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Ballia News: अब परिषदीय स्कूलों के निर्माण कार्यों पर नजर रखेंगे अभिभावक
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परिषदीय स्कूलों के निर्माण व मरम्मत की गुणवत्ता पर अब विद्यालय प्रबंधन समिति का सीधा हस्तक्षेप होगा। निर्माण की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए विद्यालय प्रबंध समिति में एक उपसमिति का गठन किया जाएगा। यह उपसमिति ही कार्य की गुणवत्ता को प्रमाणित करेगी। प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा दीपक कुमार की ओर से विद्यालय प्रबंधन समिति के पुनर्गठन का आदेश जारी किया गया है।
जिले के 2249 परिषदीय स्कूल व 78 सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत विद्यालय प्रबंध समिति का कार्यकाल 30 नवंबर को खत्म हो रहा है। इसके पहले ही नई प्रबंध समिति का गठन होगा। अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत गैर अनुदानित विद्यालयों को छोड़कर सभी स्कूलों में प्रबंध समिति का गठन किया जाएगा। नई प्रबंध समिति को इस बार और अधिक अधिकार दिए जाएंगे। विद्यालय विकास से संबंधित गाइडलाइन के मुताबिक गठन शैक्षिक योजनाओं समेत स्कूल निर्माण व मरम्मत की गुणवत्ता पर नजर रखने की जिम्मेदारी भी अब एसएमसी को सौंपी जाएगी। एक ही परिसर में स्थापित प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट में एक ही विद्यालय में प्रबंध समिति का गठन किया जाएगा। इसमें 15 सदस्य होंगे, जिसमें 11 सदस्य अध्ययनरत बच्चों के माता पिता या अभिभावक होंगे। समिति में 50 प्रतिशत सदस्य महिलाएं रहेंगी। 30 नवंबर तक विद्यालय प्रबंध समिति का गठन करने का निर्देश दिया गया है। शासन के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने तैयारी तेज कर दी है।
उप समिति में दो अभिभावक, बहुमत के आधार पर होगा चयन
विद्यालय प्रबंध समिति के गठन के साथ ही एक उप समिति भी गठित की जाएगी। उप समिति के दो सदस्य स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक होंगे। इनका चयन विद्यालय प्रबंध समिति की बैठक में बहुमत के आधार पर होगा।
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विद्यालय निर्माण के लिए उप समिति के न्यूनतम तीन सदस्यों की सहमति से विद्यालय निर्माण सामग्री खरीदी जाएगी। निर्माण कार्यों की देखरेख विद्यालय प्रबंध समिति की उप समिति करेगी। इस चार सदस्यीय समिति में विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष के अलावा दो अभिभावक सदस्य व विद्यालय प्रबंध समिति में नामित पदेन शासकीय सेवक जो शिक्षकों से अलग हो, शामिल होंगे। निर्माण सामग्री खरीद से लेकर विभिन्न कार्यों तक में इनका दखल होगा।
विद्यालय प्रबंध समितियों का कार्यकाल 30 नवंबर को खत्म हो रहा है। इसके पहले ही नई एसएमसी गठित की जानी है। इसके लिए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। गाइडलाइन के मुताबिक नई प्रबंध समिति का गठन किया जाएगा।
- मनिराम सिंह, बीएसए।
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जिले के 2249 परिषदीय स्कूल व 78 सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत विद्यालय प्रबंध समिति का कार्यकाल 30 नवंबर को खत्म हो रहा है। इसके पहले ही नई प्रबंध समिति का गठन होगा। अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत गैर अनुदानित विद्यालयों को छोड़कर सभी स्कूलों में प्रबंध समिति का गठन किया जाएगा। नई प्रबंध समिति को इस बार और अधिक अधिकार दिए जाएंगे। विद्यालय विकास से संबंधित गाइडलाइन के मुताबिक गठन शैक्षिक योजनाओं समेत स्कूल निर्माण व मरम्मत की गुणवत्ता पर नजर रखने की जिम्मेदारी भी अब एसएमसी को सौंपी जाएगी। एक ही परिसर में स्थापित प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट में एक ही विद्यालय में प्रबंध समिति का गठन किया जाएगा। इसमें 15 सदस्य होंगे, जिसमें 11 सदस्य अध्ययनरत बच्चों के माता पिता या अभिभावक होंगे। समिति में 50 प्रतिशत सदस्य महिलाएं रहेंगी। 30 नवंबर तक विद्यालय प्रबंध समिति का गठन करने का निर्देश दिया गया है। शासन के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने तैयारी तेज कर दी है।
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उप समिति में दो अभिभावक, बहुमत के आधार पर होगा चयन
विद्यालय प्रबंध समिति के गठन के साथ ही एक उप समिति भी गठित की जाएगी। उप समिति के दो सदस्य स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक होंगे। इनका चयन विद्यालय प्रबंध समिति की बैठक में बहुमत के आधार पर होगा।
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विद्यालय निर्माण के लिए उप समिति के न्यूनतम तीन सदस्यों की सहमति से विद्यालय निर्माण सामग्री खरीदी जाएगी। निर्माण कार्यों की देखरेख विद्यालय प्रबंध समिति की उप समिति करेगी। इस चार सदस्यीय समिति में विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष के अलावा दो अभिभावक सदस्य व विद्यालय प्रबंध समिति में नामित पदेन शासकीय सेवक जो शिक्षकों से अलग हो, शामिल होंगे। निर्माण सामग्री खरीद से लेकर विभिन्न कार्यों तक में इनका दखल होगा।
विद्यालय प्रबंध समितियों का कार्यकाल 30 नवंबर को खत्म हो रहा है। इसके पहले ही नई एसएमसी गठित की जानी है। इसके लिए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। गाइडलाइन के मुताबिक नई प्रबंध समिति का गठन किया जाएगा।
- मनिराम सिंह, बीएसए।