बलिया। जिले में मंगलवार को हिंदी के उत्थान के लिए सभी तबके के लोगों ने सतत प्रयास करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर आयोजित विविध कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों में हिंदी के प्रति लगाव जगाने के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्कूलों में बच्चों ने पोस्टर बनाकर तो बड़ों ने काव्य गोष्ठी और व्याख्यान के जरिए हिंदी की अलख जगाई।
जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के हजारी प्रसाद द्विवेदी अकादमिक भवन में मंगलवार को हिंदी दिवस का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. कल्पलता पांडेय ने कहा कि जिस राष्ट्र की भाषा नहीं होती वह राष्ट्र संप्रेषणीयता के अभाव में मृतप्राय हो जाता है। दुखद है कि सांस्कृतिक दृष्टि से हम स्वतंत्र नहीं हो सके और अंग्रेजियत हमारे मन-मस्तिष्क में रच-बस गई है। जब तक हम इससे मुक्त नहीं होंगे, तब तक हिंदी का विकास रुका रहेगा। डॉ. अखिलेश राय ने कहा कि हिन्दी का विकास उसकी लोकभाषाओं के विकास के साथ होगा। डॉ .जैनेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि हिंदी स्वतंत्रता संग्राम की भाषा रही है। संविधान सभा में हिन्दी को राजभाषा का दर्जा बड़ी मुश्किलों से प्राप्त हुआ है। अब हमें इसके प्रयोग और प्रभाव क्षेत्र का विकास करने की आवश्यकता है। शैक्षणिक निदेशक डॉ. गणेश कुमार पाठक ने कहा कि हिंदी भाषा रोजगार की भी भाषा है। हिंदी अधिकारी, हिंदी अनुवादक, स्क्रिप्ट लेखन आदि विविध क्षेत्रों में हिंदी के ज्ञान की आवश्यकता है। संचालन डॉ. प्रमोद शंकर पांडेय ने किया।