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मुख्य धारा में लाया जाए मछुआ समाज
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निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दिया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
ज्ञापन में कहा कि भाजपा को हाल में हुए पंचायत चुनाव में मिली करारी हार से सबक लेना चाहिए। पंचायत चुनावों के परिणाम ने भाजपा को बता दिया है कि जनता में बड़ी नाराजगी है, ये नाराजगी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव तक रही तो भाजपा का भी वही हाल होगा जो पूर्ववर्ती पार्टियों का आज के समय में है। गठबंधन के समय भाजपा ने निषाद आरक्षण मुद्दे को हल करने का वादा किया था लेकिन आज तक केंद्र और प्रदेश में बीजेपी की सरकार होने के बाद भी आरक्षण का मुद्दा हल होने का नाम नहीं ले रहा है। मछुआ समाज ने देश को आजाद कराने में बड़ा योगदान दिया था और संविधान में भी मझवार, गौड, तुरैया, कोली आदि को अनुसूचित जाति के तहत शामिल किया गया था। लेकिन कांग्रेस की कुनीतियों के चलते 1992 में मछुआ समाज को धोखे से अनुसूचित जाति रहते हुए भी पिछड़ी जाति में डालकर अधिकारों से वंचित कर दिया गया। देश के मछुआ समुदाय एवं उनकी उपजातियों का साथ ही सत्ता सुख से वंचित सभी जातियों और समुदायों का विकास हो, इनका सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक उत्थान हो, विकास की मुख्यधारा में उन्हे लाया जा सके उन्हे राजनीतिक संरक्षण मिले, इनके ऊपर जो अत्याचार हो रहा है उन्हें न्याय मिले।
निषाद पार्टी भाजपा के गठबंधन ने उच्च जाति व उच्च अधिकारियों से अनुसूचित जाति आरक्षण प्रमाण पत्र जारी कराने का शासनादेश जारी करा कर डीएम तक पहुंचाया था। धरना देने वालों में राधेश्याम बिंद ,चंद्रमा कश्यप, शिवनारायण निषाद, हरिकृष्ण पासवान, देवेंद्र निषाद, अक्षयलाल कश्यप, बजरंगी निषाद, सत्यनारायण बिंद, राहुल कुमार बिंद, विजय कुमार बिंद आदि रहे।
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ज्ञापन में कहा कि भाजपा को हाल में हुए पंचायत चुनाव में मिली करारी हार से सबक लेना चाहिए। पंचायत चुनावों के परिणाम ने भाजपा को बता दिया है कि जनता में बड़ी नाराजगी है, ये नाराजगी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव तक रही तो भाजपा का भी वही हाल होगा जो पूर्ववर्ती पार्टियों का आज के समय में है। गठबंधन के समय भाजपा ने निषाद आरक्षण मुद्दे को हल करने का वादा किया था लेकिन आज तक केंद्र और प्रदेश में बीजेपी की सरकार होने के बाद भी आरक्षण का मुद्दा हल होने का नाम नहीं ले रहा है। मछुआ समाज ने देश को आजाद कराने में बड़ा योगदान दिया था और संविधान में भी मझवार, गौड, तुरैया, कोली आदि को अनुसूचित जाति के तहत शामिल किया गया था। लेकिन कांग्रेस की कुनीतियों के चलते 1992 में मछुआ समाज को धोखे से अनुसूचित जाति रहते हुए भी पिछड़ी जाति में डालकर अधिकारों से वंचित कर दिया गया। देश के मछुआ समुदाय एवं उनकी उपजातियों का साथ ही सत्ता सुख से वंचित सभी जातियों और समुदायों का विकास हो, इनका सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक उत्थान हो, विकास की मुख्यधारा में उन्हे लाया जा सके उन्हे राजनीतिक संरक्षण मिले, इनके ऊपर जो अत्याचार हो रहा है उन्हें न्याय मिले।
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निषाद पार्टी भाजपा के गठबंधन ने उच्च जाति व उच्च अधिकारियों से अनुसूचित जाति आरक्षण प्रमाण पत्र जारी कराने का शासनादेश जारी करा कर डीएम तक पहुंचाया था। धरना देने वालों में राधेश्याम बिंद ,चंद्रमा कश्यप, शिवनारायण निषाद, हरिकृष्ण पासवान, देवेंद्र निषाद, अक्षयलाल कश्यप, बजरंगी निषाद, सत्यनारायण बिंद, राहुल कुमार बिंद, विजय कुमार बिंद आदि रहे।
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