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12 परिवारों के आशियाने जले, बच्चे को बचाने में मां झुलसी
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रामगढ़। राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर बाढ़ कटान से बेघर होकर रह रहे कटान पीड़ितों की रिहायशी झोपड़ियां शनिवार की देर रात हुई अगलगी में जलकर राख हो गई। अगलगी 12 परिवारों के घर गृहस्थी का सारा सामान राख हो गया। वहीं आग बुझाने व बच्चे को बचाने में मां घायल हो गई।
बताया जाता है कि शनिवार की देर रात उदई छपरा निवासी कंठे राम की झोपड़ी से अचानक आग की लपटें उठने लगी। जब तक लोग कुछ समझ पाते की आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते टुनटुन राम, राजेश राम, किशुन राम, दीना राम, नथुनी राम, टुनटुन चौधरी, लालजी चौधरी, सुनील चौधरी, सूरज चौधरी, संजीत चौधरी, शनेश्वर राम, ओम प्रकाश गुप्ता की रिहायशी झोपड़ियां धू-धू कर जल गईं। अगलगी की सूचना पर रविवार की सुबह पहुंचे क्षेत्रीय लेखपाल आकाश सिंह ने पीड़ितों की सूची बनाकर तहसील प्रशासन को सौंप दिया। ग्राम प्रधान गोपालपुर आशा देवी ने रविवार की सुबह पीड़ितों के बीच पहुंचकर तिरपाल उपलब्ध कराया। उधर, आग बुझाने व एक बच्चे को बचाने के प्रयास में टुनटुन चौधरी की पत्नी तारा देवी घायल हो गई। साथ ही सभी पीड़ितों को बर्तन व अन्य घरेलू उपयोग के सामान उपलब्ध कराया और दोपहर का भोजन दिया। इसके अलावा समाजसेवीअंगद मिश्रा फौजी ने भी पीड़ितों के बीच पहुंचकर तिरपाल, कंबल, बाल्टी, लोटा के अलावा चिउरा-गुड़ वितरित किया।
अगलगी के बाद मुंडन संस्कार पर लगा ग्रहण
रामगढ़। दुबे छपरा ढाले पर बाढ़ कटान से बेघर होकर रह रहे पीड़ितों पर अग्निदेव ने शनिवार की देर रात जमकर कहर बरपाया। अगलगी कि इस घटना में नथुनी चौधरी की सारी खुशियां काफूर हो गई। रोते-रोते नथुनी ने बताया कि नाती का मुंडन संस्कार 24 मई को होना था जिसकी तैयारी हो रही थी जो जलकर राख हो गया। अब समझ में नहीं आ रहा है कि नाती का मुंडन संस्कार कैसे होगा।
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काश! पीड़ितों को मिल गई होती जमीन व छप्पर
रामगढ़। वर्ष 2016 में उदई छपरा निवासी इन सभी कटान पीड़ितों का घर गंगा की लहरों में विलीन हो गया। जैसे तैसे ये पीड़ित राष्ट्रीय राजमार्ग 31 के दुबे छपरा ढाले पर तिरपाल के सहारे जीवन यापन कर रहे थे। वर्ष 2020 में अग्निदेव ने तांडव बसाकर इनका सब कुछ नष्ट कर दिया। फिर जैसे-तैसे इनकी गाड़ी अभी पटरी पर आ रही थी कि शनिवार की देर रात आग ने इनका सब कुछ छीन कर दाने दाने के लिए मोहताज कर दिया। इनकी हालत देखकर एनएच 31 से जाने और आने वाले लोग बस यही कह रहे थे कि काश इन पीड़ितों को शासन स्तर से जमीन क्रय कर बसा दिया गया होता तो शायद यह नौबत नहीं आती। वहीं प्रकृति की तीसरी बार मार से इन पीड़ितों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। इस बाबत उप जिलाधिकारी बैरिया प्रशांत कुमार नायक ने बताया कि इन पीड़ितों को जमीन क्रय कर बसाने की योजना चल रही है। मून छपरा में जमीन भी देखा गया है। जल्द ही इन पीड़ितों को जमीन क्रय कर बसाया जाएगा।
जान जोखिम में डालकर मासूम को बचाया
रामगढ़। आखिर मां तो मां ही होती है यह बात तारा देवी ने शनिवार की देर रात दुबे छपरा ढाले पर लगी आग की लहरों में कूदकर अपने नन्हे बच्चे को बचाकर बता दी। बताया जाता है कि जैसे ही आग की लहरें पास के घर से उठनी शुरू हुई सभी लोग अपने सामानों को घर से निकालने में व्यस्त हो गए। तभी तारा देवी को याद आया कि उनका छोटा बच्चा तो चारपाई पर सो रहा है। इसके बाद तारा देवी ने कुछ नहीं देखा आग की लपटों के बीच पहुंच कर अपने मासूम को अपनी जान को जोखिम में डालकर बचा ली। यह दृश्य देखकर हर कोई आश्चर्यचकित हो गया। हालांकि इस दौरान तारा देवी का पैर गंभीर रूप से जख्मी हो गया।
नगदी समेत हजारों का सामान राख
घोघा। बांसडीह कस्बा के वार्ड नंबर तीन में शनिवार की देर शाम अज्ञात कारणों से लगी आग में नगदी के साथ ही घर गृहस्थी का सामान राख हो गया। सूचना पर पहुंचे फायर ब्रिगेड की टीम एवं ग्रामीणों के अथक प्रयास से आग पर काबू पाया गया।
