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खाता नहीं तो लौट सकती है आपदा राहत राशि
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Tue, 06 Dec 2016 07:52 PM IST
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disaster
आपदा राहत के लिए शासन ने धनराशि जारी कर दी है, लेकिन भुगतान को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। भुगतान उन्हीं किसानों को होगा, जिनका बैंक में एकाउंट होगा। आपदा राहत का धन सीधे बैंक खाते में भेजने की तैयारी है। एकाउंट उपलब्ध नहीं होने पर सरकार द्वारा भेजी गई राहत राशि वापस हो जाएगी।
गौरतलव हो कि वित्तीय वर्ष 2014-15 अंतर्गत मौसम की मार से प्रभावित किसानों के लिए शासन ने आपदा राहत चेक का वितरण किया। लेकिन इस मद में आवंटित बजट की कमी का रोना रोते हुए योजना का लाभ जनपद को समग्र रूप से नहीं मिल पाया। इस बीच गाए-बगाहे विपक्ष भी इस बात को लेकर मुखर रहा कि सत्ता पक्ष के विधायक व मंत्रियों के इशारों पर जानबूझकर कुछ ही गांव के लोगों को योजना का लाभ पहुंचाया है।
इसको लेकर किसानों द्वारा कई बार धरना प्रदर्शन भी किया गया। सूत्रों की माने तो शासन ने लगभग साढ़े 14 करोड़ की राशि बांसडीह तहसील के किसानों के लिए जारी किया, जिसके तहत कुछ किसानों को आवंटित भी कर दिया गया है। बावजूद किसानों की संख्या को देखते हुए यह राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
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ऐसे में प्रभावितों को आपदा राहत राशि देने के लिए क्षेत्रीय लेखपालों द्वारा किसानों से बैंक एकाउंट और खेत के खसरा की मांग की जा रही है। एकाउंट उपलब्ध नहीं होने पर सरकार द्वारा भेजी गई राहत राशि संभवत 20 दिसंबर के बाद वापस भी जा सकती है। इसको लेकर किसानों में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है।
एसडीएम बांसडीह राधेश्याम पाठक ने बताया कि 20 दिसंबर तक किसानों को अपनी जोती हुई भूमि का खसरा व बैंक अकाउंट संबंधित लेखपाल के यहां जमा कर देना है। ताकि दिसंबर माह में ही राशि का भुगतान संबंधित खातों में किया जा सके। किसानों के बीच आपदा राहत का भुगतान न्यूनतम एक हजार व अधिकतम 4400 तक किया जाना है। आपदा राहत चेक में नए नियमों को लेकर असंतुष्ट भाजपा नेत्री केतकी सिंह ने प्रदेश सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर किसानों को भुखमरी की ओर ढकेल रही है।
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गौरतलव हो कि वित्तीय वर्ष 2014-15 अंतर्गत मौसम की मार से प्रभावित किसानों के लिए शासन ने आपदा राहत चेक का वितरण किया। लेकिन इस मद में आवंटित बजट की कमी का रोना रोते हुए योजना का लाभ जनपद को समग्र रूप से नहीं मिल पाया। इस बीच गाए-बगाहे विपक्ष भी इस बात को लेकर मुखर रहा कि सत्ता पक्ष के विधायक व मंत्रियों के इशारों पर जानबूझकर कुछ ही गांव के लोगों को योजना का लाभ पहुंचाया है।
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इसको लेकर किसानों द्वारा कई बार धरना प्रदर्शन भी किया गया। सूत्रों की माने तो शासन ने लगभग साढ़े 14 करोड़ की राशि बांसडीह तहसील के किसानों के लिए जारी किया, जिसके तहत कुछ किसानों को आवंटित भी कर दिया गया है। बावजूद किसानों की संख्या को देखते हुए यह राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
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ऐसे में प्रभावितों को आपदा राहत राशि देने के लिए क्षेत्रीय लेखपालों द्वारा किसानों से बैंक एकाउंट और खेत के खसरा की मांग की जा रही है। एकाउंट उपलब्ध नहीं होने पर सरकार द्वारा भेजी गई राहत राशि संभवत 20 दिसंबर के बाद वापस भी जा सकती है। इसको लेकर किसानों में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है।
एसडीएम बांसडीह राधेश्याम पाठक ने बताया कि 20 दिसंबर तक किसानों को अपनी जोती हुई भूमि का खसरा व बैंक अकाउंट संबंधित लेखपाल के यहां जमा कर देना है। ताकि दिसंबर माह में ही राशि का भुगतान संबंधित खातों में किया जा सके। किसानों के बीच आपदा राहत का भुगतान न्यूनतम एक हजार व अधिकतम 4400 तक किया जाना है। आपदा राहत चेक में नए नियमों को लेकर असंतुष्ट भाजपा नेत्री केतकी सिंह ने प्रदेश सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर किसानों को भुखमरी की ओर ढकेल रही है।