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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   Ganga and Saryu rivers in spate; over 40 villages at risk; Sudhar-Udai Chhapra surrounded by floodwaters.

Ballia News: गंगा-सरयू की धारा उफनाई, 40 से अधिक गांव खतरे में, सुधर-उदई छपरा बाढ़ से घिरे

Thu, 01 Oct 2026 01:42 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 01 Oct 2026 01:42 AM IST
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Ganga and Saryu rivers in spate; over 40 villages at risk; Sudhar-Udai Chhapra surrounded by floodwaters.
सरयू नदी के बाढ़ से पानी से ​घिरा बैरिया क्षेत्र के गोपालनगर टाड़ी गांव में लोगों के घर। जागरुक
बलिया/मझौवां। जिले में लगातार तीन दिनों से गंगा व सरयू के जलस्तर में लगातार बढ़ाव जारी है। बुधवार को दोनों नदियों के जलस्तर में एक-एक सेमी प्रतिघंटे बढ़ाव दर्ज हुआ। तटवर्ती 40 से ज्यादा गांवों पर कटान का खतरा है।
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सुघर छपरा और उदई छपरा की बस्तियों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। प्राथमिक विद्यालय सुघर छपरा और उच्च प्राथमिक विद्यालय केहरपुर भी बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। सुघर छपरा गांव को जाने वाले संपर्क मार्ग पर घुटने तक पानी भर जाने से ग्रामीणों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मझौवां, धरमपुरा, मझौवां, डांगरबाद, बेलहरी, प्रबोधपुर, गरया, रुद्रपुर, शुक्ल छपरा के बस्तियों में बाढ़ का प्रवेश कर चुका है। राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के दक्षिणी किनारे गायघाट से लेकर दूबे छपरा रिंग बंधे तक बाढ़ का पानी फैल चुका है। केहरपुर स्थित निर्माणाधीन ट्रीटमेंट प्लांट भी बाढ़ की चपेट में आ गया है। गायघाट गेज पर बुधवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 58.580 मीटर दर्ज किया गया। नदी के जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार बढ़ोतरी हो रही है। गंगा खतरे के बिंदु 57.615 मीटर लगभग एक मीटर ऊपर बह रही है।
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उधर बेल्थरारोड में लाल निशान से 78 सेंटीमीटर ऊपर बहने वाली सरयू नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बुधवार की शाम जलस्तर 64.79 मीटर दर्ज किया गया, जबकि लाल निशान 64.01 मीटर है। पिछले 24 घंटे में 19 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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इन गांवों पर मंडराने लगा बाढ़ का खतरा
मझौवां। जिले में बाढ़ का संकट एक बार फिर गहरा गया है, जिसमें मुख्य रूप से दूबे छपरा ,गोपालपुर, उदई छपरा, प्रसाद छपरा, आलम राय के टोला, बड़का व छोटका बुधनचक, मठिया, मुरली छपरा, जगदेवा, पाण्डेयपुर, मिश्र के मठिया, चिन्तामणी राय के टोला, गुदरी राय के टोला, वंश गोपाल छपरा, नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की, उपाध्याय टोला, शतिघाट, भुसौला सहित चार दर्जन गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराता नजर आ रहा है। अगर नदी का जलस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो अगले 24 घंटे में 35 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित हो सकती है।
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कटानरोधी कार्य गुणवत्ता पर सवाल
मझौवां। नौरंगा-भुआल छपरा में करोड़ों रुपये की लागत से कराए गए कटानरोधी कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। कई स्थानों पर पीचिंग बैठने लगी है। नौरंगा में 24.97 करोड़ रुपये की लागत से 2600 मीटर लम्बाई में कटानरोधी कार्य कराया गया था। इसमें 300 मीटर पर 18 कटर बनाए गए, जबकि शेष 2300 मीटर में पार्कोंपाइन विधि से त्रिकोणीय संरचनाओं का निर्माण कराया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि पार्कोंपाइन कार्य गंगा की तेज धारा का दबाव नहीं झेल सकीं। अब तक करीब 75 फीसदी त्रिकोणीय संरचनाएं गंगा की तेज लहरों में समाहित हो चुकी हैं। चक्की नौरंगा में 315 मीटर पर 9.98 करोड़ रुपये की लागत से बोल्डर पीचिंग और हिट ट्रैकिंग का कार्य कराया गया था। चक्की नौरंगा के ग्रामीण अखिलेश ठाकुर, संजय ठाकुर, रवींद्र ठाकुर, अभिनंदन ठाकुर ने बताया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कटानरोधी कार्य नदी के सामने कमजोर पड़ने लगा है।
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वर्जन--
बारिश के कारण नदी का वाटर लेवल बढ़ोतरी पर है, लेकिन स्थिति जल्द ही सामान्य हो जायेगी। फिलहाल आबादी वाले क्षेत्रों में कहीं भी कटान की स्थिति नहीं बनी है। तटबंधों पर लगातार नजर रखी जा रही है। डेंजर प्वाइंट पर जेई को निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की स्थिति उत्पन्न होने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
-संजय कुमार मिश्र, एक्सईएन, बाढ़ खंड
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सरयू के जलस्तर से फिर डूबा दियरांचल, गोपालनगर टांड़ी समेत कई गांवों में घुसा पानी
बैरिया। एक माह तक बाढ़ की विभीषिका झेलने के बाद सुरेमनपुर दियरांचल के ग्रामीणों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दियरांचल के कई गांवों में बाढ़ का पानी दोबारा फैलने लगा है। गोपालनगर टांड़ी में बुधवार को दो दर्जन से अधिक घरों में पानी घुस गया, जिससे ग्रामीण परिवार और मवेशियों के साथ ऊंचाई वाली सड़कों पर शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। बुधवार को गोपालनगर टांड़ी के गणेश यादव, मुखराम यादव, बाबूराम यादव, रामनरेश यादव, कमलेश यादव, अशोक यादव समेत दो दर्जन से अधिक लोगों के घरों में बाढ़ का पानी पहुंच गया। गोपालनगर टांड़ी के अलावा वशिष्ठ नगर, धूपनाथ के डेरा, बैज के डेरा और शिवाल मठिया में भी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उप जिलाधिकारी बैरिया रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि क्षेत्रीय लेखपाल की ओर से बाढ़ की स्थिति के संबंध में अभी तक कोई सूचना या रिपोर्ट नहीं दी गई है। कहा कि जो भी जरूरी होगा, प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों को सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

