बलिया में कटान से बढ़ा संकट: सैकड़ों घरों पर खतरा, दहशत में ग्रामीण, बोले- आमरण अनशन की दी चेतावनी
Ballia News: सरयू कटान से वशिष्ठ नगर- गोपाल नगर पर संकट गहरा रहा है। ग्रामीणों में धरना शुरू किया। उन्होंने कहा कि बचाव नहीं हुआ तो आमरण अनशन करेंगे।
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बलिया जिले में सरयू नदी की तेज धाराओं से वशिष्ठ नगर और गोपाल नगर के सिवान पर तेजी से हो रहे कटान ने दोनों गांवों के अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। आक्रोशित ग्रामीणों ने शुक्रवार को कटान स्थल पर जिला प्रशासन, शासन, जनप्रतिनिधियों और बाढ़ विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद कटान स्थल के समीप पीपल के पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए। समाचार लिखे जाने तक दोनों गांवों के सैकड़ों ग्रामीण धरने पर डटे रहे।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल कटानरोधी कार्य शुरू नहीं कराया तो उनका धरना आमरण अनशन में बदल जाएगा। उनका कहना है कि बाढ़ और कटान से विस्थापित होकर जीवन बिताने से बेहतर वे आमरण अनशन पर अपने प्राण त्यागना उचित समझेंगे।
उत्तरी दियरांचल के वशिष्ठ नगर, धूपनाथ के डेरा, गोपाल नगर, शिवाल मठिया, चाई छपरा, अधिसिझुआ और बकुलहा के सामने सरयू नदी लगातार कटान कर रही है। इनमें गोपाल नगर और वशिष्ठ नगर के सिवान पर स्थिति सबसे अधिक गंभीर हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार नदी अब बस्ती से महज 50 मीटर दूर रह गई है। यदि नदी इतनी ही और आगे बढ़ी तो सैकड़ों मकान कटान की जद में आ जाएंगे और हजारों लोग बेघर हो जाएंगे।
पूर्व प्रधान अर्जुन यादव, सुनील यादव, निर्मल यादव, बीलर यादव, राम प्रकाश यादव, जय नारायण यादव, चंद्रदेव यादव, पप्पू यादव समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अब तक न तहसील प्रशासन का कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके पर पहुंचा है, न ही बाढ़ विभाग का कोई जिम्मेदार।
विधायक जयप्रकाश अंचल और सांसद सनातन पांडेय से कई बार कटान स्थल का निरीक्षण करने तथा शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराने की मांग की गई, लेकिन केवल आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ विभाग के अधिकारी भी कटान स्थल से दूरी बनाए हुए हैं। उन्हें शायद तबाही का इंतजार है, ताकि गांव उजड़ने के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
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उन्होंने बताया कि पिछले चार महीनों से लगातार समाधान दिवस और जिलाधिकारी के जनता दर्शन में शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बैरिया तहसील की स्थिति यह है कि आज तक लेखपाल भी कटान का जायजा लेने नहीं पहुंचे। ऐसे में अब आमरण अनशन ही अंतिम विकल्प बचा है। फिलहाल धरना जारी है।