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जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए होगा नामांकन
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बलिया। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के लिए 26 जून को सुबह 11 बजे से तीन बजे तक नामांकन होगा। कलेक्ट्रेट में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच डीएम कोर्ट में नामांकन प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी। दोपहर तीन बजे के बाद नामांकन पत्रों की जांच होगी 29 को नाम वापसी की तारीख तय की गई है, जबकि तीन जुलाई को मतदान होगा। इसी दिन नतीजे भी आ जाएंगे। नामांकन के दिन तक पर्चे लिए जा सकते हैं।
मतदान के समय निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों को अपनी जीत का मूल प्रमाण पत्र दिखाना होगा, तभी उन्हें वोट डालने दिया जाएगा। मतदान और मतगणना की पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में संपन्न होगी। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में उम्मीदवार चार लाख रुपए तक खर्च कर सकेंगे। निर्वाचन आयोग की तरफ तैनात प्रेक्षक इसकी निगरानी करेंगे।
भाजपा और सपा के उम्मीदवार आज करेंगे नामांकन
बलिया। हाल ही में सुभासपा छोड़कर भाजपा में आई सुप्रिया चौधरी ने शुक्रवार को एक सेट में पर्चा खरीदा। जबकि बसपा छोड़कर सपा के उम्मीदवार बनें आनंद चौधरी ने बृहस्पतिवार को पर्चा लिया है। दोनों उम्मीदवार शनिवार को जिलाधिकारी कार्यालय में चुनाव अधिकार के समक्ष अपना पर्चा दाखिल करेंगे।
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बदले समीकरण में किंगमेकर की भूमिका में आई बसपा
- बहुजन समाज पार्टी की चाल पर निर्भर है सपा और भाजपा की जीत
संवाद न्यूज एजेंसी
बलिया। सत्ताधारी दल भाजपा और प्रमुख विपक्षी पार्टी सपा द्वारा अपने पत्ते खोलने के बाद जिले में सियासी समीकरण तेजी से बदल रहा है। एक ओर समाजवादी खेमा अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा है तो दूसरी ओर बसपा का साथ मिलने के बाद भगवा बिग्रेड जिला पंचायत में पहली बार कमल खिलाने की जुगत में जुट गया है। इसके लिए जातिगत और दलगत आधार पर दिग्गजों को साधने का दौर भी तेज हो गया है।
कल तक जिला पंचायत अध्यक्ष के पद को लेकर बहुजन समाज पार्टी का खेमा पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहा था, वह आनंद चौधरी के खेमा बदलकर सपा में जाने के बाद कुछ समय के लिए निराश जरूर हो गया था, लेकिन सुभासपा के समर्थन से वार्ड नं. 48 से जिला पंचायत सदस्य बनीं सुप्रिया चौधरी के भारतीय जनता पार्टी का दामन थामते ही किंगमेकर की भूमिका में आ गया। जानकार बताते है कि पिछले एक सप्ताह के अंदर तेजी से बदले समीकरण ने कई राजनीतिक पंडितों को हैरत में डाल दिया है। ऐसे में बसपा से दलबदल करवा कर आनंद को अपने खेमे में लाने और जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर दोबारा कब्जा करने का सपाना देख रही सपा के लिए भी राह अब आसान नहीं रह गई है। माना जा रहा है कि सपा प्रत्याशी को हराने के लिए बसपा किसी हद तक जा सकती है। वहीं, क्रास वोटिंग को रोकना भी दलों को चुनौती होगी।
बहरहाल, दोनों दल अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरजोर कोशिश कर रहे है, जिसके तहत जिला पंचायत सदस्यों से संपर्क करने और उन्हें अपने पाले में करने की कवायद तेज हो गई है। भाजपा की ओर से दो मंत्रियों, दो सांसदों के अलावा तीन विधायक कमान संभाले है तो दूसरी ओर सपा पांच पूर्व मंत्री और एक विधायक जिपं अध्यक्ष की कुर्सी पर सपा का कब्जा बरकरार रखने जद्दोजहद में जुटे है।
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मतदान के समय निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों को अपनी जीत का मूल प्रमाण पत्र दिखाना होगा, तभी उन्हें वोट डालने दिया जाएगा। मतदान और मतगणना की पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में संपन्न होगी। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में उम्मीदवार चार लाख रुपए तक खर्च कर सकेंगे। निर्वाचन आयोग की तरफ तैनात प्रेक्षक इसकी निगरानी करेंगे।
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भाजपा और सपा के उम्मीदवार आज करेंगे नामांकन
बलिया। हाल ही में सुभासपा छोड़कर भाजपा में आई सुप्रिया चौधरी ने शुक्रवार को एक सेट में पर्चा खरीदा। जबकि बसपा छोड़कर सपा के उम्मीदवार बनें आनंद चौधरी ने बृहस्पतिवार को पर्चा लिया है। दोनों उम्मीदवार शनिवार को जिलाधिकारी कार्यालय में चुनाव अधिकार के समक्ष अपना पर्चा दाखिल करेंगे।
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बदले समीकरण में किंगमेकर की भूमिका में आई बसपा
- बहुजन समाज पार्टी की चाल पर निर्भर है सपा और भाजपा की जीत
संवाद न्यूज एजेंसी
बलिया। सत्ताधारी दल भाजपा और प्रमुख विपक्षी पार्टी सपा द्वारा अपने पत्ते खोलने के बाद जिले में सियासी समीकरण तेजी से बदल रहा है। एक ओर समाजवादी खेमा अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा है तो दूसरी ओर बसपा का साथ मिलने के बाद भगवा बिग्रेड जिला पंचायत में पहली बार कमल खिलाने की जुगत में जुट गया है। इसके लिए जातिगत और दलगत आधार पर दिग्गजों को साधने का दौर भी तेज हो गया है।
कल तक जिला पंचायत अध्यक्ष के पद को लेकर बहुजन समाज पार्टी का खेमा पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहा था, वह आनंद चौधरी के खेमा बदलकर सपा में जाने के बाद कुछ समय के लिए निराश जरूर हो गया था, लेकिन सुभासपा के समर्थन से वार्ड नं. 48 से जिला पंचायत सदस्य बनीं सुप्रिया चौधरी के भारतीय जनता पार्टी का दामन थामते ही किंगमेकर की भूमिका में आ गया। जानकार बताते है कि पिछले एक सप्ताह के अंदर तेजी से बदले समीकरण ने कई राजनीतिक पंडितों को हैरत में डाल दिया है। ऐसे में बसपा से दलबदल करवा कर आनंद को अपने खेमे में लाने और जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर दोबारा कब्जा करने का सपाना देख रही सपा के लिए भी राह अब आसान नहीं रह गई है। माना जा रहा है कि सपा प्रत्याशी को हराने के लिए बसपा किसी हद तक जा सकती है। वहीं, क्रास वोटिंग को रोकना भी दलों को चुनौती होगी।
बहरहाल, दोनों दल अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरजोर कोशिश कर रहे है, जिसके तहत जिला पंचायत सदस्यों से संपर्क करने और उन्हें अपने पाले में करने की कवायद तेज हो गई है। भाजपा की ओर से दो मंत्रियों, दो सांसदों के अलावा तीन विधायक कमान संभाले है तो दूसरी ओर सपा पांच पूर्व मंत्री और एक विधायक जिपं अध्यक्ष की कुर्सी पर सपा का कब्जा बरकरार रखने जद्दोजहद में जुटे है।