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कैसा सौभाग्य, केबल न कनेक्शन, आ गया बिजली का बिल
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बलिया। विद्युत विभाग ने उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगाने में खूब खेल किया है। मीटर को केवल वैध कनेक्शन धारकों व नए कनेक्शन लेने वालों के यहां लगना था, लेकिन कार्यदायी संस्था ने गांवों में रेवड़ी की तरह आधार लेकर मीटर लगा दिया। आलम यह है कि जहां पोल और तार नहीं है, वहां के लोगों को भी हजारों का बिल भेज दिया गया है। मामला सोहांव ब्लॉक के पलिया खास गांव का है।
सरकार की ओर से बिजली आपूर्ति की व्यवस्था सुधारने और खपत के सापेक्ष राजस्व प्राप्ति के लिए तरह-तरह के उपाय किए जाते हैं लेकिन विभागीय अधिकारी और कर्मचारी इसे लेकर खूब मनमानी कर रहे हैं। बताया जाता है कि करीब डेढ़ साल पहले शासन की ओर से घर-घर बिजली पहुंचाने के लिए सौभाग्य योजना संचालित की गई। इसके तहत, प्रावधान किया गया कि जिन मजरों तक बिजली नहीं पहुंची वहां तक विद्युतीकरण कर लोगों को कनेक्शन दिए जाएं। जिले में सौभाग्य योजना के तहत छूटे मोहल्ले और पूरवे तक बिजली पहुंचाने की जिम्मेदारी बजाज इलेक्ट्रिकल को दी गई है। कार्यदायी संस्था इस योजना को लेकर पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है। इतना ही नहीं कार्यदायी संस्था की कारगुजारी भी सामने लगी है। कार्यदायी संस्था की ओर से जैसे-तैसे पोल, तार और ट्रांसफार्मर लगाने के बाद संबंधित मोहल्ले के लोगों को कनेक्शन देने के लिए आधार कार्ड और फोटो लिया। इसके बाद उनके घरों पर मीटर भी लगा दिया लेकिन कनेक्शन नहीं किया। लोग इंतजार करते रहे कि कर्मचारी उनका कनेक्शन करेंगे लेकिन कार्यदायी संस्था के कर्मी मीटर लगाने के बाद गायब हो गए और अब जिनके यहां मीटर लगे हैं। बिना बिजली जलाए ही उनके यहां पांच से सात हजार के बिल पहुंचने लगे हैं। बतौर उदाहरण सोहांव ब्लॉक के पलिया खास गांव में इस तरह का मामला सामने आया है। हर महीना बिल आता है तो ग्रामीण इसकी शिकायत भी विद्युत विभाग के अधिकारियों से करते हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि न तो उनके यहां बिजली जलती है और न ही मीटर ही चलता है तो इसकी रीडिंग कैसे हो रही है।
यह मामला संज्ञान में आया है। इसके निस्तारण के लिए पलिया खास गांव में 16 सितंबर को एसडीओ की मौजूदगी में कैंप निर्धारित किया गया है। इसमें कुछ लोग ही हैं, जो बिजली का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। कैंप में ही सभी मामले की जांच कर निस्तारण कराया जाएगा। - चंद्रेश उपाध्याय, अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड द्वितीय, बलिया
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सरकार की ओर से बिजली आपूर्ति की व्यवस्था सुधारने और खपत के सापेक्ष राजस्व प्राप्ति के लिए तरह-तरह के उपाय किए जाते हैं लेकिन विभागीय अधिकारी और कर्मचारी इसे लेकर खूब मनमानी कर रहे हैं। बताया जाता है कि करीब डेढ़ साल पहले शासन की ओर से घर-घर बिजली पहुंचाने के लिए सौभाग्य योजना संचालित की गई। इसके तहत, प्रावधान किया गया कि जिन मजरों तक बिजली नहीं पहुंची वहां तक विद्युतीकरण कर लोगों को कनेक्शन दिए जाएं। जिले में सौभाग्य योजना के तहत छूटे मोहल्ले और पूरवे तक बिजली पहुंचाने की जिम्मेदारी बजाज इलेक्ट्रिकल को दी गई है। कार्यदायी संस्था इस योजना को लेकर पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है। इतना ही नहीं कार्यदायी संस्था की कारगुजारी भी सामने लगी है। कार्यदायी संस्था की ओर से जैसे-तैसे पोल, तार और ट्रांसफार्मर लगाने के बाद संबंधित मोहल्ले के लोगों को कनेक्शन देने के लिए आधार कार्ड और फोटो लिया। इसके बाद उनके घरों पर मीटर भी लगा दिया लेकिन कनेक्शन नहीं किया। लोग इंतजार करते रहे कि कर्मचारी उनका कनेक्शन करेंगे लेकिन कार्यदायी संस्था के कर्मी मीटर लगाने के बाद गायब हो गए और अब जिनके यहां मीटर लगे हैं। बिना बिजली जलाए ही उनके यहां पांच से सात हजार के बिल पहुंचने लगे हैं। बतौर उदाहरण सोहांव ब्लॉक के पलिया खास गांव में इस तरह का मामला सामने आया है। हर महीना बिल आता है तो ग्रामीण इसकी शिकायत भी विद्युत विभाग के अधिकारियों से करते हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि न तो उनके यहां बिजली जलती है और न ही मीटर ही चलता है तो इसकी रीडिंग कैसे हो रही है।
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यह मामला संज्ञान में आया है। इसके निस्तारण के लिए पलिया खास गांव में 16 सितंबर को एसडीओ की मौजूदगी में कैंप निर्धारित किया गया है। इसमें कुछ लोग ही हैं, जो बिजली का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। कैंप में ही सभी मामले की जांच कर निस्तारण कराया जाएगा। - चंद्रेश उपाध्याय, अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड द्वितीय, बलिया
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