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85 करोड़ का प्रोजेक्ट खारिज, लोगों में रोष

Fri, 10 Jan 2020 10:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jan 2020 10:42 PM IST
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Fury over the Rs 85 crore project being rejected
रामगढ़। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से रामगढ़ के गंगापुर से लेकर केहरपुर तक 85 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाकर शासन में भेजा था जिसे स्थायी संचालन समिति ने इसे खारिज कर दिया है। इसकी भनक लगते ही गंगा के किनारे बसे गांवों के लोगों ने रोष जताया है। कटान पीड़ितों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उदासीनता बरतने का आरोप लगाते हुए चेताया कि अगर समय रहते बाढ़ विभाग ने कटान रोकने का ठोस उपाय नहीं किया तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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बीते वर्ष गंगा की बाढ़ से गंगापुर में सुनार टोला के सामने बहादुर बाबा का स्थान गंगा में समाहित हो गया था। केहरपुर में भी कटान हुई। केहरपुर में कुच घर गंगा में समाहित हो गए थे। उस दौरान मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया था कि इस बार समय रहते प्रोजेक्ट बनाकर शासन में भेजा जाएगा। ताकि बाढ़ कटान से स्थाई निदान दिलाया जा सके। समाज सेवी रिंकू गुप्ता का कहना है कि जन प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते स्थायी संचालन समिति लखनऊ से गंगापुर व केहरपुर का प्रोजेक्ट खारिज हो गया है। वीरेंद्र सेठ ने कहा कि आखिर कब तक वे बाढ़ कटान का दंश झेलते रहेंगे। क्या संजय कुमार ने कहा कि प्रोजेक्ट खारिज होने के बाद हम पीड़ितों में मायूसी छा गई है। अंकित गुप्ता का कहना है कि आज जो हालात पैदा हुआ है इसके लिए बाढ़ विभाग से लेकर जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों जिम्मेदार है। जिससे आने वाला समय भयावह होगा। कहा कि हम अपने गांव के अस्तित्व को बचाने के लिये किसी भी हद की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं और कभी भी सड़क पर उतर सकते हैं।
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उल्लेखनीय है कि कटान से बचाव का प्रोजेक्ट खारिज होने के बाद बंधे के उत्तर दिशा में बसे दर्जनों गांव के लोग परेशान हैं। लोगों का कहना है कि बाढ़ विभाग की एक छोटी सी गलती कही बड़ी तबाही में न डाल दे। अगर भविष्य में बाढ़ आई तो बंधे के उत्तर दिशा में बसे गांव रामपुर, रामगढ़, बलिहार, नवका गांव, दिघार, छेड़ी, पियरौता आदि सहित दर्जनों गांवों का अस्तित्व मिट जाएगा।
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