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गंगा में गिरने वाले सीवेज को लेकर एनजीटी ने कसा शिकंजा
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बलिया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जनपद में कटहल नाले के माध्यम से गंगा में सीधे गिराए जाने वाले सीवेज को लेकर सख्त संदेश दिए हैं। पांच सदस्यी कमेटी का गठन करते हुए इस पर त्वरित रूप से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ इस पर अभी तक काम नहीं करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय के साथ ही दो माह के भीतर एक्शन टेकेन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि गठित कमेटी जल्द ही जनपद पहुंच सकती है।
गंगा में कटहल नाले के माध्यम से पूरे शहर का गंदा पानी और सीवेज सीधे गिराया जाता है। इसे लेकर एनजीटी की ओर से पहले भी शिकंजा कसा जा चुका है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में मनोज राय की ओर से याचिका दायर की गई थी। गंगा में कटहल नाले के माध्यम से सीधे सीवेज गिराने का आरोप लगाया गया था। साथ ही कहा था शहर में सीवेज नेटवर्क बिछाने का काम ज्योति बिल्डटेक को दिया गया था। इसमें करोड़ों का गोलमाल किया गया है। 13 वर्ष में भी ये धरातल पर उतर नहीं पाया। इस पर सुनवाई करते हुए पिछले दिनों एनजीटी की ओर से फिर से सख्य निर्देश जारी किए गए हैं। न्यामूर्ति आदर्श कुमार गोयल, सुधीर अग्रवाल और नागिन नंदा ने इस मामले में एनएमसीजी, सीपीसीबी, सचिव नगर विकास, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिलाधिकारी की पांच सदस्यीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। कमेटी को प्रकरण में त्वरित निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही इस समस्या के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को भी चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। दो माह में एक्शन टेकेन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कालिका सिंह ने बताया कि कमेटी जल्द जनपद का दौरा करेगी और इस पर कार्य शुरू किया जाएगा।
नहीं लग पा रहगी है रोक
बलिया। तमाम कवायदों के बाद भी गंगा को निर्मल नहीं बनाया जा सका है। कटहल नाले का पानी गंगा में गिर रहा है, जिससे गंगा का पानी प्रदूषित हो रहा है। ऐसे में लोग गंगा में स्नान और आचमन से भी परहेज करने लगे हैं। यही नहीं कटहल नाले में कूड़ा-कचरा भी फेंका जा रहा है। आसपास के मांस की दुकानों के अवशेष भी नाले में फेंके जा रहे हैं। इससे वातावरण दुर्गंधमय हो गया है जिससे लोगों को दिक्कत होती है। नगर के कीनाराम घाट पर कटहल नाले तो नरही थाना क्षेत्र के कोटवां नारायणपुर घाट पर भी नाले का पानी गंगा में जा रहा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के शिकंजा कसने के बाद नाले पर बायो रिमेडिएशन के लिए करोड़ों की लागत से टेंडर निकाला गया था, लेकिन आपसी खींचतान से ये भी टेंडर ही रह गया।
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घोटाले की भेंट चढ़ गई सीवरेज योजना
बलिया। जनपद में एसटीपी की योजना घोटाले की भेंट चढ़ गई है। परियोजना के लिए पहले ही लगभग 95 करोड़ की धनराशि जारी हो चुकी है, लेकिन कोई भी काम पूरा नहीं किया गया और धनराशि का बंदरबांट कर ली गई। एसटीपी पूरी नहीं होने से शहर से निकलने वाला गंगा पानी और सीवेज कटहल नाले के माध्यम से सीधे गंगा में गिराया जाता है। इन दिनों एजीटी की ओर से गंगा में सीधे नाला गिराने पर कड़े निर्देश के साथ जुर्माने का प्रावधान किया है। इसके लिए सीधे जलनिगम और नगर पालिका को जिम्मेदार बनाया है। जलनिगम की ओर से अब नमामि गंगे योजना के तहत 204 करोड़ का री इस्टीमेट भेजा गया है। ये भी धूल फांक रहा है। गंगा को सीवेज से मुक्ति मिलती नहीं दिखाई दे रही है।
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गंगा में कटहल नाले के माध्यम से पूरे शहर का गंदा पानी और सीवेज सीधे गिराया जाता है। इसे लेकर एनजीटी की ओर से पहले भी शिकंजा कसा जा चुका है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में मनोज राय की ओर से याचिका दायर की गई थी। गंगा में कटहल नाले के माध्यम से सीधे सीवेज गिराने का आरोप लगाया गया था। साथ ही कहा था शहर में सीवेज नेटवर्क बिछाने का काम ज्योति बिल्डटेक को दिया गया था। इसमें करोड़ों का गोलमाल किया गया है। 13 वर्ष में भी ये धरातल पर उतर नहीं पाया। इस पर सुनवाई करते हुए पिछले दिनों एनजीटी की ओर से फिर से सख्य निर्देश जारी किए गए हैं। न्यामूर्ति आदर्श कुमार गोयल, सुधीर अग्रवाल और नागिन नंदा ने इस मामले में एनएमसीजी, सीपीसीबी, सचिव नगर विकास, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिलाधिकारी की पांच सदस्यीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। कमेटी को प्रकरण में त्वरित निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही इस समस्या के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को भी चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। दो माह में एक्शन टेकेन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कालिका सिंह ने बताया कि कमेटी जल्द जनपद का दौरा करेगी और इस पर कार्य शुरू किया जाएगा।
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नहीं लग पा रहगी है रोक
बलिया। तमाम कवायदों के बाद भी गंगा को निर्मल नहीं बनाया जा सका है। कटहल नाले का पानी गंगा में गिर रहा है, जिससे गंगा का पानी प्रदूषित हो रहा है। ऐसे में लोग गंगा में स्नान और आचमन से भी परहेज करने लगे हैं। यही नहीं कटहल नाले में कूड़ा-कचरा भी फेंका जा रहा है। आसपास के मांस की दुकानों के अवशेष भी नाले में फेंके जा रहे हैं। इससे वातावरण दुर्गंधमय हो गया है जिससे लोगों को दिक्कत होती है। नगर के कीनाराम घाट पर कटहल नाले तो नरही थाना क्षेत्र के कोटवां नारायणपुर घाट पर भी नाले का पानी गंगा में जा रहा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के शिकंजा कसने के बाद नाले पर बायो रिमेडिएशन के लिए करोड़ों की लागत से टेंडर निकाला गया था, लेकिन आपसी खींचतान से ये भी टेंडर ही रह गया।
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घोटाले की भेंट चढ़ गई सीवरेज योजना
बलिया। जनपद में एसटीपी की योजना घोटाले की भेंट चढ़ गई है। परियोजना के लिए पहले ही लगभग 95 करोड़ की धनराशि जारी हो चुकी है, लेकिन कोई भी काम पूरा नहीं किया गया और धनराशि का बंदरबांट कर ली गई। एसटीपी पूरी नहीं होने से शहर से निकलने वाला गंगा पानी और सीवेज कटहल नाले के माध्यम से सीधे गंगा में गिराया जाता है। इन दिनों एजीटी की ओर से गंगा में सीधे नाला गिराने पर कड़े निर्देश के साथ जुर्माने का प्रावधान किया है। इसके लिए सीधे जलनिगम और नगर पालिका को जिम्मेदार बनाया है। जलनिगम की ओर से अब नमामि गंगे योजना के तहत 204 करोड़ का री इस्टीमेट भेजा गया है। ये भी धूल फांक रहा है। गंगा को सीवेज से मुक्ति मिलती नहीं दिखाई दे रही है।