बाढ़: बलिया में गंगा का रौद्र रूप जारी, मंदिर नदी में विलीन, कई गांव बने टापू, पलायन को मजबूर हुए ग्रामीण
बलिया जिले के दूबेछपरा, गोपालपुर व उदईछपरा गांव में सबसे खौफनाक मंजर दिख रहा है। गायघाट गेज पर गंगा का जलस्तर रविवार सुबह आठ बजे 59.22 मीटर रिकार्ड किया गया, जो खतरा बिंदु से करीब डेढ़ मीटर ऊपर है।
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उत्तर प्रदेश के बलिया में गंगा की उफनाई लहरों ने तबाही मचानी शुरू कर दी है। रविवार तड़के नदी की लहरों ने केहरपुर में स्थित वर्षों पुराने काली मंदिर व विशाल पेड़ को अपनी धारा में समेट लिया। कई लोगों के मकान भी गंगा में समा गए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में अफरातफरी का आलम है। ग्रामीण अपना घर-बार छोड़ पलायन के लिए मजबूर हैं।
गायघाट गेज पर नदी का जलस्तर रविवार सुबह आठ बजे 59.22 मीटर रिकार्ड किया गया, जो खतरा बिंदु से करीब डेढ़ मीटर ऊपर है। वहीं, नदी में बढ़ाव अब भी जारी है। गंगा ने केहरपुर में अनिल ओझा, संतोष ओझा, अवधेश ओझा, सुशील ओझा व बिरजू ओझा के मकान को नदी में विलीन कर लिया।
नदी के वेग से सुघर छपरा और अवशेष केहरपुर गांव में अफरातफरी का माहौल है। लोग अपना सामान लेकर पलायन कर रहे हैं। उधर, दूबेछपरा, गोपालपुर व उदईछपरा गांव में सबसे खौफनाक मंजर दिख रहा है। डूब क्षेत्र के न सिर्फ स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं, बल्कि अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूबेछपरा में परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गईं है।
बाढ़ का पानी गांव में घुसने की वजह से पीड़ितों को अपने सामानों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। केहरपुर व सुघर छपरा के लोगों का आरोप है कि हम सभी ने अपनी समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों से लेकर उच्चाधिकारियों तक का दरवाजा खटखटाया, लेकिन किसी ने भी हमारी पीड़ा नहीं सुनी।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2019 में काली मंदिर के बगल में ही स्वामी हरेराम ब्रह्मचारी महाराज का स्मृति स्थल गंगा की लहरों में समा गया था। बावजूद इसके जिम्मेदार इस भयावह दिन का इंतजार करते रहे।
टोंस और मगई भी उफनाई, परेशानी बढ़ी
बलिया में गंगा के उच्चतम बाढ़ स्तर की ओर से बढ़ने के साथ टोंस और मगई नदी भी उफनाने लगी हैं। टोंस का जलस्तर भी खतरा बिंदु को पार कर गया है। कटान से जहां किसानों की उपजाऊ भूमि नदी की धारा में समाने लगी है। वहीं, नदियों का पानी किसानों के खेतों में घुसने लगा है। किसान जहां अपना सामान समेटने लगे हैं। मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया गया है।
गंगा के पानी से शाहपुर, बभनौली और इच्छा चौबे का पुरा गांव के पास उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो रही है। मंगई नदी मिल्की गांव में कटान कर रही है। तीनों नदियों का पानी खेतों में घुसने लगा है। तटवर्ती इलाकों के लोग बाढ़ की आशंका से भयभीत हैं। शाहपुर, बभनौली गांव के ग्रामीणों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है। गंगा का पानी उमरपुर दियारे में पहुंच गया है।
...तो तबाही मचना तय
खरीफ एवं सब्जी की खेती में करोड़ों का नुक़सान हो सकता है। टोंस नदी का पानी चांद नाले को पार कर खेतों में घुसने लगा है। गंगा का जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो दर्जनों गांव टापू में तब्दील हो जाएंगे। शनिवार को सपा नेता बंशीधर यादव ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया। गंगा के कटान को देख दियारे से मवेशियों को लाने के लिए स्टीमर की मांग की।
सरयू का जलस्तर घटा, कटान जारी
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शनिवार शाम जलस्तर 63.910 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 64.010 है। लाल निशान से 0.100 मीटर नीचे बहने वाली नदी के तेवर नरम पड़ गए हैं। अगले 24 घंटे में कमी का सिलसिला जारी रहने का पूर्वानुमान किया गया है। कुछ तटवर्ती क्षेत्रों में कटान हो रहा है। कृषि योग्य भूमि कट-कट कर नदी की जलधारा में विलीन हो रही है।