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अस्पताल में एक साल से दवा नहीं
ballia
Updated Sun, 25 Mar 2018 10:43 PM IST
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जिला मुख्यालय स्थित जर्जर राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय।
- फोटो : अमर उजाला
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दवा के मामले में जिले के एलोपैथ अस्पतालों की दशा भले ही खराब है। फिर भी दवाएं कुछ हद तक मिल जा रही है। लेकिन जिले के आयुर्वेद अस्पतालों की दशा खासी खराब है। करीब एक साल से यहां दवाएं ही नहीं भेजी गईं। वहीं, जिला मुख्यालय स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल का भवन भी बजट के अभाव में जर्जर हो गया है। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में पहले रोजाना सौ से 150 मरीज आते थे। लेकिन दवा के अभाव के चलते अब इनकी संख्या घटकर 15 से 20 मरीज पर आ गई है।
जिला मुख्यालय पर बने आयुर्वेदिक अस्पताल को मॉडल रुप में बनाया गया था। यहां 20 बेड भी लगे हैं। जिले में 14 आयुर्वेद और दो यूनानी चिकित्सकों की तैनाती हैं। इनमें से एक जिला मुख्यालय और बाकी तहसीलों के अस्पतालों में तैनात हैं। जबकि दूररस्थ गावों में डॉक्टरों की कमी है। सभी जगह दवाओं का टोटा है। दवा नहीं रहने से मरीजों को बाहर की दवाएं खरीदनी पड़ रही है। जिले में 64 आयुर्वेदिक तथा चार यूनानी पद्घति के अस्पताल संचालित हो रहे है। दवा की कमी के चलते ग्रामीण इलाकों के आयुर्वेदिक अस्पतालों में मरीज अब न के बराबर हैं। पिछली सरकारों में कुछ दवाएं और चूर्ण भेजकर काम चलाया जाता रहा है। सूबे में नई सरकार बनने के बाद करीब साल पूरे होने को हैं लेकिन दवा का अभाव बना है।
विभागीय सूत्रों की माने तो नवंबर-दिसंबर 2016 बजट में 11 लाख मिले थे। जिनसे दवाएं आई थीं। इसके बाद दवाओं का हो गया। भवन के मरम्मत और पेंटिंग के नाम पर भी कोई बजट करीब आठ साल से नहीं मिल रहा है। उपचार कराने आए आफिसर्स कालोनी निवासी अजीत कुमार, रवि पांडेय ने बताया कि आयुर्वेदिक दवाएं करीब एक साल से नहीं आ रही है। गरीब मरीज बाहर से दवा खरीद रहे।
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जिला मुख्यालय पर बने आयुर्वेदिक अस्पताल को मॉडल रुप में बनाया गया था। यहां 20 बेड भी लगे हैं। जिले में 14 आयुर्वेद और दो यूनानी चिकित्सकों की तैनाती हैं। इनमें से एक जिला मुख्यालय और बाकी तहसीलों के अस्पतालों में तैनात हैं। जबकि दूररस्थ गावों में डॉक्टरों की कमी है। सभी जगह दवाओं का टोटा है। दवा नहीं रहने से मरीजों को बाहर की दवाएं खरीदनी पड़ रही है। जिले में 64 आयुर्वेदिक तथा चार यूनानी पद्घति के अस्पताल संचालित हो रहे है। दवा की कमी के चलते ग्रामीण इलाकों के आयुर्वेदिक अस्पतालों में मरीज अब न के बराबर हैं। पिछली सरकारों में कुछ दवाएं और चूर्ण भेजकर काम चलाया जाता रहा है। सूबे में नई सरकार बनने के बाद करीब साल पूरे होने को हैं लेकिन दवा का अभाव बना है।
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विभागीय सूत्रों की माने तो नवंबर-दिसंबर 2016 बजट में 11 लाख मिले थे। जिनसे दवाएं आई थीं। इसके बाद दवाओं का हो गया। भवन के मरम्मत और पेंटिंग के नाम पर भी कोई बजट करीब आठ साल से नहीं मिल रहा है। उपचार कराने आए आफिसर्स कालोनी निवासी अजीत कुमार, रवि पांडेय ने बताया कि आयुर्वेदिक दवाएं करीब एक साल से नहीं आ रही है। गरीब मरीज बाहर से दवा खरीद रहे।
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