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Ballia News: चने के सत्तू से अब किसान भी होंगे मालामाल

Sun, 17 Aug 2025 10:50 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 17 Aug 2025 10:50 PM IST
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Now farmers will also become rich from gram flour
बनरही ​स्थित औद्योगिक क्षेत्र में सत्तू का पैकेंट बनाता मजदूर।आयोजक
बलिया। सरकार की तरफ से जिले के चने की सत्तू को ओडीओपी में शामिल होने के बाद अब चने की खेती का दायरा बढ़ाने पर प्रशासन का पूरा जोर है। इससे चने के सत्तू का कारोबार का दायरा बढ़ेगा, साथ ही किसानों को भी लाभ होगा। ओडीओपी में शामिल होने के बाद चने की सत्तू का पोस्ट आफिस से भी अनुबंध हो गया है। ऐसे में चने की उपलब्धता में किसानों का सहयोग लेने में प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है, जिससे उन्हें भी इसका फायदा पहुंचाया जाए।
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जिले में पहले 3528 हेक्टेयर में चने की खेती होती थी। पिछले सीजन में चने के सत्तू का ओडीओपी में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजने के बाद इसकी खेती का दायरा बढ़ा दिया गया। पिछले रबी के सीजन में 3824 हेक्टेयर चने की खेती की गई थी। इस तरह 300 हेक्टेयर चने की खेती का दायरा बढ़ गया है। जिले में चने की खेती का टारगेट 10000 हेक्टेयर तक करने की लक्ष्य रखा गया है, जिससे सत्तू तैयार करने में चने की कमी न हो। एक जिला एक उत्पाद योजना में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और रोजगार पैदा करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। बलिया का सत्तू चने से बनाया जाता है। इसने अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली है।
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सरकार की तरफ से मिली थी मिनी किट
जिले में सत्तू वाले अनाज की खेती लगभग 45000 हेक्टेयर में होती है। इसमें 3528 हेक्टेयर में चना, 32037 हेक्टेयर में मक्का, 3397 हेक्टेयर मेें मटर, 4010 हेक्टेयर में जौ और 1847 हेक्टेयर में बाजारा की खेती होती है। सत्तू के ओडीओपी में शामिल होने पर किसान अब अधिक से अधिक खेती करने में जुटे हुए हैं। सरकार की तरफ से पिछले रबी के सीजन में मुफ्त मिनी किट दी गई थी।
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देश व विदेशों में मशहूर है बलिया का बाटी-चोखा
जिले का बाटी-चोखा और सत्तू देश-विदेश में मशहूर है। 20 हजार से अधिक परिवारों की रोजी-रोटी इससे जुड़ी है। चिकित्सक बताते हैं कि सत्तू में फाइबर, आयरन, प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। सत्तू की खासियत यह है कि इसे भट्ठी में अच्छी तरह भून कर तैयार किया जाता है। प्रमुख कारोबारी सौरभ अग्रवाल ने बताया कि अब सत्तू गिफ्ट आइटम हो गया है। इंडियन पोस्टआफिस से भी अनुबंध हो गया है।

पिछले रबी के सीजन में चने की खेती का दायरा बढ़ा हुआ था। इस बार का लक्ष्य सितंबर माह में आ जाएगा। चने की अधिक से अधिक खेती के लिए किसानों को हर बैठक में बताया जा रहा है। किसान अब चने की खेती में रूचि भी ले रहे हैं। इससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी। - पवन कुमार प्रजापति, जिला कृषि अधिकारी।
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