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बाल गोपाल ने लिया जन्म, मनीं जन्माष्टमी
ब्यूरो,अमर उजाल, बलिया
Updated Thu, 25 Aug 2016 08:35 PM IST
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Lord Krishna wore Jewellery worth rupees 50 crore in Gwalior
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नगर से लेकर ग्रामीणांचलों में गुरुवार को जन्माष्टमी की धूम रही रात के 12 बजते ही बाल गोपाल ने जन्म लिया तो हर ओर महिलाएं सोहर गाने लगीं। इस दौरान मंदिरों और घरों में झांकी सजाई गई। जन्माष्टमी पर श्रद्धालु महिला-पुरुष से लेकर बच्चों तक ने उपवास रखा। इस दौरान कहीं रूप सज्जा प्रतियोगिता तो कहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
नगर से लेकर ग्रामीणांचलों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने के लिए भक्तगण दो दिन पूर्व से ही मंदिर तथा अपने घरों में श्रीकृष्ण की विभिन्न स्वरूपों को झांकी में सजा रहे थे। नगर के पुलिस लाइन, रेलवे के जीआरपी समेत जिले के थानों समेत नगर के विभिन्न स्थानों एवं घरों में सजावट किया गया था।
इसके अलावा नगर से सटे अगरसंडा, मिड्ढा, छाता, शंकरपुर, हरिपुर, घरौली, सहतवार स्थित जानकी ब्रह्म स्थान, पंचमंदिर, शाहपुर, बांसडीह तहसील, रसड़ा तहसील व बैरिया तहसील, सिकंदरपुर तहसील के विभिन्न गांवों के मंदिर व घरों पर श्रीकृष्ण व राधे की विभिन्न स्वरूपों को सजाया गया। प्रभु श्रीकृष्ण के कष्ट को हरने के लिए उनके भक्तगणों ने पूरे दिन उपवास रखा। वहीं कुछ लोगों ने निर्जला व्रत भी रखा। नगर से लेकर ग्रामीणांचलों में मनाए जा रहे जन्माष्टमी के अवसर पर विविध कार्यक्रम आयोजित किया गया। जबकि अधिकांश स्थानों पर भजन-कीर्तन चलता रहा।
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नगर से लेकर ग्रामीणांचलों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने के लिए भक्तगण दो दिन पूर्व से ही मंदिर तथा अपने घरों में श्रीकृष्ण की विभिन्न स्वरूपों को झांकी में सजा रहे थे। नगर के पुलिस लाइन, रेलवे के जीआरपी समेत जिले के थानों समेत नगर के विभिन्न स्थानों एवं घरों में सजावट किया गया था।
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इसके अलावा नगर से सटे अगरसंडा, मिड्ढा, छाता, शंकरपुर, हरिपुर, घरौली, सहतवार स्थित जानकी ब्रह्म स्थान, पंचमंदिर, शाहपुर, बांसडीह तहसील, रसड़ा तहसील व बैरिया तहसील, सिकंदरपुर तहसील के विभिन्न गांवों के मंदिर व घरों पर श्रीकृष्ण व राधे की विभिन्न स्वरूपों को सजाया गया। प्रभु श्रीकृष्ण के कष्ट को हरने के लिए उनके भक्तगणों ने पूरे दिन उपवास रखा। वहीं कुछ लोगों ने निर्जला व्रत भी रखा। नगर से लेकर ग्रामीणांचलों में मनाए जा रहे जन्माष्टमी के अवसर पर विविध कार्यक्रम आयोजित किया गया। जबकि अधिकांश स्थानों पर भजन-कीर्तन चलता रहा।
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