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Ballia News: कटहल नाला को ही बना दिया कचरा घर
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बलिया। नगर से गुजर रहे कटहल नाला की सफाई को लेकर सभी प्रयास धरे के धरे रह गए। कटहल नाला का पानी नगर से सटे घाट पर गंगा में गिरता है लेकिन इसकी सफाई को लेकर अफसर उदासीन बने हुए हैं। नाले में कूड़ा कचरा सड़ने के कारण दुर्गंध से लोग परेशान हो रहे हैं।
जिम्मेदारी के न समझने या जानबूझकर लोगों ने पतित पावनी मां गंगा को कचरा ढोने वाली गाड़ी बना दिया है। इसका अंदाजा नगर से गुजर रहे कटहल नाला को देखकर लगाया जा सकता है। इस नाला को ही नगर के लोगों ने कचरा घर मान लिया है और इसके माध्यम से कचरा गंगा में प्रवाहित किया जाता है।
बताया जाता है कि शहर में स्थित घरों से निकलने वाले कचरे को जगह-जगह एकत्र कर नगरपालिका कर्मी वाहनों से ले जाते हैं लेकिन कटहल नाला के किनारे बसी आबादी ने नाला को ही कचरा घर मान कर इसमें ही कूड़ा कचरा फेंक देते हैं, जो गंगा में जाकर गिरता है।
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वर्तमान में कटहल नाला का बहाव सुनिश्चित करने के लिए गंगा किनारे विजईपुर में रेगुलेटर का निर्माण कराया जा रहा है। इसके चलते कटहल नाला का बहाव रुका पड़ा है। इस बीच कटहल नाला में लोग धड़ल्ले से कूड़ा कचरा डाल रहे हैं जो पानी में सड़ने के कारण दुर्गंध देने लगे हैं। दुर्गध से लोगों का राह चलना मुश्किल हो जाता है।
कटहल नाला पुल पर एनएच 31 गुजरता है। बंद वाहनों में चलने वालों को तो नहीं लेकिन पैदल व बाइक से चलने वालों को दुर्गंध के कारण परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं आसपास के मोहल्ला में रहने वाले लोगों को बीमारियां फैलने का भय बना है।
18 किमी लंबे कटहल नाला की सफाई को लेकर एक वर्ष पूर्व कवायद की गई थी। करीब 93 लाख की कार्ययोजना में शुरु से ही सुस्ती बरती गई। एक वर्ष पहले तत्कालीन डीएम ने निरीक्षण के दौरान सफाई कार्य में लापरवाही बरतने पर सिंचाई विभाग की एजेंसी पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद, विभाग की ओर से फर्म पर 3.92 लाख का अर्थदंड लगाते हुए अनुबंध भी निरस्त कर दिया। लेकिन आज भी हालात कमोवेश यही है।
कटहल का बहाव जारी रखने के लिए गंगा के तटवर्ती क्षेत्र विजईपुर में रेगुलेटर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके चलते पानी का बहाव रोका गया है। जल्द ही नाले में जहां-तहां पड़ी गंदगी को भी साफ कराया जाएगा। - सीबी पटेल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग, बलिया
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जिम्मेदारी के न समझने या जानबूझकर लोगों ने पतित पावनी मां गंगा को कचरा ढोने वाली गाड़ी बना दिया है। इसका अंदाजा नगर से गुजर रहे कटहल नाला को देखकर लगाया जा सकता है। इस नाला को ही नगर के लोगों ने कचरा घर मान लिया है और इसके माध्यम से कचरा गंगा में प्रवाहित किया जाता है।
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बताया जाता है कि शहर में स्थित घरों से निकलने वाले कचरे को जगह-जगह एकत्र कर नगरपालिका कर्मी वाहनों से ले जाते हैं लेकिन कटहल नाला के किनारे बसी आबादी ने नाला को ही कचरा घर मान कर इसमें ही कूड़ा कचरा फेंक देते हैं, जो गंगा में जाकर गिरता है।
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वर्तमान में कटहल नाला का बहाव सुनिश्चित करने के लिए गंगा किनारे विजईपुर में रेगुलेटर का निर्माण कराया जा रहा है। इसके चलते कटहल नाला का बहाव रुका पड़ा है। इस बीच कटहल नाला में लोग धड़ल्ले से कूड़ा कचरा डाल रहे हैं जो पानी में सड़ने के कारण दुर्गंध देने लगे हैं। दुर्गध से लोगों का राह चलना मुश्किल हो जाता है।
कटहल नाला पुल पर एनएच 31 गुजरता है। बंद वाहनों में चलने वालों को तो नहीं लेकिन पैदल व बाइक से चलने वालों को दुर्गंध के कारण परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं आसपास के मोहल्ला में रहने वाले लोगों को बीमारियां फैलने का भय बना है।
18 किमी लंबे कटहल नाला की सफाई को लेकर एक वर्ष पूर्व कवायद की गई थी। करीब 93 लाख की कार्ययोजना में शुरु से ही सुस्ती बरती गई। एक वर्ष पहले तत्कालीन डीएम ने निरीक्षण के दौरान सफाई कार्य में लापरवाही बरतने पर सिंचाई विभाग की एजेंसी पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद, विभाग की ओर से फर्म पर 3.92 लाख का अर्थदंड लगाते हुए अनुबंध भी निरस्त कर दिया। लेकिन आज भी हालात कमोवेश यही है।
कटहल का बहाव जारी रखने के लिए गंगा के तटवर्ती क्षेत्र विजईपुर में रेगुलेटर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके चलते पानी का बहाव रोका गया है। जल्द ही नाले में जहां-तहां पड़ी गंदगी को भी साफ कराया जाएगा। - सीबी पटेल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग, बलिया