{"_id":"57a4896e4f1c1bb5602b9e3b","slug":"mangal-pandey-ka-patrik-gaon-upekshit","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज भी उपेक्षित है शहीद मंगल पांडेय का पैतृक गांव नगवां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज भी उपेक्षित है शहीद मंगल पांडेय का पैतृक गांव नगवां
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Fri, 05 Aug 2016 06:11 PM IST
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मंगल पांडे
- फोटो : pti
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जंग-ए-आजादी के महानायक शहीद मंगल पांडेय का पैतृक गांव नगवां आजादी के 70 वर्ष बाद भी विकास से कोसों दूर है। अब तक सरकार ने मंगल पांडेय के गांव के नाम पर विकास की केवल औपचारिकता ही पूरी की है। आलम यह है कि मंगल पांडेय का बना स्मारक अभी भी जर्जर हाल में है, जबकि उनके नाम पर निर्माणाधीन राजकीय महिला महाविद्यालय आठ साल बाद भी तैयार नहीं हो सका है।
महाविद्यालय का संचालन स्मारक के सभागार में 2006 से ही चालू है, जबकि इस गांव को विकास के मामले में शहीद मंगल पांडेय के गरिमा के अनुरूप राष्ट्रीय फलक पर होना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम के महानायक मंगल पांडेय के पैतृक गांव आज भी विकास की बाट जोह रहा है। सरकार द्वारा गांव में अब तक कोई ऐसा कार्य नहीं कराया गया जो मंगल पांडेय के गरिमा के अनुरूप हो।
हालांकि मंगल पांडेय के गांव के लोगों का कहना है कि अंग्रेजों के खिलाफ बगावत करने के बाद गांव में जिस प्रकार कहर टूट पड़ा था, उस दिन की कहानी आज भी बुजुर्गों के जुबानी सुनने को मिलता रहा है। अब तक मंगल पांडेय के गांव नगवां के विकास के लिए 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव मंगल पांडेय के प्रतिमा अनावरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कहा कि क्रांति के महानायक मंगल पांडेय के गांव तथा क्षेत्र का विकास हर हाल में किया जाएगा।
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उसी समय मुलायम सिंह द्वारा नगवां में राजकीय महिला महाविद्यालय और पानी टंकी सहित दर्जनों योजनाओं की घोषणा की थी। लेकिन घोषणा के 10 वर्ष बाद भी राजकीय महिला महाविद्यालय का निर्माण अब भी अधूरा है। जिसके चलते 2006 से ही महिला महाविद्यालय की छात्राएं स्मारक सोसायटी के सभागार में पठन-पाठन करने को बाध्य हैं।
क्षेत्रीय लोगों ने मंगल पांडेय के नाम पर शोध अनुसंधान केंद्र तथा उनके नाम पर कोई बड़ी योजना केंद्र और राज्य सरकार से संचालित करने की मांग कई बार चुके हैं। लेकिन अब तक न तो कोई बड़ी योजना मिली और न ही गांव का विकास आजादी के महानायक मंगल पांडेय के गरिमा के अनुरूप हो सका।
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महाविद्यालय का संचालन स्मारक के सभागार में 2006 से ही चालू है, जबकि इस गांव को विकास के मामले में शहीद मंगल पांडेय के गरिमा के अनुरूप राष्ट्रीय फलक पर होना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम के महानायक मंगल पांडेय के पैतृक गांव आज भी विकास की बाट जोह रहा है। सरकार द्वारा गांव में अब तक कोई ऐसा कार्य नहीं कराया गया जो मंगल पांडेय के गरिमा के अनुरूप हो।
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हालांकि मंगल पांडेय के गांव के लोगों का कहना है कि अंग्रेजों के खिलाफ बगावत करने के बाद गांव में जिस प्रकार कहर टूट पड़ा था, उस दिन की कहानी आज भी बुजुर्गों के जुबानी सुनने को मिलता रहा है। अब तक मंगल पांडेय के गांव नगवां के विकास के लिए 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव मंगल पांडेय के प्रतिमा अनावरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कहा कि क्रांति के महानायक मंगल पांडेय के गांव तथा क्षेत्र का विकास हर हाल में किया जाएगा।
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उसी समय मुलायम सिंह द्वारा नगवां में राजकीय महिला महाविद्यालय और पानी टंकी सहित दर्जनों योजनाओं की घोषणा की थी। लेकिन घोषणा के 10 वर्ष बाद भी राजकीय महिला महाविद्यालय का निर्माण अब भी अधूरा है। जिसके चलते 2006 से ही महिला महाविद्यालय की छात्राएं स्मारक सोसायटी के सभागार में पठन-पाठन करने को बाध्य हैं।
क्षेत्रीय लोगों ने मंगल पांडेय के नाम पर शोध अनुसंधान केंद्र तथा उनके नाम पर कोई बड़ी योजना केंद्र और राज्य सरकार से संचालित करने की मांग कई बार चुके हैं। लेकिन अब तक न तो कोई बड़ी योजना मिली और न ही गांव का विकास आजादी के महानायक मंगल पांडेय के गरिमा के अनुरूप हो सका।