गंगा में समाया पांच बीघा खेत
द्वाबा के बाशिंदों में अब यह टीस उभरने लगी है कि आखिर बाढ़ व कटान से उन्हें निजात कब मिलेगी। बाढ़ व कटान से इस साल चौबेछपरा व श्रीनगर का अस्तित्व मिट गया। कुछ लोग बचे भी रहे तो सोहरा कटान के भय से घरों को उजाड़ने में जुटे हुए हैं। बुधवार को गंगा की लहरों ने खेत काटे। इसके चलते गंगापुर से लेकर उदईछपरा तक करीब पॉंच बीघे जमीन गंगा में समाहित हो गया और गंगा नदी बस्ती के समीप पहुंचकर फिर एक बार तबाही मचाने को आतुर दिख रही है।
सोहरा कटान के खौफ से उदईछपरा में भी लोग अपने घरों को उजाड़ने व सामानों को सुरक्षित ठौर देने में जुट गए हैं। बाढ़ विभाग की उदासीनता का आलम यह है कि पहले तो धन न होने का रोना रोया अब जलस्तर तलहठी में गिरने के बाद काम शुरू कराने का आश्वासन दे रहे है। लोगों का कहना है कि लगता एक तरफ केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक विकास की गंगा बहाने की बात हो रही है लेकिन सच्चाई तो यह है कि आज भी द्वाबा के लोग बाढ़ व कटान के दंश से बेघर होकर एनएच 31 व टीएस बंधों पर रहने के लिए बाध्य होते चले जा रहे है ।