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आग का तांडवः 100 झोपड़ियां जलकर खाक, चीख-पुकार के बीच चलता रहा बचाव कार्य; तबाही का मंजर देखते रहे लोग
Fri, 26 Apr 2024 04:38 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Fri, 26 Apr 2024 04:38 PM IST
सार
Ballia News: बड़ी संख्या में लोग आग बुझाने का प्रयास करने लगे, लेकिन आग ने अपना स्वरूप और प्रचंड करते हुए किसी भी प्रयास को नकार कर लगभग पूरी बस्ती को अपने चपेट ले किया। लोगों की वर्षों की मेहनत और कमाई को नष्ट कर दिया।
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तबाही का मंजर देखते रहे लोग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बलिया के बांसडीह कोतवाली क्षेत्र के खेवसर (कुड़िया) यादव बस्ती में शुक्रवार की दोपहर अज्ञात कारणों से लगी भीषण आग में 42 परिवारों की 100 से अधिक झोपड़ियां आग की भेंट चढ़ गईं। हवा इतनी तेज थी कि किसी को कुछ करने का मौका ही नहीं मिला।
आग ने लोगों की वर्षों की मेहनत और कमाई को जलाकर राख कर दिया। दो मवेशी भी आग की चपेट में आकर झुलस गए। फायर ब्रिगेड और दमकल की गाड़ियों ने किसी तरीके से आग पर काबू पाया।
शुक्रवार दोपहर पूरी बस्ती के लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे। इसी बीच बस्ती की एक झोपड़ी से निकलती आग की लपटों को देख लोगों ने शोर मचाना शुरू किया। आग और हवा की जुगलबंदी इतनी तेज थी कि किसी को कुछ करने का मौका नहीं मिला।
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आग तेजी से बढ़ी और कुछ देर में ही एक के बाद एक पूरी बस्ती को अपने चपेट में ले लिया। आग की भयंकर तेजी को देख बस्ती के अन्य परिवार अपने मवेशियों व कीमती सामानों को बचाने में जुट गए।
इनका हुआ नुकसान
अगलगी में शिवशंकर यादव, लक्ष्मण यादव, राजदेव, यदुवीर, राजेंद्र, रमाशंकर, हरिंद्र, हरिशंकर, जनार्दन, शंभू, अनिल, राजकिशोर, सुनील, अर्जुन, सुरेंद्र, बालचंद्र, राजन, रविंद्र, फूलचंद, भोला, दीपक, अनीश, लालचंद, वीरेंद्र, ददन, श्याम बिहारी, चंद्रमा, सतेंद्र, आलोक, प्रवीण, सतीश, पंकज, दीपक, घूरा यादव, बैजनाथ यादव, सुरेश गोंड़, मंटू गोंड़, राजकुमार गोंड़, फुलेश्वर, हरिशंकर राजभर की झोपड़ियां जलकर राक हो गई। उनमें रखा दैनिक जीवन का सभी सामान, बिस्तर, कपड़ा, अनाज, सबकुछ जलकर नष्ट हो गया। अगलगी में हरेंद्र यादव की एक भैंस व एक पड़िया भी झुलस गई।
सूचना पाकर फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंची। उनके व ग्रामीणों के घंटों की मशक्कत से आग तो शांत हुई। घटना के बाद सूचना पाकर मौके पर पहुंचे क्षेत्रीय लेखपाल ने क्षति का आंकलन कर उच्चाधिकारियों को घटना के संबंध में जानकारी दी। अगलगी की खबर पाकर आसपास के गांवों से भी काफी संख्या में लोग घटनास्थल पर एकत्र हो गये थे।
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आग ने लोगों की वर्षों की मेहनत और कमाई को जलाकर राख कर दिया। दो मवेशी भी आग की चपेट में आकर झुलस गए। फायर ब्रिगेड और दमकल की गाड़ियों ने किसी तरीके से आग पर काबू पाया।
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शुक्रवार दोपहर पूरी बस्ती के लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे। इसी बीच बस्ती की एक झोपड़ी से निकलती आग की लपटों को देख लोगों ने शोर मचाना शुरू किया। आग और हवा की जुगलबंदी इतनी तेज थी कि किसी को कुछ करने का मौका नहीं मिला।
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आग तेजी से बढ़ी और कुछ देर में ही एक के बाद एक पूरी बस्ती को अपने चपेट में ले लिया। आग की भयंकर तेजी को देख बस्ती के अन्य परिवार अपने मवेशियों व कीमती सामानों को बचाने में जुट गए।
इनका हुआ नुकसान
अगलगी में शिवशंकर यादव, लक्ष्मण यादव, राजदेव, यदुवीर, राजेंद्र, रमाशंकर, हरिंद्र, हरिशंकर, जनार्दन, शंभू, अनिल, राजकिशोर, सुनील, अर्जुन, सुरेंद्र, बालचंद्र, राजन, रविंद्र, फूलचंद, भोला, दीपक, अनीश, लालचंद, वीरेंद्र, ददन, श्याम बिहारी, चंद्रमा, सतेंद्र, आलोक, प्रवीण, सतीश, पंकज, दीपक, घूरा यादव, बैजनाथ यादव, सुरेश गोंड़, मंटू गोंड़, राजकुमार गोंड़, फुलेश्वर, हरिशंकर राजभर की झोपड़ियां जलकर राक हो गई। उनमें रखा दैनिक जीवन का सभी सामान, बिस्तर, कपड़ा, अनाज, सबकुछ जलकर नष्ट हो गया। अगलगी में हरेंद्र यादव की एक भैंस व एक पड़िया भी झुलस गई।
सूचना पाकर फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंची। उनके व ग्रामीणों के घंटों की मशक्कत से आग तो शांत हुई। घटना के बाद सूचना पाकर मौके पर पहुंचे क्षेत्रीय लेखपाल ने क्षति का आंकलन कर उच्चाधिकारियों को घटना के संबंध में जानकारी दी। अगलगी की खबर पाकर आसपास के गांवों से भी काफी संख्या में लोग घटनास्थल पर एकत्र हो गये थे।