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नवरात्र आज से, देवी मंदिरों में उमड़ेंगे भक्त
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Fri, 20 Mar 2015 11:43 PM IST
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वासंतिक नवरात्र शनिवार यानी आज से शुरू हो रहा है। इसके पहले पूर्व संध्या पर शुक्रवार को छोटे-बड़े सभी देवी मंदिरों की सफाई की गई। मंदिरों के बाहर नारियल, चुनरी की दूकानें भी सज गई हैं।
शनिवार को नवरात्र के पहले दिन प्रमुख मंदिरों में देवी दर्शन के लिए भक्तों का रेला उमड़ेगा। इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस की तैनाती की गई है। वहीं मंदिर के व्यवस्थापक भी तैयारियों में पूरे दिन जुटे रहे।
वासंतिक नवरात्र का व्रत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी पर्यंत तक किया जाता है। अमावस्या युक्त प्रतिपदा वर्जित है और द्वितीया युक्त प्रतिपदा शास्त्रों के अनुसार शुभ माना गया है।
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ज्योतिर्विद आचार्य पंडित आदित्य पराशर ने बताया कि यदि नवरात्र पर्यंत व्रत रखने में समर्थ न हों तो सप्तमी, अष्टमी और नवमी व्रत से त्रिरात्रि का फल मिलता है।
बताया कि प्रतिपदा के दिन शुभ स्थान पर मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ और गेहूं बोएं। उस पर यथा सामर्थ्य कलश स्थापित करें।
नवरात्रि में महाकाली, महालक्ष्मी और महा सरस्वती का पूजन तथा सप्तशती का पाठ करने से लाभ मिलता है। देवी व्रतों में कुंवारी पूजन आवश्यक माना गया है।
बताया कि नवरात्र के अंतिम दिन कुंवारी कन्याओं का चरण धोकर गंध पुष्पादि से पूजन अर्चन करके भोजन कराना चाहिए। इस दिन विक्रमी संवत् 2072 किलक नामक का शुभारंभ होगा। इस वर्ष राजा शनि तथा मंत्री मंगल होंगे, जो सुखकारी होगा।
बताया कि कलश स्थापना 21 मार्च को होगा तथा अष्टमी व्रत और निशा पूजन 27 मार्च की रात में होगा। जबकि पारण 28 मार्च को होगा।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से वासंतिक नवरात्र की शुरुआत हो रही है। इसके मद्देनजर नगर से ग्रामीणांचलों में मां के दरबार को आधुनिक उपकरणों से सजाया गया। घरों की साफ-सफाई के साथ ही पूजन-अर्चन की तैयारी की गई। बाजार में चुनरी 20 से 180 रुपये तक उपलब्ध है।
नारियल पिछले वर्ष की भांति ही 20 से 30 रुपये में बिक रही है। फलों का भाव मामूली बढ़ा है। नगर के जापलिनगंज, गुदरी बाजार, ब्रह्माइन, शंकरपुर, कोरंटाडीह स्थित मंगला भवानी, उचेड़ा स्थित उच्चेड़ा देवी के मंदिरों के गेट भोर से खोले जाएंगे।
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शनिवार को नवरात्र के पहले दिन प्रमुख मंदिरों में देवी दर्शन के लिए भक्तों का रेला उमड़ेगा। इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस की तैनाती की गई है। वहीं मंदिर के व्यवस्थापक भी तैयारियों में पूरे दिन जुटे रहे।
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वासंतिक नवरात्र का व्रत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी पर्यंत तक किया जाता है। अमावस्या युक्त प्रतिपदा वर्जित है और द्वितीया युक्त प्रतिपदा शास्त्रों के अनुसार शुभ माना गया है।
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ज्योतिर्विद आचार्य पंडित आदित्य पराशर ने बताया कि यदि नवरात्र पर्यंत व्रत रखने में समर्थ न हों तो सप्तमी, अष्टमी और नवमी व्रत से त्रिरात्रि का फल मिलता है।
बताया कि प्रतिपदा के दिन शुभ स्थान पर मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ और गेहूं बोएं। उस पर यथा सामर्थ्य कलश स्थापित करें।
नवरात्रि में महाकाली, महालक्ष्मी और महा सरस्वती का पूजन तथा सप्तशती का पाठ करने से लाभ मिलता है। देवी व्रतों में कुंवारी पूजन आवश्यक माना गया है।
बताया कि नवरात्र के अंतिम दिन कुंवारी कन्याओं का चरण धोकर गंध पुष्पादि से पूजन अर्चन करके भोजन कराना चाहिए। इस दिन विक्रमी संवत् 2072 किलक नामक का शुभारंभ होगा। इस वर्ष राजा शनि तथा मंत्री मंगल होंगे, जो सुखकारी होगा।
बताया कि कलश स्थापना 21 मार्च को होगा तथा अष्टमी व्रत और निशा पूजन 27 मार्च की रात में होगा। जबकि पारण 28 मार्च को होगा।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से वासंतिक नवरात्र की शुरुआत हो रही है। इसके मद्देनजर नगर से ग्रामीणांचलों में मां के दरबार को आधुनिक उपकरणों से सजाया गया। घरों की साफ-सफाई के साथ ही पूजन-अर्चन की तैयारी की गई। बाजार में चुनरी 20 से 180 रुपये तक उपलब्ध है।
नारियल पिछले वर्ष की भांति ही 20 से 30 रुपये में बिक रही है। फलों का भाव मामूली बढ़ा है। नगर के जापलिनगंज, गुदरी बाजार, ब्रह्माइन, शंकरपुर, कोरंटाडीह स्थित मंगला भवानी, उचेड़ा स्थित उच्चेड़ा देवी के मंदिरों के गेट भोर से खोले जाएंगे।