बलिया में बाढ़ से आफतः बाढ़ के पानी में उतराया मिला मजदूर का शव, चार दिन से था लापता
अरुण कुमार ठाकुर सोमवार से लापता था। परिजन रिश्तेदारी और परिचितों के यहां उसकी तलाश कर रहे थे। बुधवार देर शाम पाण्डेयपुर-दया छपरा के बीच शव उतराया मिला।
विस्तार
यूपी के बलिया जिले में गंगा के रौद्र रूप धारण करने से टोंस व मगई नदी का पानी अब बड़े तबाही के संकेत देने लगे हैं। इधर, गंगा नदी में आई बाढ़ के पानी में डूबने से एक और मजदूर की मौत हो गई है। चार दिन से लापता चिंतामणि राय के टोला पांडेयपुर निवासी अरुण कुमार का शव बुधवार देर शाम पानी में उतराया मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पातल भेज दिया।
अरुण कुमार ठाकुर पुत्र शिवजी ठाकुर ढलाई मशीन पर काम करता था। सोमवार को मजदूरी कर अन्य मजदूरों के साथ दया छपरा आया, लेकिन घर नहीं लौटा। परिजन रिश्तेदारी और परिचितों के यहां उसकी तलाश कर रहे थे। बुधवार देर शाम पाण्डेयपुर-दया छपरा के बीच शव उतराया मिला।
ग्रामीणों ने चिन्तामणि राय के टोला निवासी धनेजर सिंह को सूचना दी। धनेजर सिंह नाव लेकर पहुंचे। ग्रामीणों के सहयोग से शव को खींच कर एनएच-31 के किनारे लगाया गया। अरुण की पत्नी गीता देवी का शव को देखकर बुरा हाल था। बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह, एसडीएम अभय सिंह भी मौके पर पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
अरुण परिवार का एक मात्र कमाने वाला सदस्य था। पत्नी गीता के साथ पुत्री कुमारी रिंकी, अंजलि, अंशिका, पुत्र सत्यम रो-रोकर बुरा हाल था। इससे पहले बुधवार को बैरिया थाना क्षेत्र के गोपालपुर गांव में गंगा की बाढ़ के पानी में गिर कर डूब जाने से टेंगरही गांव निवासी जगदम्बा चौबे 58 की बुधवार को मौत हो गई थी।
बलिया में बाढ़ का कहर
बलिया में गंगा का बढ़ाव जारी है और अब तक करीब 20 गांव पूरी तरह बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं। गोपालपुर गांव में मंगलवार की रात तीन व बुधवार की सुबह एक मकान कटान की भेंट चढ़ गया। गंगा व सरयू के साथ ही टोंस नदी का भी कहर शुरू हो गया है। गांव घिरते जा रहे हैं। लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक पर्याप्त नाव आदि की व्यवस्था नहीं कि जा सकी है। इसके चलते ग्रामीणों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट चुका है।
उधर, गांवों के पास बाढ़ का पानी भरने के कारण विद्युत विभाग ने सुरक्षा की दृष्टि से बैरिया तहसील क्षेत्र के 35 व सदर तहसील के 10 गांवों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी है। विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता चंद्रकेश उपाध्याय ने बताया कि सभी उपकेंद्र प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि जहां भी बाढ़ की स्थिति बने उन गांवों के तारों को खोल दें ताकि कोई बड़ा हादसा न हो सके।
नदी के पानी ने इलाके के कई गांवों को टापू में तब्दील कर दिया है। साथ ही अब तक हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो चुकी है। पशुपालकों को अब चारे के संकट की चिंता सताने लगी है। इलाके में भूसा भी नहीं मिल पा रहा है। बाढ़ के पानी में डूबी हुई फसल भी चारा लायक नहीं है। ऐसे में किसान अपने मवेशियों को लेकर चिंतित हैं। साथ ही बाढ़ क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति बंद कर है केरोसिन का वितरण भी नहीं हो रहा है। इसके चलते सांप, बिच्छू का डर भी बाढ़ग्रस्त गांव के लोगों में समाया हुआ है।