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मेरे कफन पे अजीजों हिन्दुस्तान लिख देना...
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Fri, 04 Nov 2016 08:25 PM IST
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अगरौली गांव में आयोजित कवि सम्मेलन में अतिथि कवियों को माला पहनाकर सम्मानित करते आयोजन समिति के सदस्य।
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उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में गुरुवार की देर शाम पशुपति पांडेय के पुण्यतिथि पर अखिल भारतीय मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। आदर्श पुस्तकालय दोपही अगरौली के प्रागंण में कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि पूर्व विधायक रामइकबाल सिंह व अध्यक्षता सेवानिवृत उपायुक्त खाद्य व रसद विभाग उप्र राज नारायण तिवारी ने की। इसमें दूर- दराज से आये कवियों ने समाज में फैले कुरीतियों व भ्रष्टाचार पर जोरदार प्रहार कर वाहवाही लूटी।
सेवा संस्थान की ओर आयोजित मुशायरे व कवि सम्मेलन की शुरूआत मां सरस्वती, स्वामी विवेकानंद व पशुपति पांडेय के चित्र पर फूल माला व दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। कवि सम्मेलन में कुशीनगर से आये फिरोज अश्क लक्ष्मी गंगवी ने मर जाऊं तो दफना देना वतन की मिट्टी में, मेरे कफन पे अजीजों हिन्दुस्तान लिख देना सुनाकर देशभक्ति की भावना जगा दी।
वहीं बिहार से आये कवि हृदय नारायण ने रंग जमावल फीका कइल, हे मरदे तू ई का कइल और गया शंकर प्रेमी ने चट्टी पर तीन वेर देखले बा माई, तब ना लजइलीं त अब का लजाईं सुनाया। बृजमोहन प्रसाद अनारी ने सुनाया कि बाबूजी गुजरी गइले नान्हें पर मरि गइले, कइसन रहे करम कमाई, ए भाई अबही जीयत बाड़ी अन्हरी माई सुनाकर माहौल का मिजाज ही बदल दिया।
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इस दौरान पूर्व विधायक रामइकबाल सिंह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आज पाकिस्तान से अधिक खतरा अपने घर में है। बार्डर पर एक जवान मरता है तो सभी दु:खी होते, लेकिन मोटी पगार लेने वाले चिकित्सकों की लापरवाही से हजारों जान जाती है तो सिर्फ मां रोती है। इस देश में बेटे बिकते हैं और बेटी वाले खरीदते है । यह प्रथा बंद करना जरूरी है। बताया कि सभी मजहब में मां ही देवी -देवता है। जिस घर में नारी का सम्मान होता है वह स्वर्ग हो जाता है।
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सेवा संस्थान की ओर आयोजित मुशायरे व कवि सम्मेलन की शुरूआत मां सरस्वती, स्वामी विवेकानंद व पशुपति पांडेय के चित्र पर फूल माला व दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। कवि सम्मेलन में कुशीनगर से आये फिरोज अश्क लक्ष्मी गंगवी ने मर जाऊं तो दफना देना वतन की मिट्टी में, मेरे कफन पे अजीजों हिन्दुस्तान लिख देना सुनाकर देशभक्ति की भावना जगा दी।
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वहीं बिहार से आये कवि हृदय नारायण ने रंग जमावल फीका कइल, हे मरदे तू ई का कइल और गया शंकर प्रेमी ने चट्टी पर तीन वेर देखले बा माई, तब ना लजइलीं त अब का लजाईं सुनाया। बृजमोहन प्रसाद अनारी ने सुनाया कि बाबूजी गुजरी गइले नान्हें पर मरि गइले, कइसन रहे करम कमाई, ए भाई अबही जीयत बाड़ी अन्हरी माई सुनाकर माहौल का मिजाज ही बदल दिया।
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इस दौरान पूर्व विधायक रामइकबाल सिंह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आज पाकिस्तान से अधिक खतरा अपने घर में है। बार्डर पर एक जवान मरता है तो सभी दु:खी होते, लेकिन मोटी पगार लेने वाले चिकित्सकों की लापरवाही से हजारों जान जाती है तो सिर्फ मां रोती है। इस देश में बेटे बिकते हैं और बेटी वाले खरीदते है । यह प्रथा बंद करना जरूरी है। बताया कि सभी मजहब में मां ही देवी -देवता है। जिस घर में नारी का सम्मान होता है वह स्वर्ग हो जाता है।