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आधी आबादी तय करेगी प्रत्याशियों का भविष्य
अमर उजाला ब्यूरो /बलिया
Updated Fri, 03 Feb 2017 10:24 PM IST
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समाज में जिस तरह से आधी आबादी हर क्षेत्र में खुलकर सामने आ रही है, उसे देखते हुए कहा जाने लगा है कि विधानसभा चुनाव में भी आधी आबादी की भूमिका अहम होगी। किसी भी प्रत्याशी का भविष्य तय कर सकती है। जनपद के सात विधानसभा क्षेत्रों में कुल मतदाताओं में करीब 45 फीसदी महिला वोटर्स हैं, जो किसी भी प्रत्याशी के सिर पर ताज पहनाने के लिए मुफीद साबित हो सकती हैं। इन महिला वोटर्स की अहमियत इस बार इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि इस बार बनी मतदाता सूची में जुड़े नए नामों में कुल वोटर्स में 55 फीसदी से अधिक महिला वोटर्स हैं।
बलिया जिले के सात विधानसभा सीटों पर महिला मतदाताओं की अहमियत इस चुनाव में खास मायने रखेगा। इसके लिए चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों ने भी खास तैयारी की है। नामांकन होने में चंद दिन ही बचे हैं, ऐसे में घर-घर पैठ बनाने के लिए प्रत्याशी अपने साथ महिला कार्यकर्ता और पार्टी के पदाधिकारियों को भी साथ लेकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं। पार्टी और नेताओं का मानना है कि महिला को एक महिला ही अच्छी तरह से कनवेंस कर सकती है। महिला मतदाताओं की बात की जाए तो सबसे बांसडीह विधानसभा में सबसे अधिक 174555 वोटर्स हैं। इसके अलावा इस बार बनी नई मतदाता सूची में भी पुरुषों के मुकाबले महिला वोटर्स की संख्या अधिक है।
सातों विधानसभा क्षेत्रों की बात की जाए तो कुल बढ़े 82119 वोटर्स में 44661 महिला वोटर्स हैं, जिनका औसत करीब 54 फीसदी है। मतदान के प्रति जिस तरह से कालेज से लेकर गांव तक में प्रशासन और सामाजिक संगठनों द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, उसके मद्देनजर यदि आधी आबादी ने मतदान के अहमियत को समझते हुए अपने मताधिकार का शत प्रतिशत इस्तेमाल कर दिया तो मतदान का परिणाम चौंकाने वाला हो सकता है। मतदान के प्रति महिला वोटर्स अब खुलकर बोलने भी लगी हैं। ऐसे में नहीं लगता कि मतदान देने में वह किसी के दबाव में मतदान करेंगी। महिलाओं में बढ़ी जागरूकता के मद्देनजर विभिन्न राजनीतिक दल के नेता भी अपनी रणनीति बना रहे हैं। महिलाओं को आकर्षित करने के लिए विकास, शिक्षा और उनकी सुरक्षा संबंधी तमाम चुनावी वादे भी किए जा रहे हैं।
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बलिया जिले के सात विधानसभा सीटों पर महिला मतदाताओं की अहमियत इस चुनाव में खास मायने रखेगा। इसके लिए चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों ने भी खास तैयारी की है। नामांकन होने में चंद दिन ही बचे हैं, ऐसे में घर-घर पैठ बनाने के लिए प्रत्याशी अपने साथ महिला कार्यकर्ता और पार्टी के पदाधिकारियों को भी साथ लेकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं। पार्टी और नेताओं का मानना है कि महिला को एक महिला ही अच्छी तरह से कनवेंस कर सकती है। महिला मतदाताओं की बात की जाए तो सबसे बांसडीह विधानसभा में सबसे अधिक 174555 वोटर्स हैं। इसके अलावा इस बार बनी नई मतदाता सूची में भी पुरुषों के मुकाबले महिला वोटर्स की संख्या अधिक है।
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सातों विधानसभा क्षेत्रों की बात की जाए तो कुल बढ़े 82119 वोटर्स में 44661 महिला वोटर्स हैं, जिनका औसत करीब 54 फीसदी है। मतदान के प्रति जिस तरह से कालेज से लेकर गांव तक में प्रशासन और सामाजिक संगठनों द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, उसके मद्देनजर यदि आधी आबादी ने मतदान के अहमियत को समझते हुए अपने मताधिकार का शत प्रतिशत इस्तेमाल कर दिया तो मतदान का परिणाम चौंकाने वाला हो सकता है। मतदान के प्रति महिला वोटर्स अब खुलकर बोलने भी लगी हैं। ऐसे में नहीं लगता कि मतदान देने में वह किसी के दबाव में मतदान करेंगी। महिलाओं में बढ़ी जागरूकता के मद्देनजर विभिन्न राजनीतिक दल के नेता भी अपनी रणनीति बना रहे हैं। महिलाओं को आकर्षित करने के लिए विकास, शिक्षा और उनकी सुरक्षा संबंधी तमाम चुनावी वादे भी किए जा रहे हैं।
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