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कोरोना सैंपलिंग में यूज मेडिकल बायो वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था नहीं

Sat, 25 Jul 2020 10:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2020 10:45 PM IST
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No disposal of use medical bio waste in corona sampling
बलिया। कोरोना काल में भी स्वास्थ्य विभाग में सरकारी धन के बंदरबांट का खेल जारी है। पिछले पांच महीने से जनपद कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है, लेकिन अब तक विभाग की ओर से कोविड-19 के परीक्षण में प्रयोग किए जाने वाले पीपीई किट, मॉस्क, ग्लब्स व अन्य मेडिकल बायो वेस्ट को निस्तारित करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इसी का परिणाम है कि शहर में सड़क की पटरियों के साथ ही सीएमओ आवास और एएनएम ट्रेनिंग सेंटर के बाहर कोरोना परीक्षण में प्रयोग किया गया मेडिकल वायो वेस्ट फेंका मिल रहा है। हद तो ये है कि जब इसे लेकर संबंधित अधिकारियों से बात की गई तो वे मामले की गंभीरता को समझने की बजाय एक-दूसरे पर टालते नजर आए।
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सैंपलिंग कार्य में लगे स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि मेडिकल बायो वेस्ट को निस्तारित करने के लिए शासन की ओर से धनराशि आवंटित है, लेकिन इसका जिम्मा संभालने वाले लोग उसके बंदरबांट में लगे हैं। इस समय हालात ये हैं कि सैंपलिंग कार्य में लगे स्वास्थ्य विभाग की टीम के लोग जब लौट कर वापस आते हैं तो उनसे रिपोर्ट तो ले ली जाती है, लेकिन सैंपलिंग के समय प्रयोग किया किट वगैरह वे कहां डालें, इसकी कोई व्यवस्था नहीं दी जाती है। वे काफी देर तक तो इस प्रयास में लगे रहते हैं कि उन्हें पता चल जाए कि इसे कहां डिस्ट्राय करना है, लेकिन जब कहीं पता नहीं चलता तो कहीं सड़क किनारे फेंक देते हैं या साथ लेकर उन अस्पतालों पर जाते हैं जहां उनकी तैनाती है। फिर वहीं उसे जलाने आदि की व्यवस्था करते हैं।
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स्वास्थ्यकर्मियों की मानें तो तीन-चार दिन पहले ऐसी ही एक टीम मेडिकल वेस्ट लेकर जिला महामारी अधिकारी डॉ. जियाउल हुदा के पास पहुंची तो उन्होंने देखते ही भगा दिया। काफी देर तक टीम के लोग परेशान होकर घूमते रहे और जब कहीं कोईं सुनवाई नहीं हुई तो सीएमओ के बंगला के गेट के पास फेंककर फरार हो गए। मामले को लेकर जब जिला महामारी अधिकारी डॉ. जियाउल हुदा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें आईडीसी की चिम्मेदारी सौंपी गई है। मेडिकल बायो वेस्ट को डिस्ट्रॉय या उसके मैनेजमेंट की जिम्मेदारी दूसरे लोगों पर है, लेकिन वे इसमें बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि मेडिकल बायो वेस्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे नोडल अधिकारी और उनके सहयोगी डॉक्टर रंजय इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक इन लोगों की तरफ से मेडिकल बायो वेस्ट को निस्तारित करने के लिए कहीं कोई इंतजाम नहीं किया गया है। ना थैला उपलब्ध कराया गया है और ना कहीं ड्रम आदि की व्यवस्था की गई है, जिसमें डलवाया जा सके। ऐसे में परीक्षण कार्य में लगे चिकित्सर कर्मियों के सामने हमेशा यह दुविधा रहती है कि वे प्रयोग में लाए गए पीपीई किट, मॉस्क, ग्लव्स को कहां निस्तारित करें। मेडिकल बायो वेस्ट को निस्तारित करने की जिम्मेदारी संभालने वाले डॉक्टर रंजय ने कहा कि इसके लिए लखनऊ की कंपनी सिलीकान वैली को जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन आपसी तालमेल के अभाव के कारण मेडिकल बायो वेस्ट को लेकर समस्या पैदा हो रही है।

मेडिकल बॉयो वेस्ट के नोडल अधिकारी डॉ. हरिनंदन प्रसाद का कहना है कि मामले की जानकारी नहीं थी, अब जानकारी हुई है तो इसकी जांच कराता हूं। शीघ्र ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
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