पांडेय के पोखरा स्थित सतपोखर राजभर बस्ती में शनिवार की देर शाम सुखारी राजभर के मड़हे में आग लग गई और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर मड़हे को जलाकर राख कर दिया। पीड़ित ने बताया कि अगलगी में घर गृहस्थी के सामान एवं कुछ दिनों पहले ही दो भैंसों को बेचकर 70 हजार रुपये रखे थे जो आग में जल गए।
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बताया जाता है कि शनिवार की देर रात उदई छपरा निवासी कंठे राम की झोपड़ी से अचानक आग की लपटें उठने लगी। जब तक लोग कुछ समझ पाते की आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते टुनटुन राम, राजेश राम, किशुन राम, दीना राम, नथुनी राम, टुनटुन चौधरी, लालजी चौधरी, सुनील चौधरी, सूरज चौधरी, संजीत चौधरी, शनेश्वर राम, ओम प्रकाश गुप्ता की रिहायशी झोपड़ियां धू-धू कर जल गईं। अगलगी की सूचना पर रविवार की सुबह पहुंचे क्षेत्रीय लेखपाल आकाश सिंह ने पीड़ितों की सूची बनाकर तहसील प्रशासन को सौंप दिया। ग्राम प्रधान गोपालपुर आशा देवी ने रविवार की सुबह पीड़ितों के बीच पहुंचकर तिरपाल उपलब्ध कराया। उधर, आग बुझाने व एक बच्चे को बचाने के प्रयास में टुनटुन चौधरी की पत्नी तारा देवी घायल हो गई। साथ ही सभी पीड़ितों को बर्तन व अन्य घरेलू उपयोग के सामान उपलब्ध कराया और दोपहर का भोजन दिया। इसके अलावा समाजसेवीअंगद मिश्रा फौजी ने भी पीड़ितों के बीच पहुंचकर तिरपाल, कंबल, बाल्टी, लोटा के अलावा चिउरा-गुड़ वितरित किया।
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अगलगी के बाद मुंडन संस्कार पर लगा ग्रहण
रामगढ़। दुबे छपरा ढाले पर बाढ़ कटान से बेघर होकर रह रहे पीड़ितों पर अग्निदेव ने शनिवार की देर रात जमकर कहर बरपाया। अगलगी कि इस घटना में नथुनी चौधरी की सारी खुशियां काफूर हो गई। रोते-रोते नथुनी ने बताया कि नाती का मुंडन संस्कार 24 मई को होना था जिसकी तैयारी हो रही थी जो जलकर राख हो गया। अब समझ में नहीं आ रहा है कि नाती का मुंडन संस्कार कैसे होगा।
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काश! पीड़ितों को मिल गई होती जमीन व छप्पर
रामगढ़। वर्ष 2016 में उदई छपरा निवासी इन सभी कटान पीड़ितों का घर गंगा की लहरों में विलीन हो गया। जैसे तैसे ये पीड़ित राष्ट्रीय राजमार्ग 31 के दुबे छपरा ढाले पर तिरपाल के सहारे जीवन यापन कर रहे थे। वर्ष 2020 में अग्निदेव ने तांडव बसाकर इनका सब कुछ नष्ट कर दिया। फिर जैसे-तैसे इनकी गाड़ी अभी पटरी पर आ रही थी कि शनिवार की देर रात आग ने इनका सब कुछ छीन कर दाने दाने के लिए मोहताज कर दिया। इनकी हालत देखकर एनएच 31 से जाने और आने वाले लोग बस यही कह रहे थे कि काश इन पीड़ितों को शासन स्तर से जमीन क्रय कर बसा दिया गया होता तो शायद यह नौबत नहीं आती। वहीं प्रकृति की तीसरी बार मार से इन पीड़ितों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। इस बाबत उप जिलाधिकारी बैरिया प्रशांत कुमार नायक ने बताया कि इन पीड़ितों को जमीन क्रय कर बसाने की योजना चल रही है। मून छपरा में जमीन भी देखा गया है। जल्द ही इन पीड़ितों को जमीन क्रय कर बसाया जाएगा।
जान जोखिम में डालकर मासूम को बचाया
रामगढ़। आखिर मां तो मां ही होती है यह बात तारा देवी ने शनिवार की देर रात दुबे छपरा ढाले पर लगी आग की लहरों में कूदकर अपने नन्हे बच्चे को बचाकर बता दी। बताया जाता है कि जैसे ही आग की लहरें पास के घर से उठनी शुरू हुई सभी लोग अपने सामानों को घर से निकालने में व्यस्त हो गए। तभी तारा देवी को याद आया कि उनका छोटा बच्चा तो चारपाई पर सो रहा है। इसके बाद तारा देवी ने कुछ नहीं देखा आग की लपटों के बीच पहुंच कर अपने मासूम को अपनी जान को जोखिम में डालकर बचा ली। यह दृश्य देखकर हर कोई आश्चर्यचकित हो गया। हालांकि इस दौरान तारा देवी का पैर गंभीर रूप से जख्मी हो गया।
नगदी समेत हजारों का सामान राख
घोघा। बांसडीह कस्बा के वार्ड नंबर तीन में शनिवार की देर शाम अज्ञात कारणों से लगी आग में नगदी के साथ ही घर गृहस्थी का सामान राख हो गया। सूचना पर पहुंचे फायर ब्रिगेड की टीम एवं ग्रामीणों के अथक प्रयास से आग पर काबू पाया गया।
पांडेय के पोखरा स्थित सतपोखर राजभर बस्ती में शनिवार की देर शाम सुखारी राजभर के मड़हे में आग लग गई और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर मड़हे को जलाकर राख कर दिया। पीड़ित ने बताया कि अगलगी में घर गृहस्थी के सामान एवं कुछ दिनों पहले ही दो भैंसों को बेचकर 70 हजार रुपये रखे थे जो आग में जल गए।