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भट्ठी पर रोक,अब कैसे चलेगा धंधा
अमर उजाला ब्यूरो /बलिया
Updated Sun, 22 Jan 2017 10:16 PM IST
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शासन ने निर्देश जारी कर होटल और रेस्टोरेंट में कोयला और केरोसिन को प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही निर्देश का अवहेलना करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। ऐसे में कोयले और केरोसिन का उपयोग करने वाले रोस्टोरेंट एवं होटल संचालकों के साथ ही भट्ठी पर चाय बनाने वाले दूकानदारों की परेशानियां बढ़ गई हैं। प्रतिबंध के बाद भी रविवार को कुछ दूकानों पर कोयले जलते नजर आए।
कस्बे में चाय नाश्ता की दूकान संचालक नन्हक साह का कहना है कि 40 किलो कोयले का मूल्य 440 रुपये है। जिस से एक सप्ताह तक हमारा काम चल जाता है। वहीं एक सिलेंडर का सरकारी रेट 659 रुपये है, ब्लैक में 800 रुपये में मिलता है। एक सिलेंडर पांच दिन से ज्यादा नहीं चल पाएगा, जिससे हमारा रोजगार काफी महंगा हो जाएगा। इसलिए या तो मजबूरी में कोयला ही जलाना पड़ेगा, या धंधा बंद कर देना होगा।
कस्बा में होटल चलाने वाले कमलेश का कहना कि कोयले के मुकाबल गैस काफी महंगी पड़ेगी। जब हमें कुछ फायदा ही नहीं होगा तो धंधा चलाने से क्या मतलब। बड़े-बड़े होटलों में खाने की कीमत बहुत अधिक होती हैं इसलिए उन्हें तो वाजिब से भी काफी ज्यादा मिल जाता है। लेकिन हम छोटे-छोटे दूकानदार किफायती दर पर खाना खिलाते है, इसलिए हमारा धंधा चौपट हो जाएगा। चाय-नाश्ते के दूकानदार सुनील का कहना है प्रदेश सरकार हो या केंद्र सरकार, हमारे जैसे गरीब छोटे दूकानदारों पर ही उनका कानून लागू होता है। हम अपना किसी तरह धंधा चलाकर परिवार चलाते हैं। लेकिन अब कोयले पर प्रतिबंध लग जाने से हमारे परिवार के जीविकापार्जन पर संकट गहरा जाएगा।
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बैरिया कस्बे में मिठाई दूूकान का संचालन करने वाले हरिशंकर प्रसाद का कहना है कि हमारा धंधा कानून के लागू होने से बंद हो जाएगा। कारण की गैस सिलेंडर महंगा पड़ेगा। ऐसे में हम लोगों का धन्धा बंद हो सकता है। सरकार की यह नीति गरीबविरोधी है।
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कस्बे में चाय नाश्ता की दूकान संचालक नन्हक साह का कहना है कि 40 किलो कोयले का मूल्य 440 रुपये है। जिस से एक सप्ताह तक हमारा काम चल जाता है। वहीं एक सिलेंडर का सरकारी रेट 659 रुपये है, ब्लैक में 800 रुपये में मिलता है। एक सिलेंडर पांच दिन से ज्यादा नहीं चल पाएगा, जिससे हमारा रोजगार काफी महंगा हो जाएगा। इसलिए या तो मजबूरी में कोयला ही जलाना पड़ेगा, या धंधा बंद कर देना होगा।
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कस्बा में होटल चलाने वाले कमलेश का कहना कि कोयले के मुकाबल गैस काफी महंगी पड़ेगी। जब हमें कुछ फायदा ही नहीं होगा तो धंधा चलाने से क्या मतलब। बड़े-बड़े होटलों में खाने की कीमत बहुत अधिक होती हैं इसलिए उन्हें तो वाजिब से भी काफी ज्यादा मिल जाता है। लेकिन हम छोटे-छोटे दूकानदार किफायती दर पर खाना खिलाते है, इसलिए हमारा धंधा चौपट हो जाएगा। चाय-नाश्ते के दूकानदार सुनील का कहना है प्रदेश सरकार हो या केंद्र सरकार, हमारे जैसे गरीब छोटे दूकानदारों पर ही उनका कानून लागू होता है। हम अपना किसी तरह धंधा चलाकर परिवार चलाते हैं। लेकिन अब कोयले पर प्रतिबंध लग जाने से हमारे परिवार के जीविकापार्जन पर संकट गहरा जाएगा।
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बैरिया कस्बे में मिठाई दूूकान का संचालन करने वाले हरिशंकर प्रसाद का कहना है कि हमारा धंधा कानून के लागू होने से बंद हो जाएगा। कारण की गैस सिलेंडर महंगा पड़ेगा। ऐसे में हम लोगों का धन्धा बंद हो सकता है। सरकार की यह नीति गरीबविरोधी है।