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फसल की बर्बादी ने ली किसान की जान
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Wed, 29 Apr 2015 10:42 PM IST
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मौसम की खराबी से बर्बाद फसलों को देख अब एक और किसान की जान चली गई है। क्षेत्र के नगवा गांव निवासी मोहन तुरहा (45) मंगलवार को आए तूफान से बची फसल के भी बर्बाद होने से चिंतित था।
बुधवार को उसने दम तोड़ दिया। मोहन ने लगान पर खेती की थी। पहले ही मौसम की मार से फसल खराब हो चुकी थी। रही सही कसर मंगलवार की तूफान ने पूरी कर दी। उसे चिंता थी कि कैसे कर्ज चुकाएगा।
मोहन तुरहा (45) लगान पर खेत लेकर लगभग छह बीघे में गेहूं और सब्जी की खेती किया था। लगान पर खेत लेने के साथ ही खेती के लिए वह गांव के कुछ लोगों से कर्ज भी लिया था।
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ओलावृष्टि के कारण फसल बर्बाद हो गई। फसल बर्बाद होने के कारण वह काफी परेशान हुआ और बीमार रहता था। बची फसल को मोहन समेटने का प्रयास कर रहा था। इसी बीच मंगलवार को आई आंधी और बारिश में सब कुछ खत्म हो गया। इस स्थिति को वह बर्दाश्त नहीं कर सका। बुधवार सुबह सदमे से उसकी मौत हो गई।
किसान की पांच पुत्रियां और चार पुत्र हैं। केवल एक बेटी की शादी ही हो पाई है। साल भर पूरे परिवार का खर्च चलाना भी उसके लिए पहाड़ जैसा दिखने लगा था। पत्नी बुचिया देवी का रोते-रोते बुरा हाल है। उधर सदर एसडीएम बच्चा लाल मौर्य ने बताया कि मोहन की सामान्य मृत्यु हुई है। सदमे से नहीं।
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बुधवार को उसने दम तोड़ दिया। मोहन ने लगान पर खेती की थी। पहले ही मौसम की मार से फसल खराब हो चुकी थी। रही सही कसर मंगलवार की तूफान ने पूरी कर दी। उसे चिंता थी कि कैसे कर्ज चुकाएगा।
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मोहन तुरहा (45) लगान पर खेत लेकर लगभग छह बीघे में गेहूं और सब्जी की खेती किया था। लगान पर खेत लेने के साथ ही खेती के लिए वह गांव के कुछ लोगों से कर्ज भी लिया था।
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ओलावृष्टि के कारण फसल बर्बाद हो गई। फसल बर्बाद होने के कारण वह काफी परेशान हुआ और बीमार रहता था। बची फसल को मोहन समेटने का प्रयास कर रहा था। इसी बीच मंगलवार को आई आंधी और बारिश में सब कुछ खत्म हो गया। इस स्थिति को वह बर्दाश्त नहीं कर सका। बुधवार सुबह सदमे से उसकी मौत हो गई।
किसान की पांच पुत्रियां और चार पुत्र हैं। केवल एक बेटी की शादी ही हो पाई है। साल भर पूरे परिवार का खर्च चलाना भी उसके लिए पहाड़ जैसा दिखने लगा था। पत्नी बुचिया देवी का रोते-रोते बुरा हाल है। उधर सदर एसडीएम बच्चा लाल मौर्य ने बताया कि मोहन की सामान्य मृत्यु हुई है। सदमे से नहीं।