मौसम हुआ सुहाना, बादलों ने आसमान में डाला डेरा
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मौसम विभाग पटना ने पहले ही पूर्वानुमान किया था कि इस साल सामान्य से ज्यादा बारिश होगी, लेकिन जून महीना पूरा बीत जाने के बाद बारिश के नामोनिशान न होने से किसान सकते में पड़ गए हैं। नर्सरी डाले हुए 25 दिन से ऊपर बीत गया है, लेकिन पानी के अभाव में अभी भी रोपनी नहीं शुरू हो पाई।
ऐसे में किसानों की मूसलाधार बारिश का इंतजार है। शनिवार को सुबह ही आसमान में बादल डेरा डाले रहे, जिससे मौसम सुहाना जरूर हुआ, लेकिन किसानों के लिए ये बारिश ऊंट के मुहं में जीरा समान लगा। बारिश से गर्मी से कुछ हद तक राहत मिली।
क्षेत्र से मानसून ने मुहं फेर लिया है। गांवों में खरीफ की फसल की बुआई की शुरूआत अभी तक नहीं हो सकी है। किसान एक बरसात की चाहत में हैं। क्षेत्र के मुन छपरा, लक्ष्मीपुर, दल छपरा, खड़ीका, छेड़ी, चौबे छपरा, कंचनपुर, पियरौटा, गायघाट, मुड़ाडीह लगायत दियारांचल तक के दर्जनों गांव के किसान अभी भी खरीफ की फसल नहीं बो पाए हैं। धान की बेहन लगाए किसानों को धान के पौध जिलाने के लिए निरंतर पानी लेना पड़ रहा है। जमीन में नमी के नहीं होने के चलते अरहर तथा मक्का की बुआई भी बाधित है।
एक अच्छी बरसात नहीं होने के कारण किसान परेशान हैं। अब तक मक्का तथा अरहर की बुआई शुरू हो जानी चाहिए थी। लेकिन अवर्षण के कारण खेती किसानी ठप पड़ी हुई है। चारों तरफ सूखे खेत नजर आ रहे हैं, जहां-तहां बेहन लगाया गया है, जो किसी तरह ट्यूबवेल के पानी के बल पर जीवित हैं। यह पानी बहुत खर्चीला पड़ रहा है।
नगर के किसान प्रवीण ओझा दस बीघा धान की खेती के लिए करीब दस कट्ठा में बेहन लगाए हुए हैं। वे बताते हैं कि धान के बेहन को जीवित रखने के लिए चार-चार घंटे के हिसाब से अब तक आठ बार पानी लेना पड़ा है। यह नलकूप का पानी 140 रुपये प्रतिघंटा के हिसाब से मिलता है।
उधर, दस बीघा मक्का बोने वाले नगर के ही बड़े पांडेय ने बताया कि बिना नमी के मक्का या अरहर बोना कठिन है। एक बरसात की अति आवश्यकता है। इसके बाद ही मक्का तथा अरहर बोए जा सकते हैं। बेहन लगाए कई किसान 25 दिन पार कर चुके हैं। इस अवधि के बाद धान की रोपाई होनी चाहिए।
लेकिन सूखा के चलते धान की रोपाई रूकी पड़ी है। भू-गर्भीय पानी का स्तर नीचे खिसक गया है। इसके चलते नलकूप से पानी भी कम आ रहा है। उधर इसके उलट जोते पड़े खेत बिल्कुल तप चुके हैं। किसानों का मानना है कि पानी छोड़ते ही खेत पानी को सोखेंगे। जिसके चलते धान की रोपाई काफी महंगी हो जाएगी।