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Ballia News: मानदेय बढ़ाने के लिए ज्ञापन सौंपा
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बलिया। 18 वर्ष पहले आज ही के दिन सुप्रीम कोर्ट ने सहायक अध्यापक बने शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द किया था। समायोजन निरस्त होने के बाद मानसिक अवसाद में कई शिक्षामित्र काल के मुंह में समा गए । इनसे दु:खी जिले के शिक्षामित्रों ने शुक्रवार को बीएसए कार्यालय के पास स्थित अध्यापक भवन में श्रद्धांजलि सभा की और फिर कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपा।
उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष पंकज सिंह ने कहा कि उन्हें केवल दस हजार रुपये मानदेय मिल रहा है। इससे परिवार का पालन पोषण नहीं हो पा रहा है। शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रमुख सचिव (बेसिक शिक्षा) की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन 14 नवंबर 2023 को हुआ था। उक्त कमेटी ने कई बैठकें करने के उपरांत अपना प्रस्ताव शासन को भेजा था। उसके तत्काल बाद आदर्श चुनाव संहिता लागू हो गई थी। चुनाव हुए करीब दो वर्ष हो गए हैं, लेकिन कमेटी द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को शासन ने अबतक लागू नहीं किया।
शिक्षामित्रों को प्रदेश सरकार को कम से कम इतनी पगार तो देनी ही चाहिए कि वह सम्मान से जी सकें। उन्होंने मांग किया कि नई शिक्षा नीति में शिक्षामित्रों को स्थाई करते हुए नियमित वेतनमान दिया जाए। वर्तमान में महंगाई को देखते हुए नियमितीकरण होने तक अन्य राज्यों (राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, बिहार) की भांति शिक्षामित्रों को वेतन/ मानदेय दिया जाए। मृतक शिक्षामित्रों के परिवार को आर्थिक सहायता देते हुए परिवार के एक सदस्य को उक्त पद पर समायोजित किया जाए। इस मौके पर परवेज अहमद, अमृत सिंह राकेश पाण्डेय,श्यामनंदन मिश्रा, लालजी वर्मा, वसीम अहमद, राजेश प्रजापति आदि मौजूद रहे। सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष सूर्यनाथ राम व संचालन जिला प्रवक्ता निर्भय नारायण राय ने किया।
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उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष पंकज सिंह ने कहा कि उन्हें केवल दस हजार रुपये मानदेय मिल रहा है। इससे परिवार का पालन पोषण नहीं हो पा रहा है। शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रमुख सचिव (बेसिक शिक्षा) की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन 14 नवंबर 2023 को हुआ था। उक्त कमेटी ने कई बैठकें करने के उपरांत अपना प्रस्ताव शासन को भेजा था। उसके तत्काल बाद आदर्श चुनाव संहिता लागू हो गई थी। चुनाव हुए करीब दो वर्ष हो गए हैं, लेकिन कमेटी द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को शासन ने अबतक लागू नहीं किया।
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शिक्षामित्रों को प्रदेश सरकार को कम से कम इतनी पगार तो देनी ही चाहिए कि वह सम्मान से जी सकें। उन्होंने मांग किया कि नई शिक्षा नीति में शिक्षामित्रों को स्थाई करते हुए नियमित वेतनमान दिया जाए। वर्तमान में महंगाई को देखते हुए नियमितीकरण होने तक अन्य राज्यों (राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, बिहार) की भांति शिक्षामित्रों को वेतन/ मानदेय दिया जाए। मृतक शिक्षामित्रों के परिवार को आर्थिक सहायता देते हुए परिवार के एक सदस्य को उक्त पद पर समायोजित किया जाए। इस मौके पर परवेज अहमद, अमृत सिंह राकेश पाण्डेय,श्यामनंदन मिश्रा, लालजी वर्मा, वसीम अहमद, राजेश प्रजापति आदि मौजूद रहे। सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष सूर्यनाथ राम व संचालन जिला प्रवक्ता निर्भय नारायण राय ने किया।
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