लिखनी होगी। जेनरिक दवा ब्रांडेड दवाओं से 30 से 80 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं। अस्पताल परिसर से लगाय तमाम स्थानों पर जन औषधि केन्द्र खुले हैं।
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जिला अस्पताल के चिकित्सक डाॅ. सौरभ सिंह ने कहा कि दवा का नाम साफ लिखने का नियम ठीक है। जेनरिक दवा लिखने पर दवा दुकान वाले मरीज को ब्राड़ेड दवा दे देते हैं। जन औषधि केन्द्र पर सभी फार्मूला की दवा नहीं मिल रही है। मेडिकल स्टोर पर भी सख्ती की जरूरत है।
सीएचसी, पीएचसी के डॉक्टरों को जेनरिक दवा लिखने का नियम पहले से है। दवाओं का फार्मूला स्पष्ट लिखने के नियम का पालन सख्ती से कराने को सभी प्रभारी को कहा गया है। सरकार का ध्यान जेनरिक दवा से मरीजों को कम खर्च में बेहतर स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने की है। - डाॅ. जयंत कुमार, सीएमओ, बलिया
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सीएमओ डाॅ. जयंत कुमार ने सभी अस्पताल प्रभारियों को इसको लेकर निर्देश जारी किया है। यह नियम सभी पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर पर भी लागू होगा। इन्हें मरीज व उसके स्वास्थ्य की हिस्ट्री भी रखनीं होगी। चिकित्सक मरीज की जांच के बाद पर्चे पर दवा जो लिखते है वह सिर्फ उनके द्वारा चिह्नित मेडिकल स्टोर वाले ही पहचानते हैं। कई बार मरीजों को डाॅक्टर की खास दवा की दुकानों को खोजने को भटकना पड़ता है।
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एनएमसी की नई गाइड लाइन ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि डॉक्टर पर्चे पर दवाओं का नाम स्पष्ट रूप से बड़े अक्षरों में लिखने से मरीज और तीमारदार गलत दवा लेने से बच सकेंगे। केवल जेनरिक दवा ही लिखनी होगी। जेनरिक दवा ब्रांडेड दवाओं से 30 से 80 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं। अस्पताल परिसर से लगाय तमाम स्थानों पर जन औषधि केन्द्र खुले हैं।
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जिला अस्पताल के चिकित्सक डाॅ. सौरभ सिंह ने कहा कि दवा का नाम साफ लिखने का नियम ठीक है। जेनरिक दवा लिखने पर दवा दुकान वाले मरीज को ब्राड़ेड दवा दे देते हैं। जन औषधि केन्द्र पर सभी फार्मूला की दवा नहीं मिल रही है। मेडिकल स्टोर पर भी सख्ती की जरूरत है।
सीएचसी, पीएचसी के डॉक्टरों को जेनरिक दवा लिखने का नियम पहले से है। दवाओं का फार्मूला स्पष्ट लिखने के नियम का पालन सख्ती से कराने को सभी प्रभारी को कहा गया है। सरकार का ध्यान जेनरिक दवा से मरीजों को कम खर्च में बेहतर स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने की है। - डाॅ. जयंत कुमार, सीएमओ, बलिया