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गायों में फैल रही एलएसडी बीमारी, चिकित्सक व पशुपालक परेशान
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बैरिया। क्षेत्र की गायों में एलएसडी (लंपी स्किन जीसी वायरस) तेजी से फैल रहा है। राजकीय पशु चिकित्सालय बैरिया में 10 दिनों के अंदर इस बीमारी की चपेट में 35 गाय आ चुकी हैं। इनमें से एक की मौत भी हो गई है। पशु चिकित्सालय के कर्मचारियों ने बताया कि प्रतिदिन लगभग दो से तीन गाय इसकी चपेट में आ रही हैं। चिंता की बात ये है कि इस बीमारी से बचाव अथवा उपचार के लिए कोई दवा अथवा टीका उपलब्ध नहीं है। इस रोग से ग्रसित गायों को 7 दिन अथवा 14 दिन आइसोलेट करना पड़ रहा है। यह भी एक संक्रामक बीमरारी है। रोगग्रस्त गायों को आइसोलेट कर इस बीमारी के फैलने से रोक का प्रयास किया जा सकता है।
राजकीय पशु चिकित्सालय बैरिया में तैनात पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके वैश्य ने बताया कि गायों में एलएसडी बीमारी तेजी से फैल रही है। प्रतिदिन दो से तीन गायों में इस बीमारी के लक्षण मिल रहे हैं। इस बीमारी से अपनी गायों के बचाव के लिए पशुपालकों को ठीक वैसी ही व्यवस्था करनी चाहिए, जैसे इस समय लोगों को कोरोना की चपेट में आने से बचाने के लिए की जा रही है। उन्होंने बताया कि बीमारी की चपेट में आने वाली गायों को सात दिन अथवा 14 दिन आइसोलेट करना ही एकमात्र उपाय है। ऐसा नहीं करने पर बीमारी एक से दूसरी गाय में फैलती चली जाएगी। डॉ. वैश्य ने बताया कि आइवरमैक्टिंग का इंजेक्शन लगाने के साथ ही बुखार व सूजन की दवा देकर गाय को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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गायों में फैलने वाली बीघमारी के लक्षण
गाय के शरीर में गिल्टी
गाय को बार-बार बुखार आना
गाय के पैरों में सूजन
गाय का चारा खाना बंद कर देना
पैर में सूजन से गाय का उठ न पाना
तत्काल लें पशु चिकित्सक की सलाह
डॉ. वैश्य ने बताया कि इस बीमारी के लक्षण सबसे अधिक बच्चा देने वाली गाय में मिल रहा है। इस बीमारी की चपेट में आने के बाद गाय के पेट में ही बच्चा मर सकता है या एबॉर्शन हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षण दिखते ही पशुपालक पशु चिकित्सक से संपर्क करें। शुरुआती दौर में गाय को आइसोलेट कर बचाया जा सकता है तथा इस रोग को भी फैलने से रोका जा सकता है।
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राजकीय पशु चिकित्सालय बैरिया में तैनात पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके वैश्य ने बताया कि गायों में एलएसडी बीमारी तेजी से फैल रही है। प्रतिदिन दो से तीन गायों में इस बीमारी के लक्षण मिल रहे हैं। इस बीमारी से अपनी गायों के बचाव के लिए पशुपालकों को ठीक वैसी ही व्यवस्था करनी चाहिए, जैसे इस समय लोगों को कोरोना की चपेट में आने से बचाने के लिए की जा रही है। उन्होंने बताया कि बीमारी की चपेट में आने वाली गायों को सात दिन अथवा 14 दिन आइसोलेट करना ही एकमात्र उपाय है। ऐसा नहीं करने पर बीमारी एक से दूसरी गाय में फैलती चली जाएगी। डॉ. वैश्य ने बताया कि आइवरमैक्टिंग का इंजेक्शन लगाने के साथ ही बुखार व सूजन की दवा देकर गाय को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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गायों में फैलने वाली बीघमारी के लक्षण
गाय के शरीर में गिल्टी
गाय को बार-बार बुखार आना
गाय के पैरों में सूजन
गाय का चारा खाना बंद कर देना
पैर में सूजन से गाय का उठ न पाना
तत्काल लें पशु चिकित्सक की सलाह
डॉ. वैश्य ने बताया कि इस बीमारी के लक्षण सबसे अधिक बच्चा देने वाली गाय में मिल रहा है। इस बीमारी की चपेट में आने के बाद गाय के पेट में ही बच्चा मर सकता है या एबॉर्शन हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षण दिखते ही पशुपालक पशु चिकित्सक से संपर्क करें। शुरुआती दौर में गाय को आइसोलेट कर बचाया जा सकता है तथा इस रोग को भी फैलने से रोका जा सकता है।
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