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Ballia News: बाढ़ से सुरक्षा के लिए 72.17 करोड़ से आठ जगहों बनेंगे कवच

Fri, 27 Mar 2026 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2026 11:51 PM IST
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For flood protection, shields will be built at eight places worth Rs 72.17 crore.
मझौंवा क्षेत्र के नौरंगा गांव में मकान को अपने आगोश लेती गंगा नदी की लहरें। फाइल फोटो
बलिया। बाढ़ से पहले शासन की ओर से तटवर्ती इलाकों को सुरक्षित करने के लिए एक बार फिर खजाने का मुंह खोला गया है। नाबार्ड के सहयोग से 72.17 करोड़ की 8 कटान रोधी परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है।
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इसमें लगभग 10 करोड़ की परियोजना गंगा उस पर नौरंगा को बचाने के लिए हैं। पिछले साल बाढ़ में यहां काफी तबाही हुई थी। स्थानीय लोगों ने बाढ़ सुरक्षा कार्य के लिए काफी दिनों तक धरना भी दिया था। शासन की ओर से इस बार जिन परियोजनाओं को स्वीकृति दी है उसमें पांच परियोजना सरयू नदी के किनारे हैं। बाढ़ दिनों में सरयू काफी रौद्र रूप में होती है। वहींं, गंगा नदी के किनारे तीन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। शासन की ओर से परियोजनाओं की स्वीकृति और पहली किस्त में 10.60 करोड़ की धनराशि जारी होने के बाद विभाग की ओर से इन परियोजनाओं के लिए टेंडर आदि की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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--गंगा में समा गए थे 134 परिवारों के आशियाने
मझौवां। पिछले साल 21 जुलाई को बाढ़ के कारण चक्की नौरंगा गांव में 134 परिवारों के घर, खेत, खलिहान गंगा नदी में समा गए। राहत और पुनर्वास के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिला। पट्टे का आवंटन आज तक नहीं हुआ।
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तीन महीने बीत जाने के बावजूद पुनर्वास पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। कटान पीड़ित शांति देवी का कहना है कि गंगा सब कुछ निगल गई। हमारे पास अब कुछ नहीं बचा। एक मकान में चार भाई रहते थे। शासन की तरफ से एक व्यक्ति के नाम से गृह अनुदान राशि प्राप्त हुई। तीन भाइयों को सहायता राशि से वंचित कर दिया गया। इसी तरह से शिवकुमारी देवी ने बताया कि किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला। कटान पीड़ित जगनारायण ठाकुर का कहना है कि काम-धंधा छिन गया, रहने की जगह भी नहीं।

बाढ़ खंड के एक्सईएन संजय मिश्रा ने बताया कि शासन से धनराशि जारी हुई है। निविदा की प्रक्रिया चल रही है। टेंडर होने के बाद काम कराया जाएगा। प्रयास रहेगा की परियोजनाएं समय से पूरी हो जाएं।
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