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खेतों में फैलने लगा बाढ़ का पानी, किसानों को रबी की बुवाई की चिंता
दया छपरा। तीसरी बार गंगा नदी में आई बाढ़ से ग्राम पंचायत गोपालपुर की उदई छपरा हरिजन बस्ती में पानी घुस गया है। दया छपरा में सिंचाई विभाग के बांध से होकर बाढ़ का पानी बुधन चक को चारों तरफ से घेर चुका है। किसानों के माथे पर रबी की फसल को लेकर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। किसानों का कहना है कि पहले आई गंगा की बाढ़ में सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई। बची-खुची फसल चक्रवाती तूफान की भेंट चढ़ गई। ऐसे में रबी की बुवाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों के अनुसार अभी करीब 50 एकड़ खेतों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है।
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सरयू का बढ़ता जलस्तर, तुर्तीपार श्मशान घाट के चारों तरफ भरा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
चौकियामोड़। सरयू नदी का बढ़ता जलस्तर अब तटवर्ती इलाकों के साथ तुर्तीपार श्मशान घाट के लिए भी चुनौती बन गया है। जलस्तर बढ़ने से श्मशान घाट के चारों तरफ पानी भर गया है। नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो लोगों के सामने शवों के अंतिम संस्कार की भी मुश्किल खड़ी हो सकती है। तुर्तीपार श्मशान घाट के समीप करीब 150 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगाए गए पौधों में से लगभग .75 हेक्टेयर क्षेत्र में नदी का पानी घुस गया है। वन विभाग में तैनात माली हरिशंकर प्रजापति ने बताया कि पानी भरने से करीब 70 हजार पौधे प्रभावित हुए हैं।


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एसडीएम ने कटान क्षेत्र का किया निरीक्षण
बेल्थरारोड। एसडीएम शरद चौधरी ने बुधवार को सरयू नदी के तटवर्ती तुर्तीलार मल्लाह बिन्द टोला के पास हो रहे कटान का निरीक्षण किया। एसडीएम ने कटान से रोकथाम के लिए बाढ़ विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्र में डाली जा रही बालू की बोरियों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम के निर्देश पर मंगलवार से बाढ़ विभाग द्वारा मल्लाह बिन्द टोला के कटान वाले क्षेत्र में बालू की बोरियां डाली जा रही हैं। बुधवार को भी बोरियों के डालने का कार्य जारी रहा। ऐसे में, उम्मीद है कि प्रशासन द्वारा फौरी कार्रवाई करते हुए राहत कार्य शुरू करा दिए जाने से टोला के अस्तित्व का संभावित खतरा टल जाएगा। ब्लॉक प्रमुख आलोक कुमार सिंह ने मौके का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति का जायजा लिया।

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एक रेगुलेटर बंद न होने से होने लगा रिसाव, ग्रामीण चितिंत
घोघा। बांसडीह क्षेत्र के जयनगर-पर्वतपुर स्थित रेगुलेटर का गेट समय से बंद नहीं हो पाने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पिछले दो दिनों से रेगुलेटर का एक गेट पूरी तरह बंद नहीं हो सका है और उससे पानी आबादी एवं कृषि क्षेत्रों की ओर रिसाव कर रहा है।बुधवार देर रात पानी का बहाव तेज होने और रेगुलेटर से पानी निकलने की जानकारी मिलने पर स्थानीय ग्रामीणों ने इसकी सूचना उप जिलाधिकारी बांसडीह को दी। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में रेगुलेटर का गेट बंद कराने का प्रयास शुरू किया गया। काफी मशक्कत और जेसीबी के दबाव के बाद चार गेटों में से तीन को बंद कर दिया गया, जबकि एक गेट अभी भी थोड़ा खुला हुआ है। उसे बंद करने के लिए मौके पर बालू की बोरियां, बांस-बल्लियां तथा अन्य सामग्री लगाकर पानी के बहाव को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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