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नज्मों की बरसात में पूरी रात भीगे श्रोता
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Mon, 28 Mar 2016 08:15 PM IST
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कवि सम्मेलन बलिया
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भगत सिंह के शहादत दिवस के मौके पर 23 मार्च से आयोजित कार्यक्रम के क्रम में रविवार को कस्बा स्थित रामलीला मंच पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इस दौरान प्रदेश के विभिन्न कोने से आए फनकारों ने अपनी पंक्तियों से कभी महफिल को झूमाया तो कभी सोचने पर विवश किया। राजनेताओं पर प्रहार हुआ तो शहीदों को नमन, अल्फाजों की ऐसी बरसात हुई कि रातभर कविता प्रेमी अपनी कुर्सी से टस से मस नहीं हुए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता अवलेश सिंह तथा विशिष्ट अतिथि भाजपा विधायक उपेंद्र तिवारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित व मां सरस्वती को नमन कर कार्यक्रम की शुरूआत कराई। तत्पश्चात प्रसिद्ध कवि सरगम जी ने सरस्वती वंदना वीणा वाली माई, वीणा के तार दी....पेश किया।
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इसके बाद बाराबंकी से आए अंब्रिश अंबर ने भ्रष्टाचार पर अपनी रचना पेश की ...मोदी हो या योगी हो या हो मोहम्मद बुखारी, गले मिले जब आपस में तो भाग खड़े हो भ्रष्टाचारी.....। इसके बाद मिथिलेश गहमरी ने सुनाया धरती पे जलाओ कि गगन में करो रौशन, नफरत की चिरागों से उजाला नहीं होता।
इसी क्रम में कवि बब्बन सिंह ने ..जाति-पाति पर गरीबाें को न नापिए और जाति-पाति पर गरीबों को मत छांटिए....। वहीं हाफिज मस्तान साहब ने देश की शहीदों को नमन करते हुए पेश किया कि ....सीना ताने सीमा पर जो तोपों से लड़ जाते हैं, उसकी गाथा लिखने को अंबर भी छोटे पड़ जाते हैं।
इसके अलावा अमीर दिलकश, रामसोच यादव, गयाशंकर प्रेमी, नंदजी नंदा, शेराज सुल्तानपुरी, अली अहमद संगम, डा. रीता रागिनी, डा. बृजेश सिंह ने एक से बढ़कर एक कविता प्रस्तुत की और रातभर लोगों को कभी गुदगुदाया तो बारिश को भी बेपरवाह बना दिया।
तेज हवाओं के झोंके के बीच पंक्ति की गूंज दूर-दूर तक गूंजती रही। इस मौके पर मोहन सिंह, अमित सिंह कल्लू, मुन्ना चौरसिया, मन्नू सिंह, सरदार अतिकुर्र रहमान, शहनवाज हुसैन, अखिलेश गुप्त, गोकूल प्रसाद, राधा मोहन गुप्त, डा. सुनील यादव आदि रहे। अध्यक्षता सिद्धार्थ नगर के कवि डा. ज्ञानेंद्र द्विवेदी दीपक व संचालन प्रसिद्ध कवि मिथिलेश गहमरी ने किया।
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इस दौरान प्रदेश के विभिन्न कोने से आए फनकारों ने अपनी पंक्तियों से कभी महफिल को झूमाया तो कभी सोचने पर विवश किया। राजनेताओं पर प्रहार हुआ तो शहीदों को नमन, अल्फाजों की ऐसी बरसात हुई कि रातभर कविता प्रेमी अपनी कुर्सी से टस से मस नहीं हुए।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता अवलेश सिंह तथा विशिष्ट अतिथि भाजपा विधायक उपेंद्र तिवारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित व मां सरस्वती को नमन कर कार्यक्रम की शुरूआत कराई। तत्पश्चात प्रसिद्ध कवि सरगम जी ने सरस्वती वंदना वीणा वाली माई, वीणा के तार दी....पेश किया।
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इसके बाद बाराबंकी से आए अंब्रिश अंबर ने भ्रष्टाचार पर अपनी रचना पेश की ...मोदी हो या योगी हो या हो मोहम्मद बुखारी, गले मिले जब आपस में तो भाग खड़े हो भ्रष्टाचारी.....। इसके बाद मिथिलेश गहमरी ने सुनाया धरती पे जलाओ कि गगन में करो रौशन, नफरत की चिरागों से उजाला नहीं होता।
इसी क्रम में कवि बब्बन सिंह ने ..जाति-पाति पर गरीबाें को न नापिए और जाति-पाति पर गरीबों को मत छांटिए....। वहीं हाफिज मस्तान साहब ने देश की शहीदों को नमन करते हुए पेश किया कि ....सीना ताने सीमा पर जो तोपों से लड़ जाते हैं, उसकी गाथा लिखने को अंबर भी छोटे पड़ जाते हैं।
इसके अलावा अमीर दिलकश, रामसोच यादव, गयाशंकर प्रेमी, नंदजी नंदा, शेराज सुल्तानपुरी, अली अहमद संगम, डा. रीता रागिनी, डा. बृजेश सिंह ने एक से बढ़कर एक कविता प्रस्तुत की और रातभर लोगों को कभी गुदगुदाया तो बारिश को भी बेपरवाह बना दिया।
तेज हवाओं के झोंके के बीच पंक्ति की गूंज दूर-दूर तक गूंजती रही। इस मौके पर मोहन सिंह, अमित सिंह कल्लू, मुन्ना चौरसिया, मन्नू सिंह, सरदार अतिकुर्र रहमान, शहनवाज हुसैन, अखिलेश गुप्त, गोकूल प्रसाद, राधा मोहन गुप्त, डा. सुनील यादव आदि रहे। अध्यक्षता सिद्धार्थ नगर के कवि डा. ज्ञानेंद्र द्विवेदी दीपक व संचालन प्रसिद्ध कवि मिथिलेश गहमरी ने किया।