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डीएपी के साथ नैनो यूरिया भी लेने के दबाव से किसान परेशान
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बलिया। रबी की बुआई इन दिनों जोरों पर है और किसान डीएपी को लेकर परेशान हैं। अब किसानों के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। किसानों पर प्रति बोरी डीएपी पर एक पैक नैनो यूरिया लेने का दबाव बनाया जाता है और नहीं लेने पर किसानों को डीएपी नहीं मिल पाता।
सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही है लेकिन जिले के किसानों को राहत के बदले परेशानी ही मिल रही है। इन दिनों रबी बुआई जोरों पर है लेकिन अधिकांश सहकारी समितियों पर पर्याप्त डीएपी नहीं पहुंचने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सहकारी क्षेत्रों में इफको डीएपी मिलती है, जिस पर किसानों को काफी भरोसा होता है। लेकिन इन दिनों किसानों के लिए नया मुसीबत सामने आ गया है। बताया जाता है कि इफको डीएपी की प्रति बोरी खरीद पर एक पैक नैनो यूरिया लेना आवश्यक कर दिया गया है। आलम यह है कि किसान किसी तरह खाद खरीदने के लिए पैसे का इंतजाम कर डीएपी लेने पहुंचते हैं लेकिन वह इसलिए नहीं खरीद पाते क्योंकि नैना यूरिया के लिए उनके पास पैसे होते नहीं हैं। इसे लेकर किसानों में काफी आक्रोश है। किसानों का मानना है कि अभी बुआई होनी है। ऐसे में वह नैनो यूरिया लेकर क्या करेंगे। दूसरी ओर, किसानों का मानना है कि नैना यूरिया को खपाने के लिए किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है।
2650 एमटी डीएपी की रैक पहुंची, किल्लत होगी दूर
जिले में रबी की बुआई के समय अधिकांश समितियों पर डीएपी की किल्लत है लेकिन यह किल्लत अब दूर हो जाएगी। जिले में 2650 मीट्रिक टन इफको डीएपी की रैक पहुंच गई है। अधिकारियों की मानें तो इसे सहकारी समितियों को आवंटित करते हुए भेजा जाएगा। इस उर्वरक की खेप समितियों पर पहुंचने के बाद डीएपी की किल्लत कुछ हद तक दूर होगी।
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डीएपी के साथ नैना यूरिया की बिक्री आवश्यक नहीं की गई है लेकिन सरकार की ओर से नैनो यूरिया किसानों तक पहुंचाने के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को नैनो यूरिया का प्रयोग करना चाहिए। - धर्मेंद्र कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी, बलिया
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सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही है लेकिन जिले के किसानों को राहत के बदले परेशानी ही मिल रही है। इन दिनों रबी बुआई जोरों पर है लेकिन अधिकांश सहकारी समितियों पर पर्याप्त डीएपी नहीं पहुंचने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सहकारी क्षेत्रों में इफको डीएपी मिलती है, जिस पर किसानों को काफी भरोसा होता है। लेकिन इन दिनों किसानों के लिए नया मुसीबत सामने आ गया है। बताया जाता है कि इफको डीएपी की प्रति बोरी खरीद पर एक पैक नैनो यूरिया लेना आवश्यक कर दिया गया है। आलम यह है कि किसान किसी तरह खाद खरीदने के लिए पैसे का इंतजाम कर डीएपी लेने पहुंचते हैं लेकिन वह इसलिए नहीं खरीद पाते क्योंकि नैना यूरिया के लिए उनके पास पैसे होते नहीं हैं। इसे लेकर किसानों में काफी आक्रोश है। किसानों का मानना है कि अभी बुआई होनी है। ऐसे में वह नैनो यूरिया लेकर क्या करेंगे। दूसरी ओर, किसानों का मानना है कि नैना यूरिया को खपाने के लिए किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है।
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2650 एमटी डीएपी की रैक पहुंची, किल्लत होगी दूर
जिले में रबी की बुआई के समय अधिकांश समितियों पर डीएपी की किल्लत है लेकिन यह किल्लत अब दूर हो जाएगी। जिले में 2650 मीट्रिक टन इफको डीएपी की रैक पहुंच गई है। अधिकारियों की मानें तो इसे सहकारी समितियों को आवंटित करते हुए भेजा जाएगा। इस उर्वरक की खेप समितियों पर पहुंचने के बाद डीएपी की किल्लत कुछ हद तक दूर होगी।
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डीएपी के साथ नैना यूरिया की बिक्री आवश्यक नहीं की गई है लेकिन सरकार की ओर से नैनो यूरिया किसानों तक पहुंचाने के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को नैनो यूरिया का प्रयोग करना चाहिए। - धर्मेंद्र कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी, बलिया