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Ballia News: 2016 के उच्चतम स्तर से 56 सेमी पहले गंगा का जलस्तर स्थिर

Tue, 05 Aug 2025 11:32 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 05 Aug 2025 11:32 PM IST
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Ganga water level stable at 56 cm below the highest level of 2016
लालगंज क्षेत्र के हृदयपुर गांव में जिला प्रशासन द्वारा नाव न उपलब्ध कराने के कारण जान जो​खिम डा - फोटो : संवाद
बलिया/मझौंवां। गंगा का जलस्तर नौ दिनों तक उफान के बाद मंगलवार की शाम जलस्तर 2016 के उच्चतम स्तर 56 सेंमीमीटर से पहले स्थिर हो गया है। गंगा के स्थिर होने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में दुश्वारियां कायम है। कटहल नाला समेत अन्य नालों से बाढ़ का पानी शहर के अंदर प्रवेश होने से कई मोहल्ले के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बाढ़ क्षेत्र का दौरा करते हुए अधिकारियों को समय से बाढ़ पीड़ितों को मदद पहुंचाने का निर्देश दिया। वहीं, बिजली न होने से दूबे छपरा पोस्ट आफिस का कार्य बंद पड़ा हुआ है। दुकानों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाने से कारोबारियों का रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है।
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गंगा की लहरें हाई फ्लड लेवल 60.390 मीटर के करीब है। नदी और हाई फ्लड लेबल के बीच का फासला 56 सेंटीमीटर ही है। गायघाट गेज पर मंगलवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 59.830 मीटर रिकार्ड किया गया। फिलहाल नदी का जलस्तर स्थिर है। यहां चेतावनी बिंदु 56.615 हैं। खतरा बिन्दु 57.615 मीटर व मीडियम फ्लड लेबल 58.615 मीटर है। गंगा नदी इस समय खतरा बिन्दु से 2.215 मीटर ऊपर बह रही है। यहां 2016 में सर्वाधिक जलस्तर 60.390 मीटर रिकाॅर्ड किया गया था। 2021 में नदी 60.250 मीटर तक था। बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि शाम चार बजे से गंगा जलस्तर स्थिर हो गया है।
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कटान से गंगा की लहरों में समाए दो मकान : मझौवां। गंगा की कटान से उदई छपरा निवासी सुनील उपाध्याय का मकान पलक झपकते ही नदी में समा गया।
माल्देपुर राहत केंद्र खुला, सुविधाएं गायब : सागरपाली। विकास खंड हनुमानगंज के ग्राम पंचायत माल्देपुर गांव के निचले बस्ती में बाढ़ के पानी प्रवेश करने से लगभग दर्जनों घर के लोग परेशान हो रहे हैं। कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय माल्देपुर पर बाढ़ शरणार्थियों के लिए ठहरने का स्थान बना है। पीड़ित सतन पासवान, प्रदीप कुमार, नवरत्न यादव, शिवरतनी सहित आदि का कहना है कि विद्यालय में हम लोग शरण तो ले लिए हैं पर जिला प्रशासन की तरफ से कोई सुविधा अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई है। बाढ़ से 20 विद्यालयों को पहुंची क्षति : दया छपरा। गंगा की बाढ़ से शिक्षण संस्थानों को भी व्यापक क्षति पहुंचाई है। 20 से अधिक प्राथमिक और उच्च विद्यालय, इंटर काॅलेज, डिग्री काॅलेज बाढ़ में जलमग्न हैं।
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पीएन इंटर काॅलेज, दूबेछपरा के प्रधानाचार्य सुधांशु मिश्र ने बताया कि इस आपदा के कारण विद्यालय में व्यापक क्षति हुई है। उमरगंज प्रेमचक में घुसा बाढ़ का पानी, डूबे घर : शहर के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से कई घर लबालब हो गए हैं। कटहलनाला समेत अन्य नालों से पानी घरों के अंदर पहुंच गया है। उमरगंज प्रेेमचक गांव में कटहलनाला का पानी प्रवेश कर गया। लगभग 35 परिवारों के सामने कई तरह का संकट खड़ा हो गया है। पीड़ितों का कहना है कि कटहल नाले की ऊंचाई कम होने से पानी ऊपर हो गया है। मकानों के अंडर अंडर ग्राउंड में भी पानी चला गया है। लगभग पांच मकानों को लोग खाली कर दूसरी जगह शरण ली है। वहीं, सीआरओ ने हल्दी के दक्षिण बाढ़ से डूबे एकौना,बजरहा, उदवत छपरा, हल्दी, भरसौता, सुल्तानपुर, नंदपुर, हरिहरपुर, बहादुरपुर, ओझवलिया गांव का दौरा किया।
बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे परिवहन मंत्री

मझौवां। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। राष्ट्रीय राजमार्ग-31 हुकुम छपरा किमी 26.250 का निरीक्षण करने के बाद मोटर बोट से दूबे छपरा, गोपालपुर, उदई छ्परा व गंगा नदी के दक्षिण दिशा में स्थित भुआल छपरा, चक्की नौरंगा में पीड़ितों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। उन्होंने प्रशासन से भी स्थिति का निपटने के लिए निर्देश दिए, ताकि तत्काल राहत कार्य सुनिश्चित किए जा सकें।

मुरारपट्टी न्याय पंचायत बना टापू : लालगंज। गंगा के बढ़ाव से न्याय पंचायत मुरारपट्टी के पांचों पंचायत की दर्जन भर पुरवा के लगभग तीस हजार की आबादी को चारों तरफ पानी घिर गई है। गड़ेरिया, दामोदरपुर, हृदयपुर, बहुआरा आंशिक, शिवपुर कपूर दियर सहित दर्जन भरपुरवा चारों पानी ही पानी नजर आ रहा है। बाढ़ चौकी पर कोई सुविधा नहीं है।
75 प्रतिशत पीड़ित अभी भी गांव में फंसे

मझौवां। गंगा की लहरें इस बार प्रचंड हो गई हैं। तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ ने हजारों लोगों की जिंदगियों को संकट में डाल दिया है। सुरक्षित जगहों पर हजारों पीड़ित तिरपाल के नीचे सड़क किनारे शरण लिए हुए हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि लाखों की आबादी पानी से घिरी हुई है। इस प्रलयकारी स्थिति ने 60 हजार से अधिक लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। प्रशासन के तरफ से जो भी राहत सामग्री वितरित की जा रही है, वह राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर जो लोग प्लास्टिक के तिरपाल तले जीवन यापन कर रहे है। 75 प्रतिशत लोग गांव के अंदर फंसे हुए हैं।

सरयू के जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी

बेल्थरारोड। पिछले कई दिनों से सरयू नदी की जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला जारी रहने के बाद नदी का पानी खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, जिससे बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार मंगलवार की शाम की जलस्तर 63.54 मीटर दर्ज किया गया, जो लाल निशान 64.01 मीटर से 47 सेंटीमीटर कम है। खतरे के निशान से आधा मीटर से नीचे बहने वाली नदी के तेवर तल्ख हो गए हैं। आयोग का कहना है कि एक-एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। पिछले 24 घंटे के दौरान जलस्तर में 18 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी तरह जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी रहा तो अगले 48 घंटे में नदी का पानी खतरे के निशान तक पहुंच जाएगा। जलस्तर में वृद्धि से तुर्तीपार बाढ़ के पानी से घिर गया है। हाहानाला राजभर बस्ती तक नदी का पानी पहुंच गया है। तटवर्ती क्षेत्रों में पानी फैल गया है। संवाद
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