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कर्बला के मंजर बयान सुने तो रो पड़े अजादार
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Thu, 18 Dec 2014 10:42 PM IST
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अंजुमन हाशिमियां विशुनीपुर की ओर से गमगीन माहौल में चेहल्लुम का जुलूस स्व. मुनीर हसन जैदी इमामबाड़ा से निकाला गया। कदीमी रास्तों से होता हुआ जुलूस विशुनीपुर स्थित शिया मस्जिद पहुंचा। इस दौरान फनसिपहगिरी में युवाओं ने एक से बढ़कर हैरतअंगेज करतब दिखाए। इससे पूर्व हुई मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मुहम्मद अजीम जैरासी ने कर्बला की जंग में इमाम हुसैन और उनके साथियों पर ढाए गए जुल्मों सितम का बयान करते हुए कहा कि कर्बला में दोनों तरफ इस्लाम था।
फर्क इतना था कि एक तरफ वतन से मुहब्बत और रहम के साथ एक दूसरे पर जान कुर्बान करने का जज्बा था और नाना रसूले खुदा के इस्लाम को जीवन देना था तो दूसरी ओर रसूल जादियों का अपमान करना, दूधमुंहे बच्चे की हत्या भूखा, प्यासा रखकर करना थ। कहा कि इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ इंसानियत को बचाने के लिए अपना सिर कटा दिया लेकिन झुकाया नहीं।
इस अवसर पर अंजुमन कारवा मुजफ्फरपुर बिहार के साहिबे बयाज अनवर रजा आलम हैदर अली आबदी ने एक से बढ़कर एक नौहे सुनाए। इसे सुनकर उपस्थित जन समुदाय रोने पर विवश हो गया। इसके बाद अंजुमन हैदरी, जुडन शाहिद गाजीपुर, अंजुमन हाशमिया बलिया ने नौ ख्वानी सीनाजनी और जंजीर मातम करके शोगवारे कर्बला के शहीदों का पूरसा दिया। इस मौके पर मुजबता हुसैन, शाह जैदी, आसिफ जैदी, रवि हैदर, डा. सलीश जैदी, कामयाब आदि का योगदान सराहनीय रहा।
फर्क इतना था कि एक तरफ वतन से मुहब्बत और रहम के साथ एक दूसरे पर जान कुर्बान करने का जज्बा था और नाना रसूले खुदा के इस्लाम को जीवन देना था तो दूसरी ओर रसूल जादियों का अपमान करना, दूधमुंहे बच्चे की हत्या भूखा, प्यासा रखकर करना थ। कहा कि इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ इंसानियत को बचाने के लिए अपना सिर कटा दिया लेकिन झुकाया नहीं।
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इस अवसर पर अंजुमन कारवा मुजफ्फरपुर बिहार के साहिबे बयाज अनवर रजा आलम हैदर अली आबदी ने एक से बढ़कर एक नौहे सुनाए। इसे सुनकर उपस्थित जन समुदाय रोने पर विवश हो गया। इसके बाद अंजुमन हैदरी, जुडन शाहिद गाजीपुर, अंजुमन हाशमिया बलिया ने नौ ख्वानी सीनाजनी और जंजीर मातम करके शोगवारे कर्बला के शहीदों का पूरसा दिया। इस मौके पर मुजबता हुसैन, शाह जैदी, आसिफ जैदी, रवि हैदर, डा. सलीश जैदी, कामयाब आदि का योगदान सराहनीय रहा।
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