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नोटा नाराजगी तो जताएगा पर विजेता की राह नहीं रोक पाएगा

Tue, 15 Feb 2022 11:32 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 15 Feb 2022 11:32 PM IST
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NOTA will express displeasure but will not be able to stop the path of the winner.
बलिया। मतदान के दौरान उम्मीदवार पसंद नहीं आने पर, यदि नन ऑफ द एबव (नोटा) का बटन दबाने जा रहे हैं तो एक बार और मंथन कर लें। नोटा का विकल्प अपनाकर आप विरोध तो दर्ज करा देंगे, मगर इससे प्रत्याशियों की जीत-हार पर कोई विशेष फर्क नहीं पड़ेगा। नोटा के मत रद्द ही माने जाएंगे और सबसे ज्यादा मत हासिल करने वाले प्रत्याशी को विजयी घोषित किया जाएगा। यानी नोटा का बटन दबाकर प्रत्याशियों को आईना दिखाया जा सकता है, लेकिन नतीजे किसी के पक्ष-विपक्ष में पड़े मतों से तय होगा।
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स्पष्ट तौर पर ऐसे समझा जा सकता है कि यदि किसी विधानसभा क्षेत्र में सभी प्रत्याशियों को मिले वोटों से नोटा का मत अधिक पड़ता है तो भी वही उम्मीदवार विजयी घोषित किया जाएगा, जिसे नोटा के बाद सबसे ज्यादा मत मिले हों। ऐसे में उस विधानसभा के उम्मीदवार यह तो दर्शा सकते हैं कि वहां जितने भी उम्मीदवार चुनावी मैदान में खड़े हैं, उनमें से कोई भी नोटा दबाने वाले मतदाताओं की उम्मीदों या पसंद पर खरा नहीं है। मगर, जीत हार का फैसला वही मतदाता करेंगे, जिसने किसी उम्मीदवार को वोट दिया है। कई बार जीत के अंतर से ज्यादा नोटा के मत होते हैं, जिन्हें माना जाता है कि यह किसी के पक्ष-विपक्ष में पड़े होते तो नतीजा बदल सकता था।
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पहले भी था विरोध दर्ज कराने का अधिकार
चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल पहले जब बैलेट पेपर का उपाय होता था, तब भी मतदाताओं के पास बैलेट पेपर को खाली छोड़ अपना विरोध दर्ज कराने का अधिकार होता था। इसका मतलब यह था कि मतदाताओं को चुनाव लड़ने वाला कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है।
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गुलाबी रंग का होता है नोटा का बटन
नोटा का मतलब इनमें से कोई नहीं है। संदेश है कि आपको चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार में से कोई भी पसंद नहीं है। ईवीएम में नोटा का बटन गुलाबी रंग का होता है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने दिसंबर 2013 के विधानसभा चुनावों से नोटा का विकल्प दिया था। वोटों की गिनती के समय नोटा पर डाले गए वोट भी गिने जाते हैं। नोटा में कितने लोगों ने वोट किया, इसका भी आंकलन किया जाता है। चुनाव के माध्यम से मतदाता का किसी भी उम्मीदवार के अपात्र, अविश्वसनीय और अयोग्य व नापसंद का संदेश होता है। बता दें कि भारत, ग्रीस, यूक्रेन, स्पेन, कोलंबिया और रूस समेत कई देशों में नोटा का विकल्प दिया गया है।

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किसी मतदाता को यदि अपनी विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र का कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है तो वह नोटा का बटन दबाकर अपना विरोध दर्ज करा सकता है। नोटा के वोटों की गिनती होती है, मगर यह मत रद्द ही माने जाते हैं। यह विरोध दर्ज कराने का माध्यम है। नोटा छोड़कर जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलेगा, वही विजयी माना जाएगा।
-राजेश कुमार, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, बलिया।
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